नोटबंदी पर कांग्रेस, आप और मीडिया के टॉप-5 झूठ

500 और 1000 की नोटबंदी के बाद देश में लोग एक तरफ मुश्किल में हैं, दूसरी तरफ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जी-जान से अफवाहें फैलाने में जुटे हैं। दोनों ही पार्टियों के कई बड़े नेता अब तक सोशल मीडिया पर अफवाह और हिंसा फैलाने की कोशिश करते रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। हैरत की बात है कि इन पार्टियों से जुड़े कई दलाल पत्रकार भी अफवाहें फैलाने के इस धंधे में खुल्लमखुल्ला शामिल हैं। हम आपको बताते हैं वो 5 अफवाहें जो इतनी सफाई से फैलाई गईं कि एक बार लोगों ने इन पर यकीन ही कर लिया।

1. ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का झूठ

करंसी बैन के बाद ये सबसे खतरनाक अफवाह आम आदमी पार्टी ने फैलाई। कई लोगों ने ये माना है कि उन्हें लोकल आम आदमी पार्टी नेताओं या समर्थकों की तरफ से ग्रुप या पर्सनल एकाउंट पर यह मैसेज भेजा गया। इस मैसेज में लोगों से कहा गया है कि ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल हो गई है और जरूरी चीजों की किल्लत होने वाली है, इसलिए आप सभी अपने घरों में जरूरी सामान इकट्ठा करके रख लें। दरअसल यही वो बुनियाद थी, जिसके आधार पर आम आदमी पार्टी समर्थकों ने नमक की कमी की अफवाह फैलाई। इस खेल में आम आदमी पार्टी और उससे जुड़े दुकानदारों ने 200 से 400 रुपये किलो नमक बेचकर खूब माल भी कमाया।

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल और जरूरी सामान की कमी की अफवाह वाला ये व्हाट्सएप मैसेज दिल्ली और मुंबई में आम आदमी पार्टी के समर्थकों ने पूरे देश में फैलाया। कांग्रेस और वामपंथियों ने भी उनका भरपूर साथ दिया।

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल और जरूरी सामान की कमी की अफवाह वाला ये व्हाट्सएप मैसेज दिल्ली और मुंबई में आम आदमी पार्टी के समर्थकों ने पूरे देश में फैलाया। कांग्रेस और वामपंथियों ने भी उनका भरपूर साथ दिया।

नोटबंदी के खिलाफ लोगों में गुस्सा भड़काने के लिए केजरीवाल और उनके समर्थकों की उड़ाई यह अफवाह ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी और जल्द ही सरकार से लेकर ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन तक ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।

2. बीजेपी नेताओं के पास पहले से करंसी!

पाबंदी लगने के बाद अगले दिन से ही कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समर्थकों ने बेहद शातिर तरीके से यह अफवाह उड़ानी शुरू की। सबसे पहले एक लड़की की तस्वीर वायरल की गई, जिसे यूपी बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या की बेटी बताया गया। बाद में पता चला कि केशव मौर्या की कोई बेटी है ही नहीं और जिस तस्वीर को उनकी बेटी बताया जा रहा है वो दिल्ली में एक बैंक की कर्मचारी है और उसने अतिउत्साह में नोटों की गड्डी के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर कर दी थी। इसी तरह कई फोटोशॉप और फर्जी तस्वीरें बीजेपी नेताओं की बताकर सोशल मीडिया पर फैलाई गईं, लेकिन सबकी पोल खुलती गई। ज्यादातर तस्वीरों में जिन्हें बीजेपी का नेता बताया गया वो बैंक के कर्मचारी निकले। इन तस्वीरों को फैलाने वालों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों के ही नेताओं ने बढ़चढञकर हिस्सा लिया।

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3. एटीएम के लिए कीनिया की तस्वीर

कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा ने एटीएम लाइन को लेकर भ्रम फैलाने के लिए कीनिया के चुनाव की लाइन की तस्वीर ट्विटर पर शेयर की। इस तस्वीर की जल्द ही लोगों ने सच्चाई सामने ला दी। लेकिन मजेदार बात यह देखने को मिली कि एक कांग्रेसी नेता की फैलाई झूठी तस्वीर को आम आदमी पार्टी समर्थकों ने हाथों-हाथ लिया। इस तस्वीर को आम आदमी पार्टी वालों ने भी खूब शेयर किया।

