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बीएमसी चुनाव में शिवसेना की मदद करेंगे केजरीवाल!

नोटबंदी के विरोध के नाम पर शिवसेना और आम आदमी पार्टी करीब आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक यह करीबी आम आदमी पार्टी के बीएमसी चुनाव से हटने के बाद की स्थिति में पैदा हुई है। यहां तक तय हो चुका है कि आम आदमी पार्टी परदे के पीछे से शिवसेना की मदद करेगी। केजरीवाल ने इस फॉर्मूले को मंजूरी भी दे दी है। दरअसल उद्धव ठाकरे चाहते हैं कि वो बीएमसी चुनाव बीजेपी से अलग होकर लड़ें। लेकिन विधानसभा चुनाव के तजुर्बे को देखते हुए हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में शिवसेना के एक सीनियर सांसद और अरविंद केजरीवाल के बीच इस मसले पर लंबी बातचीत भी हुई है। हालांकि बीजेपी के साथ गठबंधन पर अभी तक उद्धव ठाकरे आखिरी फैसला नहीं ले सके हैं।

मोदी विरोध बना करीबी का कारण?

दरअसल उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल, दोनों का ही पीएम नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक विरोध निजी ईर्ष्या की सीमाएं पार कर चुका है। ऐसे में ये दोनों नेता हर वो काम करते हैं जो मोदी के खिलाफ हो। मुंबई में आम आदमी पार्टी के एक सूत्र ने हमें बताया कि बीएमसी चुनाव से हटने के बाद से शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे केजरीवाल से बहुत खुश हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने अपना संदेश देने के लिए पार्टी सांसद को जिम्मेदारी दी थी। हालांकि केजरीवाल ने शिवसेना को यह मैसेज दिया है कि मुंबई में वो पार्टी कैडर की जिम्मेदारी नहीं ले सकते। लेकिन इतना तय है कि वो अपने कार्यकर्ताओं को हर वो काम करने को कहेंगे जिससे बीजेपी उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचता हो।

आप की मदद कर चुकी है शिवसेना!

हमारे सूत्र ने हमें बताया कि शिवसेना पिछले कुछ वक्त से आम आदमी पार्टी की मदद कर रही है। बीजेपी को शर्मिंदगी में डालने वाली कई खबरें शिवसेना ने आम आदमी पार्टी को लीक कीं। यहां तक कि बीजेपी के मंत्री रहे एकनाथ खड़से के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने पूरा अभियान शिवसेना से मिली जानकारी के दम पर चलाया था। यही कारण था कि आम आदमी पार्टी ने ज्यादातर बीजेपी के मंत्रियों पर ही आरोप लगाए और शिवसेना को इससे लगभग पूरी तरह मुक्त ही रखा। गठबंधन में सहयोगी होने के कारण शिवसेना खुलकर सामने नहीं आ पाती है, ऐसे में उद्धव ठाकरे आम आदमी पार्टी के मुंबई के लोकल नेताओं को अपना एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं। मुंबई में अगले साल फरवरी में बीएमसी के चुनाव होने हैं।

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