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मोदी के नाम यह चिट्ठी पढ़ रौंगटे खड़े हो जाएंगे!

Photo Courtesy: Indian Express
दीपक शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं
दीपक शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की रात जो गहरी लकीर खींची है, उस लकीर के एक तरफ अब तीन फीसदी लोग हैं और दूसरी तरफ सारा देश। मुझे विश्वास है कि इस लकीर को आपने अचानक नही खींचा। उससे पहले कई रातें, कई दिन, ये विचार ज़रूर किया होगा कि लकीर खींचने के बाद आप खुद कहाँ खड़े होंगे? 3 फीसदी के साथ या फिर 97 फीसदी के साथ?

अब तो लकीर खिंच चुकी है… तीर निकल चुका है… चक्र चल गया है। अब वो बिल्डर, वो आढ़ती, वो अंगड़िया, वो हवालेबाज़, वो डीलर, वो पावर ब्रोकर…अब वो आपके साथ नही हैं। अब वो आपके सामने हैं। ये वही नंबर 2 वाला तबका है जो चुनाव में गड्डियां बरसाता है। जो सूद की, ब्याज की, रिश्वत की, दलाली की, जीबी रोड की, मटका की, स्मैक की, सराफा की… हर काली रकम नेता पर निछावर करता है। ये तबका ही राजनीति का, सत्ता का, सरकार का गेम चेंजर है। इसके पीछे 0.10 फीसदी वो क्रीमी लेयर, खरबपति वाला तबका खड़ा है जिसे देश में लोग टाटा-बिड़ला कहते हैं।

मोदी जी नाराज़ तो ये किंग मेकर तबका भी आप से है। ये वही बाहुबली कॉरपोरेट है जो कुल राजस्व का चालीस परसेंट सरकार को देता हैं। जो एक हाथ से सरकार को लूटता हैं और दूसरे हाथ से सरकार को कुछ देता है। ये बाहुबली भी भीतर ही भीतर आप से बेहद नाराज़ हैं। शायद अब आप लकीर के इस तरफ हैं, जिस तरफ वोट बैंक है। जो 20 दिन से सांप जैसी दिखने वाली लंबी-लंबी कतारों में खड़ा है। जिसने अभी इसलिए उफ़ नहीं किया, क्योंकि आपने असली चोट उस सेठ को दी जो इन्हीं कतारों में खड़े लोगों का दुह रहा था। लेकिन लकीर के उस तरफ वो तीन परसेंट है जिसके पास इस वोट का बैंक है। मोदी जी गणित विचित्र है। आपको 97 परसेंट वाले का वोट भी चाहिए और आपकी पार्टी को 3 परसेंट वाले का पैसा भी… गणित वाकई विचित्र है।

सच ये है कि देश का बहुमत अब मूड बना चुका है। वो अब कतई नही चाहता कि 70 साल का ये सबसे बड़ा फैसला फुस्स हो जाए। ये फैसला फुस्स हुआ तो आप भी फुस्स हो जाएंगे। ये फैसला हारेगा तो आप चुनाव भी हारेंगे। 2017 के सभी विधानसभा चुनाव से लेकर 2019 के महासंग्राम तक। आप हर चुनाव हारेंगे अगर ये फैसला फुस्स हुआ।

मोदी जी आपकी हार का मुझे इतना गम नहीं होगा, लेकिन आपकी हार के बाद फिर कम से कम अगले 50 साल तक इस देश का कोई प्रधानमंत्री काली कमाई वालों पर कलम चलाने का साहस नहीं जुटा पाएगा। आपसे ज्यादा अब हम हारेंगे। ये लड़ाई हारे तो बरसों-बरस टूट जायेंगे हम। फिर वो दो कमरे का फ्लैट, वो चार पहिये की गाड़ी, वो गाढ़ी कमाई के पैसे का फल, वो छोटी-छोटी ज़िन्दगी की हसरतें… सब गँवा बैठेंगे हम।

मोदी जी, आपकी तैयारियों में अब भले ही कमियां रह गई हों। भले ही सबको प्रसव पीड़ा से गुजरना पड़ रहा है… भले ही दिहाड़ी का मज़दूर भटक रहा है और कुछ महीने भटक सकता है। पर देश के इस दंश की अब सर्जरी कर दीजिए। अब गांडीव मत रखियेगा। अब तीर हवा में है उसे सही दिशा दीजिए।

अब भूल जाइये बीजेपी का कोष। भूल जाइये संघ का कोष। भूल जाइये चुनाव का कोष। अब बोल दीजिए अपनी कैबिनेट से कि सब मनोहर पर्रीकर, सुरेश प्रभु बन जाएं। अब बोल दीजिए धर्मेंद्र प्रधान और पीयूष गोयल से कि तुम्हारी ज़रूरत नहीं। अब कतार में खड़ा देश मेरी मदद करेगा।

अगर हम सिर्फ किसी के वादों पर 10-10 रुपए देकर रामलीला मैदान से एक पार्टी को जन्म दे सकते हैं, तो अगर आपने सबसे बड़ी कुर्सी पर रहकर कुछ करके दिखा दिया तो ये देश आपके आगे बिछ जायेगा। अब मत लीजिए पीयूष गोयल से चुनाव में हेलीकाप्टर का पैसा। अब धर्मेंद्र प्रधान और अमित शाह को छोड़िए। चुनाव के ख़र्चों के नाम पर ये लोग आपकी साख डुबो देंगे। आपने बहुत बड़ी लकीर खींच दी है। इसलिए जो उधर रह गए उन्हें छोड़ दीजिए।

मोदी जी अब आप वो 7 लाख करोड़ के नोट जब्त कराइये जो 20 दिन बाद भी बैंक में नहीं पहुंचे हैं। अब आप उस रियल एस्टेट को खंगाल दीजिए, जहाँ इससे भी 10 गुना ज्यादा काला माल दबा है। अब सराफा और अंगाड़ियों की थैली में हाथ डाल दीजिए।

आपकी कैबिनेट के कुछ कमज़र्फ़ अगर पीछे हटने लगें तो भी आप अकेले बढ़िए।

मोदी जी आगे बढ़िए

अरे… एक नज़र पीछे तो देखिए।

जनता आपके पीछे खड़ी है।

(दीपक शर्मा के फेसबुक पेज से साभार)

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