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मी लार्ड, बैंकों ही नहीं कोर्ट के बाहर भी कतार है!

सुप्रीम कोर्ट ने आज बैंकों के एटीएम के बाहर लग रही कतारों पर चिंता जताई और कहा कि इसे देश में सड़कों पर दंगे हो सकते हैं। हैरत की बात है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस वक्त आई है जब देश की अदालतों के आगे करोड़ों मुकदमे कतार में हैं और हर रोज लाखों लोग अदालतों में बिना वजह धक्के खाते हैं। सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस अनिल आर दवे की दो सदस्यों की बेंच ने नोटबंदी को लेकर देशभर की अदालतों में दर्ज करवाए गए मुकदमों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि बेंच ने यह संकेत दिया कि इस मामले से जुड़े सारे मुकदमे दिल्ली ट्रांसफर किए जा सकते हैं।

कोर्ट के बाहर कतार से दंगे नहीं होंगे?

ताजा आंकड़ों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में 61,436 मुकदमे, हाई कोर्ट्स में 38,91,076 और निचली अदालतों में 2,30,79723 मुकदमे पेंडिंग हैं। दरअसल यह देश की सबसे लंबी लाइन है, जिनमें लोगों की जिंदगियां खप जाती हैं और कई बार तो मरने के भी कई-कई साल बाद इंसाफ मिलता है। बैंकों की लाइन पर सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस वक्त आई है जब ज्यादातर जगहों पर लाइनें कम हो रही हैं और सरकार ने लोगों को राहत पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी रखा हुआ है।

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‘लंच ब्रेक पर जाकर देखिए कतारें कम हुईं’

सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में हुई दलील के दौरान न्यायाधीशों ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि क्या आप हमारी इस बात से अलग राय रखते हैं कि बैंकों के आगे लग रही कतारों की वजह से देश में दंगे भड़क सकते हैं? इस पर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस पर कोई अलग राय नहीं है, लेकिन एटीम के आगे कतारें छोटी हो रही हैं। अटॉर्नी जनरल ने ये सुझाव भी दिया कि चीफ जस्टिस चाहें तो लंच ब्रेक पर खुद जाकर कतारों को देख सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी थोड़ी हैरानी में डालने वाली है क्योंकि खुद देश की अदालतें साल में काफी वक्त छुट्टी पर रहती हैं और इस दौरान संगीन मुकदमों में लोगों को लंबा-लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस बारे में हमने कुछ वक्त पहले एक रिपोर्ट भी पब्लिश की थी। नीचे लिंक पर क्लिक करके आप इसे पढ़ सकते हैं।

रिपोर्ट पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट की छुट्टियां देखकर आपको भी रोना आएगा!

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