क्या केजरीवाल ने कराया था एक जज का फोन टैप?

पिछले दिनों दिल्ली हाई कोर्ट के जजों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था जजों के फोन टैप कराए जा रहे हैं। ऐसा कहते वक्त उनका इशारा जाहिर है केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ था। हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई सबूत पेश नहीं किए। लेकिन केजरीवाल के ही एक करीबी और आम आदमी पार्टी के अहम ओहदे पर बैठे एक नेता ने हमें इस बारे में कुछ चौंकाने वाली जानकारियां दी हैं। इस सूत्र ने हमें बताया कि दरअसल खुद केजरीवाल दिल्ली के कुछ जजों के फोन टैप कराना चाहते थे। इनमें से एक जज के फोन को केजरीवाल फौरन टैप कराना चाहते थे, क्योंकि बकौल उनके वो ‘बीजेपी का आदमी’ है। तो क्या उन जज का फोन टैप कराया गया? इस सवाल पर हमारे सूत्र ने न तो पुष्टि की और न ही इनकार किया। हालांकि उन्होंने यह जरूर बताया कि आज भी आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेताओं के फोन केजरीवाल टैप करवा रहे हैं और उन पर नजर रखने की जिम्मेदारी भरोसेमंदों की एक टीम को सौंपी गई है।

जजों की फोन टैपिंग का क्या है मामला?

हमारे सूत्र ने बताया कि 2015 में दूसरी बार सत्ता में आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई, ईडी, पुलिस और दूसरी कुछ एजेंसियों के रिटायर्ड अधिकारियों की एक टीम बनाई थी। यह काम बेहद खुफिया तरीके से किया गया था। एंटी करप्शन ब्यूरो के हाथ से छिनने की स्थिति में केजरीवाल इस टीम के जरिए अपने वो काम कराना चाहते थे जो अब संभव नहीं थे। इस टीम के लिए जासूसी के हाइटेक सामान भी खरीदे गए। इनमें से ज्यादातर फोन टैपिंग में काम आने वाले उपकरण थे। ऐसे साजोसामान आमतौर पर सीबीआई और आईबी जैसे एजेंसियां ही इस्तेमाल करती हैं। पिछले साल अगस्त-सितंबर के आसपास इस टीम की एक अनौपचारिक मीटिंग में केजरीवाल खुद शामिल थे। इसमें मौजूद एक रिटायर्ड खुफिया अधिकारी ने उन्हें फोन टैपिंग के तरीकों के बारे में जानकारी दी। उसने बाकायदा इसका डेमो भी करके दिखाया। केजरीवाल बार-बार किसी ‘जज साहब’ का जिक्र कर रहे थे। जज साहब के अलावा दिल्ली सरकार के कुछ अफसरों के नाम लेकर उनके फोन पर नज़र रखने की बात भी इस मीटिंग में हुई थी। उन्होंने यहां तक दावा किया कि बातचीत से मुझे लगा कि सिर्फ जज और सरकारी अफसरों ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं और मंत्रियों के फोन भी टैपिंग की लिस्ट में शामिल हैं। ताकि अगर कभी इसका खुलासा हो जाए तो वो यह कहकर पल्ला झाड़ सकें कि ये फोन केंद्र सरकार टैप करा रही है।

फोन टैपिंग की बात यहां से आई!

हमारे सूत्र ने बताया कि केजरीवाल उस टीम की सीधे तौर पर निगरानी कर रहे थे और कुछ वॉलेंटियर्स को इसके रोजमर्रा के कामकाज की देखरेख के लिए रखा गया था। उस मीटिंग में इत्तेफाक से वो भी मौजूद थे। मीटिंग में जिस खुफिया अफसर को बुलाया गया था उसने बातचीत के दौरान कहा कि “भले ही पाबंदी है लेकिन फोन तो टैप होते ही हैं। सर्विस में रहते हुए हम लोग खुद फोन टैप करते रहे हैं। यहां तक कि जजों के भी।” हमारे सूत्र ने कहा कि हो सकता है कि जजों की कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल के दावे का आधार वही रहा हो। लेकिन वो खुफिया अधिकारी जितना बड़बोला था, उससे उसकी किसी बात पर भरोसा करना मुश्किल था।

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“सही वक्त पर करूंगा पूरा खुलासा”

हमारे बार-बार पूछने पर कि बिना सबूत वो इस बात का दावा कैसे कर सकते हैं? हमारे सूत्र ने कहा कि “मैं सही समय आने पर पूरी सच्चाई सामने ला दूंगा। चूंकि वो बैठक मेरे सामने हुई थी इसलिए मुझे किसी सबूत की जरूरत नहीं है। यह तो केजरीवाल को बताना होगा कि वो उस दिन उस वक्त कहां पर थे।” हालांकि हमारे सूत्र ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उनके पास इस मीटिंग के सबूत हैं और वो सही समय पर इन्हें सामने लाएंगे। दरअसल हमारे सूत्र अभी दिल्ली सरकार से जुड़े एक अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इसलिए वो अपनी पहचान पूरी तरह छिपाए रखना चाहते हैं। इस बातचीत में उन्होंने बार-बार आशीष खेतान का नाम लिया, लेकिन यह नहीं बताया कि फोन टैपिंग में उनका सही-सही रोल क्या है। शायद वो ये इशारा करना चाहते थे कि जासूसी का सारा काम फिलहाल आशीष खेतान ही देख रहे हैं।

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