पाकिस्तान में जारी है शिया मुसलमानों का ‘नरसंहार’

पाकिस्तान में हिंदुओं और ईसाइयों पर हमलों की चर्चा तो अक्सर होती रहती है, लेकिन क्या आपको पता है कि वहां सबसे ज्यादा शिया मुसलमान निशाने पर हैं। बीते कुछ साल में जिस बड़े पैमाने पर शियाओं को शिकार बनाया गया है उसे जातीय आधार पर नरसंहार का नाम दिया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक 2013 से अब तक अकेले बम धमाकों में 2000 से ज्यादा शिया मुसलमान मौत के घाट उतारे जा चुके हैं। इन तमाम हत्याओं के पीछे सुन्नी मुस्लिम आतंकी संगठनों का हाथ रहा है। हालत ये है कि शिया मुसलमान पिछले कुछ समय से ट्विटर पर बार-बार #ShiaGenocide हैशटैग ट्रेंड करवा रहे हैं ताकि दुनिया का ध्यान उनकी तरफ जाए।

लगातार कम हो रही है शिया आबादी!

पाकिस्तान में शियाओं के खिलाफ संगठित हिंसा का ही नतीजा है कि वहां पर बीते कुछ सालों में शिया मुसलमानों की आबादी कम हो रही है। तीन दशक पहले तक शिया पाकिस्तान की कुल मुस्लिम आबादी का 25 फीसदी के करीब हुआ करते थे, लेकिन अब एक अनुमान के मुताबिक उनका अनुपात 20 फीसदी के आसपास रह गया है। सरकारी नौकरियों और दूसरे महकमों में भी शिया मुसलमानों से भेदभाव के आरोप लगते रहते हैं। जबकि ऐसा शायद ही कोई दिन गुजरता है जब शिया मुसलमानों पर कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं होता। शनिवार देर शाम को भी कराची के एक शिया सेंटर में मजलिस के दौरान लश्करे-जांगवी नाम के संगठन से जुड़े आतंकवादियों ने घुसकर पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले में बड़ी तादाद में लोग घायल हुए है।

कई अलग-अलग तबकों में बटे हैं शिया

पाकिस्तान में शिया मुसलमान भी कई अलग-अलग पहचानों में बंटे हैं। यहां ज्यादातर तवेलवर समुदाय के शिया हैं। इनके अलावा इस्माइली, खोजा और बोहरा समुदायों की भी अच्छी संख्या है। तवेलवर शियाओं में सबसे ज्यादा हाजरा जनजाति के शिया हैं। ये लोग सुन्नी मुसलमानों के सबसे ज्यादा टारगेट पर होते हैं। हाजरा शिया मुसलमान क्वेटा और आसपास के इलाकों में सबसे ज्यादा होते हैं। इनके नाम और बोली से इन्हें आसानी से पहचाना जाता है। क्वेटा में हाजरा समुदाय की आबादी 6 लाख से भी ज्यादा है। पाकिस्तान में शिया समुदाय के खिलाफ होने वाली हिंसा का सबसे ज्यादा असर इसी समुदाय पर पड़ा है। आतंकी हमलों में मारे जाने वाले हर 10 शिया मुसलमानों में से 5 हाजरा समुदाय के होते हैं। लश्करे-जांगवी संगठन ने 2011 में शिया मुसलमानों को खुलेआम धमकी जारी करते हुए कहा था कि सभी शिया मुसलमानों को मौत के घाट उतारा जाएगा और पाकिस्तान उनकी कब्रगाह बनेगा।

सूफी और अहमदी भी टारगेट पर

शिया के अलावा सूफी और अहमदी समुदाय के मुसलमान भी सुन्नी आतंकी संगठनों के निशाने पर रहे हैं। पाकिस्तान में अहमदी समुदाय के मुसलमानों को तो कानूनी तौर पर मुसलमान माना ही नहीं जाता। इसी तरह सूफी मुसलमानों को भी काफिर और मूर्तिपूजक कहकर उन पर आए दिन हमले होते रहते हैं। ये दोनों समुदाय पाकिस्तान की आबादी का 3 फीसदी के करीब हैं। एक तरह से अल्पसंख्यक होने के बावजूद उन्हें किसी भी तरह के नागिरक अधिकार और सहूलियतें नहीं दी जाती हैं।

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