दिल्ली एयरपोर्ट पर इस मशीन में आपका स्वागत है!

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जाने वाले यात्रियों के लिए एक खास मशीन लगाई गई है, जिससे किसी शख्स के पूरे शरीर की तलाशी ली जा सकेगी। एयरपोर्ट की सिक्योरिटी को पूरी तरह से चाक-चौबंद करने की नीयत से यह फुल बॉडी स्कैनर लगाया गया है। यात्रियों को इस मशीन से गुजरना होगा और पास खड़े सिक्योरिटी स्टाफ को उसके कपड़ों के अंदर छिपी हर चीज का स्कैन दिख जाएगा। अभी तक दुनिया के बड़े हवाई अड्डों पर ही ऐसी मशीनें लगी हुई हैं। ये मशीनें आतंकवादियों और तस्करों को पकड़ने में सबसे कामयाब तरीका मानी जाती हैं।

जर्मनी से आया फुल बॉडी स्कैनर

एक जर्मन कंपनी के इस स्कैनर को एयरपोर्ट पर अभी ट्रायल के तौर पर लगाया गया है। सीआईएसएफ के 50 स्टाफ को इस मशीन के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई है। फिलहाल हर यात्री के लिए इस मशीन से गुजरना जरूरी नहीं रखा गया है। अभी एक मशीन होगी और सिर्फ उन लोगों को इससे गुजरने को कहा जाएगा जिन्हें इसमें ऐतराज न हो। हालांकि ट्रायल के बाद हर यात्री के लिए इस मशीन से गुजरना जरूरी होगा। इस साल के आखिर तक ट्रायल खत्म हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद चार सदस्यों की एक टीम एयरपोर्ट पर इनके इंस्टॉलेशन के बारे में आखिरी फैसला लेगी। एक स्कैनर मशीन घंटे भर में करीब 300 लोगों की तलाशी ले सकती है। इस लिहाज से एयरपोर्ट पर ज्यादा मशीनों की जरूरत होगी।

अब ऐसे होगी यात्रियों की तलाशी!

इस मशीन से एक्स-रे किरणें निकलती हैं जो अंदर खड़े व्यक्ति के शरीर में रखे हर चीज की तस्वीर दिखा देती हैं। ठीक वैसे जैसे कि सामान के स्कैनर से बैग में रखी सारी चीजें कंप्यूटर के स्क्रीन पर दिख जाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ कुछ सेकेंड का वक्त लगता है। इस मशीन से कुछ भी छिपाना संभव नहीं है। कई लोग यह शिकायत करते हैं कि फुल बॉडी स्कैन अपमानजनक है और इससे उनकी प्राइवेसी में दखलंदाजी होती है। इस बात को लेकर दुनिया भर में विवाद उठता रहा है।

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बेहद कारगर है फुल बॉडी स्कैनर

यह मशीन प्लास्टिक और लिक्विड समेत हर तरह के विस्फोटक को पकड़ सकती है। इसके अलावा नए तरह की हाइटेक गन, प्लास्टिक और मेटल से बनी छोटी पिस्तौल, नशीली दवाएं, सेरेमिक और मेटल के चाकू जैसी तमाम चीजें इस स्कैनर की नजरों से चूक नहीं सकतीं। दिल्ली एयरपोर्ट पर हर रोज 60 हजार के करीब लोग फ्लाइट पकड़ने के लिए पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में अभी लोगों की मैनुअल चेकिंग की जाती है, जिसमें चूक होने का काफी जोखिम होता है।

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