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करंसी बैन से क्यों सदमे में हैं अरविंद केजरीवाल?

पांच सौ और हजार रुपये की नोट पर पाबंदी का सबसे ज्यादा नुकसान किस नेता या पार्टी को हुआ है? इसका जवाब जानकर शायद आप हैरत में पड़ जाएंगे। ब्लैकमनी की रोकथाम के लिए उठाए गए इस कदम के बाद सबसे ज्यादा सदमे में अरविंद केजरीवाल ही बताए जा रहे हैं। हमारे सूत्रों के मुताबिक इस एक झटके से पंजाब चुनाव के लिए जुटाई गई करोड़ों रुपये की रकम फंस गई है। ये वो रकम है जो आम आदमी पार्टी ने कनाडा, अमेरिका और यूरोप से चंदे के जरिए बटोरी थी। यही वजह है कि कालाधन के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले अरविंद केजरीवाल की बोलती बंद है। खबर लिखे जाने तक वो खुद को संभाल नहीं सके थे कि इस खबर पर प्रतिक्रिया दे सकें। केजरीवाल ने इस बारे में मीडिया के सवालों पर भी चुप्पी साध रखी है। हालांकि करंसी बैन के मोदी सरकार के कदम के विरोध में ममता बनर्जी के ट्वीट को रीट्वीट करके केजरीवाल ने अपना दर्द बयान कर ही दिया।

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पंजाब चुनाव के लिए जुटाया था चंदा!

न्यूज़लूज़ पर हम आपको बता चुके हैं कि कैसे यूरोप और कनाडा के गुरुद्वारों में खालिस्तान समर्थकों की तरफ से आम आदमी पार्टी को भारी मात्रा में चंदा मिलने की अटकलें लगती रही हैं। आम आदमी पार्टी के ही एक नेता ने हमें बताया था कि सारा चंदा हवाला के जरिए भारत लाया जा रहा था। पंजाब में अपने कुछ बेहद विश्वासपात्रों के जरिए केजरीवाल इस पैसे को मैनेज कर रहे थे। लेकिन 1000 और 500 रुपये पर पाबंदी ने केजरीवाल और उनके सैकड़ों ओवरसीज़ वॉलेंटियर्स की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। क्योंकि विदेशों से लाई गई ये रकम चोरी-छिपे बीते करीब एक साल में लाई गई थी और अब इसके खर्च होने का समय करीब था।
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AAP के सीनियर नेताओं से बात की!

सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल ने पाबंदी के बाद की स्थिति पर विचार के लिए पंजाब में पार्टी के फंड मैनेजरों से बात की है। इस बात पर विचार हो रहा है कि चंद के कितने हिस्से को कानूनी तरीके से वैध कराया जा सकता है। इसके अलावा केजरीवाल जल्द ही अपने समर्थकों से और चंदा देने की अपील कर सकते हैं। विदेशों से चोरी-छिपे आयी रकम का खजाना मिलने पहले आप कई बार कंगाल हो चुकी है। लिहाजा केजरीवाल को खुद जनता से पार्टी को चंदा देने अपील करनी पड़ी थी। पढ़े: जनता अब अरविंद केजरीवाल को सिर्फ ‘चिल्लर’ क्यों दे रही है? हालांकि उनकी पहली कोशिश यही रहेगी कि करंसी बैन पर इतना हंगामा खड़ा कर दिया जाए कि केंद्र सरकार को दबाव में आकर फैसला पलटना पड़े। कुल मिलाकर आम आदमी पार्टी की इस स्थिति का बेहतर एहसास सोशल मीडिया पर लोगों को है। लिहाजा केजरीवाल को लेकर तरह-तरह की चुटकुलेबाजी भी करने लगे हैं।

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