केजरीवाल को एक चार्टर्ड एकाउंटेंट का ओपन लेटर

आदरणीय केजरीवाल जी, मेरी उम्र 28 साल में है और मैं सूरत में चार्टर्ड एकाउंटेंट की प्रैक्टिस करता हूं। जब 500 और 1000 के नोट पर रोक लगी तो मुझे सबसे ज्यादा आपसे उम्मीद थी कि आप इसका समर्थन करेंगे, क्योंकि आप तो राजनीति में ब्लैकमनी और भ्रष्टाचार का विरोध करते हुए ही आए थे। जिसे इकोनॉमी की बिल्कुल भी समझ नहीं है, वो भी अच्छी तरह समझ रहा है कि मोदी सरकार के इस कदम से कालेधन वालों को कितनी दिक्कत हो गई है।

इस मसले पर आपका वीडियो देखकर मेरी सारी उम्मीदें चकनाचूर हो गईं। क्योंकि मुझे लगता था कि जो शुरुआती दिक्कतें हैं उन्हें दूर करने में आप मदद करेंगे, क्योंकि देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचारियों की नींद उड़ी हुई है। फिर भी आपने इस स्कीम को फेल करने की कोशिश शुरू कर दी। आपके इस रवैये का कारण तो आप ही जानते होंगे, लेकिन मैं आपको इस बारे में कुछ अहम बातें आपको बताना चाहता हूं।

प्वाइंट 1- 1000 हटाकर 2000 का नोट क्यों लाए?

केजरीवाल जी आपने वीडियो में कहा है कि सरकार के इस कदम को समझने में आपको पूरे दो दिन लगे। आपने कई ‘एक्सपर्ट्स’ से भी बात की, इसके बावजूद आप नहीं समझ सके कि 1000 की नोट हटाकर 2000 की नोट क्यों जारी की गई! आप तो इनकम टैक्स अफसर रहे हैं? फिर भी ये जरा सी बात आपके पल्ले नहीं पड़ी? चलिए मैं आपको बता देता हूं।

दो स्थितियों की कल्पना कीजिए।

पहली स्थिति में आपके सुझाव के मुताबिक 2000 का नोट नहीं लाया जाता और 1000 रुपये के ही नए नोट जारी किए जाते। अब मान लीजिए कि किसी व्यक्ति के पास 1000-1000 की नोट की शक्ल में 1 लाख रुपये काला धन है। इस व्यक्ति को इस पैसे के 10-10 नोट के कुल 10 बंडल बनाने होंगे। सुबह यह शख्स 10 नोट का एक बंडल बैंक में जमा करेगा और शाम को वो रकम बैंक से निकाल लेगा। इस पैसे को वो घर पर लॉकर में रख देगा। इसके बाद असली खेल शुरू होता है। दूसरे दिन वो व्यक्ति 10 नोट का अगला बंडल बैंक में जाकर जमा करेगा। आप समझ ही सकते हैं कि ऐसे लोगों की बैंक मैनेजर से सेटिंग हो सकती है जिससे वो आराम से बिना लाइन में लगे पैसे जमा करवा देगा। दूसरे दिन की शाम को वो व्यक्ति एक बार फिर से 1000-1000 रुपये की वैल्यू में 10 हजार रुपये बैंक से निकालकर अपने घर पहुंचा देगा। अब बाकी बचे 80 हजार रुपये के पुराने नोट। इसके बाद आगे का काम अगले हफ्ते किया जाएगा, क्योंकि एक हफ्ते में 20 हजार की लिमिट लगी हुई है। कुल मिलाकर 10 दिन यही काम करना होगा और आखिर में वो व्यक्ति अपनी 1000-1000 की सारी पुरानी करंसी को नई करंसी में कनवर्ट करा चुका होगा। कानून और बैंक की नज़रों में वह व्यक्ति रोज एक ही 1000-1000 के नोट लेकर आता है, जमा कराता और शाम को वापस निकाल लेता है। इस तरह उसक पास सिर्फ 10 हजार रुपये ही हैं। यानी एक लाख में से 90 हजार अभी भी ब्लैकमनी बना रहेगा और सरकार की सारी कोशिश फेल हो जाएगी।

