अब आम लोगों तक पैसा पहुंचाएंगे ‘रॉबिनहुड मोदी’!

रॉबिनहुड कहानियों का एक ऐसा किरदार है जो अमीरों को लूटकर गरीबों में बांट देता था। नोटबंदी के साथ पीएम नरेंद्र मोदी की इमेज आम जनता के बीच वैसी ही हो गई है। महाराष्ट्र नगर पालिका और पंचायत चुनाव के नतीजों ने इस बात पर मुहर लगा दी है। नोटबंदी के कारण बरसों से तिजोरियों में पड़ा अरबों रुपया बाहर आ गया। इस पैसे का बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने तक पहुंच भी चुका है। खुद पीएम मोदी ने साफ संकेत दिया है कि अब ये पैसा उस तबके तक पहुंचाया जाएगा जिन्हें नोटबंदी के कारण बिना किसी अपराध के भी परेशानियां उठानी पड़ीं। हम आपको बताते हैं उन 2 बड़े कदमों के बारे में जिनका आने वाले दिनों में ऐलान हो सकता है।

बजट में इनकम टैक्स कम हो सकता है

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल के बजट में सरकार इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने जा रही है। इसके अलावा आयकर की दरें भी कम होने के आसार हैं। पीएम मोदी चाहते हैं कि ईमानदारी से टैक्स देने वाले नौकरीपेशा लोगों को यह एहसास दिलाना जरूरी है कि सरकार को उनकी फिक्र है। बहुत संभव है कि इनकम टैक्स छूट की सीमा को 5 लाख कर दिया जाए। यानी 5 लाख तक इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। अगर आप साल में 7 साल रुपये कमाते हैं तो आपको सिर्फ 2 लाख रुपये पर टैक्स देना होगा। अभी टैक्स छूट की सीमा ढाई लाख रुपये है। अगर ऐसा होता है तो लोगों की आमदनी बढ़ेगी। इससे खर्च भी बढ़ेगा और कारोबार-धंधों को रफ्तार मिलेगी।

जनधन खातों के जरिए गरीबों को मदद

सूत्रों के मुताबिक सरकार अब जनधन खातों को सही मायनों में गरीबों के लिए इस्तेमाल करने की तरफ बढ़ रही है। नोटबंदी के बाद सरकारी खजाने में 3 से 4 करोड़ रुपये आने का अनुमान है। सरकार इसमें से 1 लाख करोड़ रुपये फौरन सीधे गरीबों तक पहुंचाने के तरीकों पर विचार कर रही है। इस रकम के बड़े हिस्से को छोटे-छोटे काम-धंधों या अलग-अलग योजनाओं के मद में गरीबों के खाते में सीधे डिपॉजिट करने के तरीकों पर विचार चल रहा है। ये पैसे खैरात की तरह नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने या नई तकनीक को अपनाने में मदद के तौर पर दिए जाएंगे। खुद पीएम मोदी ने यूपी में अपनी रैली में कहा था कि धन्नासेठों की तिजोरी से जो पैसे निकले हैं, वो गरीबों की किस्मत संवारने पर खर्च किए जाएंगे। संभवत: बजट में सरकार इसका एलान कर सकती है।

फिलहाल इन योजनाओं का क्या तरीका हो इस पर प्रधानमंत्री तमाम एक्सपर्ट्स और दूसरे लोगों से सलाह-मशविरा कर रहे हैं। क्योंकि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जनता को यह एहसास बना रहे कि नोटबंदी के बाद उन्हें हुई परेशानी का अब फल मिल रहा है। इसके लिए जरूरी है कि वो योजना सीधे जनता तक पहुंच रखती हो और इसमें भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे।

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