धंस रही हैं केजरीवाल सरकार की सड़कें और पुल!

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में बनी विकासपुरी-मीराबाग एलिवेटेड रोड उद्घाटन के चार महीने के अंदर ही धंसने लगी है। केजरीवाल सरकार ने दावा किया था कि उसने इस सड़क को बनाने में 100 करोड़ रुपये बचाए हैं। इसी साल 24 जुलाई को खुद सीएम केजरीवाल ने इसका बड़े धूमधाम से उद्घाटन किया था। एलिवेटेड रोड के ऊपर करीब चार फुट सड़क गुरुवार को धंस गई। कई लोग इस गड्डे में फंसकर हादसों के शिकार भी हुए। जिसके बाद लोकल लोगों ने ही गड्डे को घेर दिया। इसके अलावा भी पुल और इसकी रेलिंग्स में बड़ी-बड़ी दरारें बन चुकी हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद दिल्ली सरकार के पीडब्लूडी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।

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सड़कें और पुल बनाने में जमकर कमीशनखोरी!

जब इस सड़क का उद्घाटन हुआ था तभी स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि इसे बनाने में घटिया सामान का इस्तेमाल किया जा रहा है। समय से पहले और कम कीमत पर बनाने के दबाव में ठेकेदार और इंजीनियर ने जमकर लापरवाही बरती है। बीजेपी और कांग्रेस आरोप लगा रही हैं कि एलिवेटेड रोड बनाने के बदले मोटा कमीशन लिया गया है। जिसकी वजह से इतना घटिया काम हुआ है। अब यहां के लोग डर जता रहे हैं कि अगर सिर्फ चार महीने में इस एलिवेटेड पुल का ये हाल हो गया है तो 2-4 साल में ही यह गिर भी सकता है। एलिवेटेड रोड में डिवाइडर के साथ लोहे की रेलिंग लगी हुई हैं, लेकिन उनमें अभी से जंग लग चुकी है। रेलिंग और डिवाइडर जगह-जगह से टूटने भी लगा है। ऐसे में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि 100 करोड़ रुपये की बचत के नाम पर सरकार ने अपना कमीशन खाया और जैसे-तैसे घटिया पुल बना दिया? कांग्रेस के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा का कहना है कि केजरीवाल ने पुल के कमीशन के तौर पर करोड़ों रुपये खाए हैं और ये सारा पैसा पंजाब में चुनाव के लिए भेजा गया है।

विकासपुरी-मीराबाग एलिवेटेड रोड का उद्घाटन इसी साल जुलाई में हुआ था। अब इस पर जगह-जगह सड़क धंस रही है।

विकासपुरी-मीराबाग एलिवेटेड रोड का उद्घाटन इसी साल जुलाई में हुआ था। अब इस पर जगह-जगह सड़क धंस रही है।

सरकार ने बोला 100 करोड़ की बचत का झूठ!

3.6 किलोमीटर लंबी इस सड़क से यह पूरा सफर ट्रैफिक सिग्नल फ्री हो गया है। केजरीवाल सरकार ने दावा किया था कि पहले इसे बनाने के लिए 560 करोड़ का बजट तय हुआ था, लेकिन उनकी सरकार ने इसे 450 करोड़ में ही बनाकर दिखा दिया। इस तरह से उन्होंने 110 करोड़ रुपये की बचत कर ली। हालांकि इस पुल के निर्माण से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले 560 करोड़ का नहीं, बल्कि 410 करोड़ का बजट था। इस तरह से केजरीवाल सरकार ने इस एलिवेटेड रोड पर 10 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च कर दिए। दोनों में से कौन सा दावा सही है ये कहना तो मुश्किल है, लेकिन यह तय है कि इसे बनाने में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जिसका नतीजा है कि सिर्फ चार महीने में ही ये एलिवेटेड रोड जर्जर हो चुकी है।

मीडिया दबा रहा है भ्रष्टाचार की खबरें

दिल्ली में केजरीवाल सरकार के आने के बाद से फ्लाईओवर और सड़कें बनाने में बड़े पैमाने पर दलाली और कमीशनखोरी के आरोप लगते रहे हैं। सरकार दावा करती रही है कि वो इन्हें बनाने में पैसे बचा रही है लेकिन अंदर की कहानी कुछ और ही बताई जा रही है है। ज्यादातर कंस्ट्रक्शन इतना घटिया है कि अभी से दरारें दिखने लगी हैं। पिछले दिनों मधुबन से मुकरबा के बीच बने नए फ्लाईओवर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया था। उस वक्त भी मीडिया ने इस खबर को पूरी तरह दबा दिया था, क्योंकि तब केजरीवाल सरकार ने विज्ञापनों की धौंस देनी शुरू कर दी थी। उस वक्त न्यूज़लूज़ पर हमने यह रिपोर्ट भी पब्लिश की थी।

रिपोर्ट पढ़ें: विज्ञापनों के मलबे में दब गई फ्लाईओवर में दरार की खबरें

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