केजरीवाल जी आपको भी पता होगा कि इस तरीके को ‘पीक थ्योरी’ कहते हैं। तमाम जांच एजेंसियां अक्सर इसे पकड़ नहीं पातीं क्योंकि ऐसे लोग आम ईमानदार लोगों के बीच में आसानी से छिप जाते हैं। क्योंकि ईमानदार लोगों को भी अक्सर किसी काम के लिए बैंक से रकम निकालने की जरूरत होती है, जिसे कई बार काम न होने पर वापस उसी या अगले दिन बैंक में वापस जमा करना पड़ता है। ऐसे लाखों-करोड़ों ट्रांजैक्शन में एक चोर को पकड़ना लगभग नामुमकिन होता है।

चलिए अब बात करते हैं दूसरी स्थिति की, सरकार ने 1000 की नोट बंद करके 2000 की नई नोट जारी करने का फैसला किया। अब वही व्यक्ति जिसके पास 1 लाख रुपये काला धन पड़ा हुआ है वो बैंक में जाकर 10 हजार रुपये जमा करवाएगा। शाम को जब वो बैंक से पैसे निकालने जाएगा तो उसे 2000-2000 रुपये की 5 नोट वापस मिलेंगी। वो इसे अपने घर के लॉकर में रख देगा। अगले दिन फिर वो 10 हजार का अगला बंडल बैंक में जमा करेगा लेकिन वो यह नहीं कह पाएगा कि उसने वही बंडल जमा किया है जो कल उसने बैंक से निकाला था। क्योंकि उसे 5 नोट ही मिले थे। इस तरह से ब्लैकमनी का सारा खेल पकड़ा जाएगा। क्योंकि बैंक स्लिप में नोट की संख्या दर्ज होती है उसका नंबर नहीं। यही वो बात है जिसे समझदार लोग ‘मास्टरस्ट्रोक’ कह रहे हैं और आप जैसा आदमी समझ ही नहीं पा रहा है।

सर, आपने अपने वीडियो में कहा था कि अगर कोई मुझे 2000 के नोट जारी करने के पीछे का तर्क समझा दे तो आप पीएम मोदी को सैल्यूट करेंगे और उनकी मदद करेंगे। मुझे उम्मीद है कि अगर आपने यह बात पूरे होशोहवास में कही थी तो अब उस पर अमल करेंगे। वैसे भी बड़ी वैल्यू की नोट के बिना देश का काम नहीं चल सकता, क्योंकि यह लोगों की जरूरत है। बस कोशिश इस बात की हो रही है कि अब इसे लोग ब्लैकमनी में कनवर्ट करके अपनी तिजोरियों में बंद न कर सकें।

वैसे पता नहीं आपको समझ में आया या नहीं, लेकिन दूसरे लोग अब आसानी से समझ जाएंगे कि फैसले के बाद रकम वापसी की सीमा कम क्यों रखी गई? क्योंकि काले को सफेद करने का यही खेल 500 रुपये की नोट के साथ किया जा सकता है। इसी को रोकने के लिए शुरुआती दिनों में बैंकों ने 500 के नहीं, बल्कि 2000 के नए नोट लोगों को दिए। इसी के कारण धन्नासेठों के 500 रुपये भी फंसे रह गए और कई लोगों को उन्हें नालियों में फेंकना पड़ गया।

भरोसा रखिए सर, नोटबंदी पर सरकार की एक-एक शर्त पढ़ लीजिए समझ में आ जाएगा कि यह ध्यान रखा गया है कि आम लोगों को दिक्कत कम से कम हो। लेकिन इतना तय है कि अगर आम लोगों को होने वाली परेशानियों को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश होती तो ब्लैकमनी रखने वालों को भनक लग जाती और पूरी कोशिश फेल हो जाती। क्योंकि ऐसे लोग सिस्टम के छेद ढूंढने में माहिर होते हैं।

प्वाइंट 2- 2000 के नोट से करप्शन कैसे बढ़ेगा?

