करंसी बैन से इन्हें हुआ है सबसे ज्यादा नुकसान!

500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने से सबसे ज्यादा नुकसान राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को हुआ है। शुरुआती संकेतों के मुताबिक जो नाम उभरकर सामने आ रहे हैं उनमें से ज्यादातर उम्मीद के मुताबिक ही हैं। सोशल मीडिया के अनुमानों, पार्टियों के अंदरखाने में मची खलबली और उनके नेताओं की शुरुआती प्रतिक्रियाओं के आधार पर हमने टॉप-5 चेहरों की एक लिस्ट तैयार की है। हमारे आंकलन के मुताबिक ये वो नेता हैं जिनकी पार्टी को करंसी बैन से सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा होगा।

1. सोनिया गांधी, कांग्रेस

जैसी कि उम्मीद की जाती है करंसी बैन की सबसे ज्यादा मार कांग्रेस पार्टी को झेलनी पड़ रही है। यह आरोप हमेशा से लगता रहा है कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं के पास ब्लैकमनी का अंबार है। यहां तक कि इटली की कोर्ट ने भी सोनिया गांधी को दलाली लेने का आरोपी माना था।

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गांधी परिवार ही नहीं, कांग्रेस के तमाम छोटे-बड़े नेताओं के पास भारी मात्रा में ब्लैकमनी के आरोप पहले भी लग चुके हैं। लेकिन जिस तरह से राहुल गांधी ने भी बयान जारी करके करंसी बैन का विरोध किया है उसे इस बात की ओर पक्का इशारा माना जा रहा है कि पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही कारण है कि माना जा रहा है कि कांग्रेस इस फैसले को लेकर राजनीतिक विरोध को हवा देने में जुटी हुई है।

2. अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी

करंसी बैन का सबसे आश्चर्यजनक तरीके से जिस नेता ने विरोध किया है वो हैं अरविंद केजरीवाल। बड़ी करंसी और ब्लैकमनी के खिलाफ आंदोलन चला चुके अरविंद केजरीवाल का यह रवैया खुद उनकी पार्टी के नेताओं के लिए भी हैरत में डालने वाला रहा। कुमार विश्वास और रघु राम जैसे पार्टी से जुड़े तमाम चेहरे जब इस फैसले का समर्थन कर रहे थे, तो केजरीवाल ने चुप्पी साध रखी थी। हमारी जानकारी के मुताबिक अकेले पंजाब चुनाव में केजरीवाल की पार्टी को करीब ढाई सौ करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। केजरीवाल ने पंजाब चुनाव में कई ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं, जिन्हें कनाडा और यूरोप के खालिस्तानियों ने स्पॉन्सर किया हुआ है। ऐसे हर कैंडिडेट के पास एक अनुमान के मुताबिक कम से कम 5-5 करोड़ रुपये नकद पड़े थे। अब ये सारा पैसा बेकार चला गया है।

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3. मायावती, बीएसपी

एक बार फिर से यूपी की सत्ता में लौटने का सपना देख रहीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती के लिए भी करंसी बैन का फैसला दोहरी मुसीबत लेकर आया है। मायावती पर लगातार यह आरोप लगते रहे हैं कि वो कैश लेकर टिकट बेचती हैं। पार्टी के ऐसे कई टिकट बेचे भी जा चुके हैं। मायावती के लिए मुसीबत यह है कि अब वो इन नकद पैसों का क्या करेंगी। मीडिया में ऐसी खबरें चल रही हैं कि बीती रात से ही पार्टी के अंदर जबर्दस्त खलबली है। इसके मुताबिक मायावती अब तक करीब 1200 करोड़ रुपये कैश इकट्ठा कर चुकी थीं। जाहिर है इसका बड़ा हिस्सा 1000-1000 की नोट का है। ऐसे में मायावती ने सतीशचंद्र मिश्रा और नसीमुद्दीन सिद्दिकी जैसे अपने भरोसेमंद नेताओं से कई राउंड की बैठकें कर चुकी हैं।

4. लालू यादव, आरजेडी

लंबे समय बाद बिहार की सत्ता में लौटे लालू यादव के लिए भी यह मुश्किल दौर बताया जा रहा है। मीडिया की खबरों के मुताबिक बिहार में बीते कुछ महीनों में सही-गलत तरीकों से लालू यादव की पार्टी अपना खजाना भरने में जुटी हुई थी। जाहिर है ऐसी ज्यादातर काली कमाई कैश में होती है। फिलहाल लालू यादव ने चुप्पी साध रखी है और उनकी पार्टी भी इस मुद्दे पर संभल-संभलके प्रतिक्रिया जता रही है। यह तय है कि करंसी बैन के विरोध में अगर कोई सियासी हंगामा खड़ा करने की कोशिश होती है तो लालू यादव जरूर उसका हिस्सा बनेंगे।

5. ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस

सादी सूती साड़ी पहनने वाली ममता बनर्जी करंसी बैन की सबसे ज्यादा मार झेल रही नेताओं में से एक मानी जा रही हैं। दरअसल ममता वो पहली नेता थीं जिन्होंने सबसे पहले केंद्र सरकार के फैसले का विरोध किया था। सारदा चिटफंड घोटाले और बंगाल में जिहादी गतिविधियों की वजह से माना जाता रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के पास कालेधन का अंबार है। ममता को अच्छी तरह एहसास है कि मोदी सरकार के फैसले से उनकी इस सारी जमापूंजी पर एक झटके में पानी फिर गया है। हमारी जानकारी के मुताबिक ममता ने कांग्रेस के साथ मिलकर इस फैसले के खिलाफ अभियान शुरू भी कर दिया है। ममता इस बारे में दूसरी तमाम पार्टियों के नेताओं से बात भी की है।

ये वो टॉप-5 नेता हैं जिनके पास सबसे ज्यादा ब्लैकमनी होने की अटकलें सोशल मीडिया पर लगाई जा रही हैं। इन्हें लेकर तरह-तरह के चुटकुले भी गढ़े जा रहे हैं। देखिए ऐसे ही कुछ कमेंट्स:

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