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नोटबंदी की मार, बीएमसी चुनाव नहीं लड़ेंगे केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पर करंसी बैन का असर दिखने लगा है। पार्टी ने मुंबई में बीएमसी का चुनाव नहीं लड़ने का एलान किया है। जबकि कुछ दिन पहले तक मुंबई यूनिट के नेता खुलकर कह रहे थे कि वो अभी बीएमसी चुनाव पर फोकस करेंगे। ऐसा बताया जा रहा है कि 500 और 1000 के नोट बंद होने से आम आदमी पार्टी को कई करोड़ की ब्लैकमनी का नुकसान हुआ है। बीएमसी चुनाव न लड़ने के फैसले को इसी के असर के तौर पर देखा जा रहा है। बीएमसी का चुनाव अगले साल फरवरी में होना है।

चुनाव लड़ने के लिए नहीं बचे पैसे!

ऐसा दावा किया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब और गोवा चुनाव के नाम पर करोड़ों रुपये कैश जमा कर रखा था। नोटबंदी से ये सारा पैसा बेकार हो गया है। पंजाब और गोवा चुनाव में उम्मीदवार उतारने का अरविंद केजरीवाल खुद औपचारिक तौर पर एलान कर चुके हैं, ऐसे में इन दोनों चुनावों से पीछे हटना संभव नहीं है। लेकिन पार्टी को आखिरकार बीएमसी चुनाव छोड़ना पड़ रहा है। अटकलें तो यहां तक हैं कि आने वाले वक्त में पार्टी को गुजरात और एमपी में चुनाव लड़ने के मंसूबे भी छोड़ने पड़ सकते हैं।

बीएमसी के लिए जोरशोर से थी तैयारी

आम आदमी पार्टी ने पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों पर खुलकर हमले बोले थे। इस सिलसिले में पार्टी ने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस तक कर डाली थीं। मीडिया से निजी बातचीत में महाराष्ट्र आम आदमी पार्टी के नेता खुलकर कह रहे थे कि उनका अगला टारगेट बीएमसी चुनाव है। चुनाव मैदान से हटने का आप का फैसला इतना लो-प्रोफाइल रहा कि अरविंद केजरीवाल ने दीपक वाजपेयी नाम के एक निचले कर्मचारी को मुंबई भेजकर वहां के नेताओं को इस फरमान की जानकारी दे दी। केजरीवाल के इस संदेशवाहक ने फैसले की कोई वजह तक नहीं बताई।

मुंबई में पिटती रही है आम आदमी पार्टी

पिछले लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने मुंबई की सभी 6 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और सभी सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई थी। इसे देखते हुए केजरीवाल ने सबसे पहले बीएमसी चुनाव लड़ने का फैसला छोड़ा है। उधर फैसले से मुंबई यूनिट के नेताओं में अंदर ही अंदर नाराजगी देखी जा रही है। आप नेशनल एग्जिक्यूटिव की सदस्य प्रीति शर्मा-मेनन ने कहा है कि अगर चुनाव लड़ने की इजाज़त मिलती तो आम आदमी पार्टी काफी असर छोड़ती। उन्होंने माना कि हाईकमान के इस फरमान से मुंबई के लोकल कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।

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