आपने अपने वीडियो में यह भी दलील दी है कि 2000 रुपये के नोट से करप्शन बढ़ेगा और इसे रखना 1000 के नोट के मुकाबले ज्यादा आसान होगा। इस बारे में मैं आपसे कुछ पूछना चाहता हूं। क्या आप किसी ऐसे रिश्वतखोर से मिले हैं, जो इसलिए पैसे लेने से इनकार कर देता हो कि 1000 रुपये की गड्डियां रखना मुश्किल होता है? या फिर क्या आप किसी ऐसे बिजनेसमैन से मिले हैं, जो अपना सारा काला पैसा इसलिए घोषित कर दे क्योंकि उसके पास हजार-हजार रुपये के नोट रखने की जगह नहीं है?

प्वाइंट 3- आप कब से ब्लैक मनी के समर्थक हुए?

वीडियो में आपने कहा है कि सरकार की कोशिश के बाद भी कमीशन एजेंट के जरिए और सोने के कारोबार में काला पैसा लगता रहेगा, लेकिन जहां तक मुझे याद है इसी साल अप्रैल में जब 1 फीसदी एक्साइज ड्यूटी के खिलाफ ज्वैलर्स ने 45 दिन तक हड़ताल की थी तो आपने उनका समर्थन किया था। तो उस वक्त क्या आपको पता नहीं था कि जेवरात के कारोबार में सबसे ज्यादा ब्लैकमनी लगी हुई है? या फिर आप तभी से देश को लूटने वालों और ब्लैकमनी की इकोनॉमी के समर्थक हो चुके थे?

केजरीवाल जी आपने ब्लैकमनी का नाम लेकर सिर्फ अपनी राजनीति चमकाई। जबकि पीएम मोदी ने इसके खिलाफ असली लड़ाई छेड़ी।

  • पीएम बनने के फौरन बाद उन्होंने लोगों से इनकम टैक्स रिटर्न में अपने सभी बैंक एकाउंट देने को कहा।
  • फिर इन सभी को पैन और आधार से लिंक करवाया। सरकार से मिलने वाली सारी सब्सिडी, पेंशन और दूसरे बेनेफिट्स आपस में लिंक करवाए।
  • उन्होंने जनधन योजना के जरिए हर गरीब व्यक्ति को बैंक खाता खोलने का मौका दिया।
  • उन्होंने हर उस देश के साथ समझौते पर दस्तखत किया, जहां-जहां पर भारत के बेइमान और भ्रष्ट लोग अपना पैसा जमा करते हैं।
  • आपको भी शायद पता होगा कि मोदी के आने के बाद से कैसे मॉरीशस रूट से होने वाला हवाला कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया है?
  • वो मोदी सरकार ही है, जिसने बेनामी ट्रांजैक्शन एक्ट और फॉरेन ब्लैकमनी एक्ट जैसे कानून बनाए, जिससे काले धन के कारोबार को काफी धक्का पहुंचा है।
  • 2 लाख से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर सरकार सीधे नज़र रखती है।
  • यही सरकार है जिसने इनकम टैक्स और सर्विस टैक्स के लाखों फिजूल के मुकदमे वापस ले लिए।

इसके बावजूद ब्लैकमनी रखने वालों को इनकम टैक्स डिक्लेरेशन स्कीम के तहत आखिरी मौका दिया गया कि वो अपनी संपंत्ति को घोषित कर दें। हर पढ़ा-लिखा समझदार व्यक्ति समझ रहा है कि सरकार क्या कर रही है और किस दिशा में आगे बढ़ रही है। हो सकता है कि आगे इसी रास्ते पर चलकर सरकार स्विस बैंकों के खातेदारों तक पहुंच जाए।

प्वाइंट 4- आपने 200% पेनाल्टी की अफवाह क्यों फैलाई?

