टीना डाबी-अतहर की शादी में मीडिया क्यों दीवाना?

नौकरी में एक साथ काम करते हुए लड़के-लड़कियों ने पहले भी अक्सर शादियां की हैं, लेकिन एक शादी है जो इन दिनों मीडिया में छाई हुई है। ये शादी है आईएएस टॉपर टीना डाबी और सेकेंड टॉपर अतहर आमिर उल सैफी की। दोनों अभी मंसूरी के लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी में ट्रेनिंग ले रहे हैं। टीना डाबी हिंदू हैं और अतहर कश्मीरी मुसलमान। शादी की तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन जल्द ही एनगेजमेंट होने की उम्मीद है। हैरत की बात है कि इस शादी को अभी से कुछ सेकुलर अखबारों और चैनलों ने ‘सपनों की शादी’ की तरह प्रचारित करना शुरू कर दिया है। सेकुलर मीडिया इस खबर से इतना खुश है कि मानो वो खुद इस शादी में बाराती बनकर नाचेंगे।

सेकुलर मीडिया की नीयत ठीक नहीं!

वैसे तो टीना और अतहर की शादी उनका निजी फैसला है, इस पर किसी को ऐतराज भी नहीं होना चाहिए। लेकिन मीडिया के इरादे बेहद आपत्तिजनक हैं। भारतीय सेकुलर मीडिया आम तौर पर ऐसी शादियों को खूब प्रचारित करता है। खास तौर पर अगर दूल्हा मुसलमान हो और लड़की हिंदू तो ऐसी शादियों को सेकुलर मीडिया आदर्श के तौर पर दिखाता है। अगर इसका उलटा हो जाए तो उन शादियों का कोई जिक्र भी नहीं होता। अगर इन शादियों में बाद में चलकर रिश्ता टूट जाए या मामला लव जिहाद का निकले तो भी मीडिया आंख, नाक और कान बंद कर लेता है। अब तक टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडियन एक्सप्रेस जैसे बड़े अखबार इस पर फीचर छाप चुके हैं और एनडीटीवी जैसे सेकुलर चैनलों के कैमरे भी टीना और अतहर की लवस्टोरी को दिखाने के लिए मंसूरी पहुंच चुके हैं।

कई लोग इस शादी को मिल रही मीडिया कवरेज को लेकर इसीलिए ऐतराज भी जता रहे हैं।

एक एंगल यह भी है कि दलित टॉपर के तौर पर मशहूर हुई टीना डाबी को क्या अपने समुदाय में एक लड़का नहीं मिला?

आए दिन मुस्लिम लड़कों से शादी करने वाली लड़कियां कभी लव जिहाद तो कभी तीन तलाक और एक से ज्यादा शादी जैसी बुराइयों का शिकार होती रहती हैं। सेकुलर मीडिया कभी इस दूसरे पहलू को नहीं दिखाता। हाल ही में जब दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की बेटी अपने मुस्लिम पति के धोखे का शिकार हुई तो मीडिया के इस तबके ने उस पूरे मामले पर मिट्टी डाल दी। इसी बात से समझा जा सकता है कि टीना डाबी और अतहर के निजी फैसले को क्यों राष्ट्रीय पर्व का विषय बनाने की कोशिश हो रही है।

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