4. करंसी में स्पेलिंग की गलती का झूठ

जब कुछ नहीं मिला तो मोदी विरोधियों ने यह खबर फैलानी शुरू कर दी कि 2000 की नोट में स्पेलिंग की गलती हैं, इस आधार पर बाकायदा सोशल मीडिया पर दावे किए गए कि यह नोट भी रद्द करनी पड़ेगी। यह अफवाह इस आधार पर फैलाई गई कि इसमें दो हजार को ‘दोन हजार रुपये’ लिखा गया है। जबकि यह मराठी में लिखा हुआ है और बिल्कुल ठीक है। इस झूठ पर फौरन ही कई जानी-मानी वेबसाइटों ने झूठी खबरें भी बना दीं। जबकि सच्चाई यही है कि इस अफवाह के पीछे कांग्रेस और केजरीवाल समर्थकों का मंदबुद्धि का हाथ था।

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5. मीडिया और पत्रकारों ने उड़ाई अफवाहें

मुंबई मिरर ने खबर दी कि गोवंडी में नकदी न होने के कारण एक नवजात बच्चे की मौत हो गई। इस खबर की सच्चाई बहुत जल्द सामने आ गई कि जिस डॉक्टर शीतल कामथ के क्लीनिक के खिलाफ यह खबर छापी गई थी उन्होंने साफ-साफ बता दिया कि बच्चा अस्पताल में नहीं, बल्कि घर के बाथरूम में पैदा हुआ था। जब उसे क्लीनिक पर लाया गया तो उसकी हालत नाजुक थी। डॉक्टर कामथ के क्लीनिक पर नियोनेटल इंटेंसिव केयर (NICU) न होने के कारण उन्होंने बच्चे को बड़े अस्पताल ले जाने को कहा। बाद में जब बच्चे की मौत हो गई तो मुंबई मिरर की रिपोर्टर ने इसमें नमक-मिर्ची लगाकर छाप दिया कि बच्चे की मौत इसलिए हुई क्योंकि डॉक्टर ने 500 रुपये की करंसी लेने से इनकार कर दिया था।

ठीक इसी तरह मुंबई के मुलुंड में एक बुजुर्ग के हार्टअटैक से मरने की खबर को नोटबंदी का एंगल दे दिया गया। अखबारों ने छापा कि बुजुर्ग की मौत एचएसबीसी बैंक के लाइन में खड़े-खड़े हार्ट अटैक से हुई, जबकि बाद में पता चला कि जहां पर घटना हुई वहां किसी बैंक का एटीएम ही नहीं था। एक दिन पहले इस पर लंबी-चौड़ी खबर छापने वाले टाइम्स ऑफ इंडिया ने सातवें पेज पर छोटी सी माफी मांगकर पल्ला झाड़ लिया।

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अफवाह फैलाने की होड़ में एनडीटीवी के पत्रकार सबसे आगे हैं। ज्यादातर फेसबुक और ट्विटर पर अपने निजी एकाउंट से फर्जी खबरें पोस्ट कर रहे हैं। जैसे कि एक पत्रकार ने अगस्त की यह खबर अब फेसबुक पर पोस्ट की, ताकि भ्रम फैलाया जा सके।15037323_10153838159961230_6087150214349288552_n

इसी तरह केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले कुछ पत्रकार एटीएम के आसपास हो रहे छोटे-मोटे झगड़ों को ट्विटर पर पोस्ट कर रहे हैं ताकि ऐसे जताया जाए मानो कोई कोहराम मचा हुआ है। ऐसे ही एक पत्रकार विनोद कापड़ी के फैलाए झूठे वीडियो और तस्वीरें खुद केजरीवाल भी रीट्वीट करते हैं।

इसी तरह पीटीआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से यह झूठी खबर जारी की, जबकि दिल्ली पुलिस बार-बार इनकार करती रही कि नोटबंदी या एटीएम पर लाइन के सवाल पर हिंसा की ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

(कुछ इनपुट्स लोगों के फेसबुक टाइमलाइन से लिए गए हैं। हम इन सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हैं)

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