आपने अपने वीडियो के जरिए अफवाह फैलाने की भी कोशिश की। आपने कहा कि लोगों पर 200 फीसदी की दर से पेनाल्टी लगेगी। इसकी वजह से लोगों में घबराहट फैली और आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आपने ऐसा तब किया जब आप खुद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में रह चुके हैं। क्या आपको नहीं पता कि इनकम टैक्स कानून 1961 के तहत जमा रकम पर नहीं, बल्कि सिर्फ छिपाई गई आमदनी पर ही पेनाल्टी लगाई जा सकती है? विश्वास नहीं होता कि एक पूर्व इनकम टैक्स अधिकारी को इतनी बेसिक बात का भी ज्ञान नहीं है? आपकी फैलाई अफवाह की वजह से लोगों को कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्या आपको इस बात का एहसास है? शायद इनकम टैक्स अधिकारी रहते वक्त आपका ध्यान अपने काम से ज्यादा कुछ दूसरी ज्यादा जरूरी चीजों पर था, इसलिए आपकी सुविधा के लिए बता दूं कि इस बारे में एक बार इनकम टैक्स कानून का सेक्शन 270ए ठीक से पढ़ लें।

एक जनप्रतिनिधि होने के नाते आपकी जिम्मेदारी थी कि आप लोगों से कहते कि वो अपना टैक्स ईमानदारी के साथ भरें, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया और बेइमानों का खुलकर साथ दिया।

प्वाइंट 5- साफ बोलिए कि आप नकली नोट के समर्थक हैं

अपने वीडियो में आपने इस बात पर भी संतोष नहीं जताया कि इस कदम से नकली करंसी की समस्या खत्म हो जाएगी। आपको क्या ठीक लगता है? एक गरीब मजदूर को उसकी मजदूरी के बदले असली नोट मिले या फिर दिन भर मेहनत-मजदूरी के बाद ठेकेदार या मालिक उसे नकली नोट पकड़ा दे? कम से कम उस तबके के लिए तो ईमानदारी बरतिये जिसके वोट के दम पर आप मुख्यमंत्री बन गए।

इसी तरह आतंकवादियों को होने वाली फंडिंग भी इस कदम से बंद हो गई है, आप उसे भी लेकर एकदम चुप हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको आतंकवादियों की भी चिंता है?

आपने यहां तक दलील दे डाली है कि मोदी जी को 100 रुपये के ज्यादा नोट पहले से चला देने चाहिए थे, लेकिन ऐसा होता तो सबसे पहले आप ही कहते कि “अरे एटीएम से दो दिन पहले से सिर्फ 100-100 की नोट बाहर आ रही थीं तो सबको पता था, ये कोई सीक्रेट नहीं था।”

ऐसे में सर, यही कहा जाएगा कि दो दिन तक एक्सपर्ट से सलाह-मशविरा करने के बाद भी आपको कुछ समझ में नहीं आया। मुझे बेहद दुख है कि आम लोगों को लगता है कि आपने आईआईटी से पढ़ाई की है और आपने थोड़ा वक्त इनकम टैक्स अफसर के तौर पर नौकरी भी की है।

सीए की पढ़ाई के दौरान हम सभी को पीक थ्योरी के बारे में सबसे पहले बताया जाता है। मेरे बहुत कम तजुर्बे में भी मुझे इसके बारे में अच्छी तरह पता है। लेकिन आम आदमी पार्टी के नेता के तौर पर आपने जो किया उससे किसी का भी भरोसा टूट जाएगा। लोगों को सच्चाई बताने की बजाय आपने अपने फायदे के लिए लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की और उन्हें वोट बैंक की तरह बेवकूफ बनाया। मैं अपने छोटे से तजुर्बे से लोगों को यही सलाह देना चाहूंगा कि वो आपकी बातों पर ध्यान न दें और घबराहट में अपने पैसे यहां-वहां न फेंके। अगर आपने गलत तरीके से पैसा नहीं कमाया है तो आपको डरने की जरूरत नहीं है। ईमानदारी से टैक्स भरने के बाद भी डरने की कोई वजह नहीं है।

धन्यवाद,

मेहुल शाह
चार्टर्ड एकाउंटेंट
सूरत

mehul@raseshca.com

(नोट: केजरीवाल जी अगर मेरा पत्र आप तक पहुंच गया हो तो प्लीज इसे राहुल गांधी से भी शेयर कर दें, क्योंकि नोटबंदी पर आप दोनों ने बिल्कुल एक बराबर कमअक्ल की बातें की हैं।)

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