पाकिस्तान पर एक और चोट, डैम के लिए लोन कैंसिल!

पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिश में भारत ने झटके पे झटका देना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में डैम बनाने के लिए पैसा देने से एशियन डेवलपमेंट बैंक और वर्ल्ड बैंक ने इनकार कर दिया है। दोनों ही बैंकों ने यह कहते हुए मना किया कि ये जगह पाकिस्तान की है इस बात पर विवाद है। जबकि अब तक पीओके के इलाकों में चलने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए पाकिस्तान आसानी से अंरराष्ट्रीय एजेंसियों से पैसे लेता रहा है। गिलगित बाल्तीस्तान में दायमर-भाशा डैम के लिए पाकिस्तान ने वर्ल्ड बैंक में लोन अप्लाई किया था। यहां पर 4500 मेगावाट की पनबिजली परियोजना बननी थी। इसी तरह सिंधु नदी पर 14 अरब डॉलर से बनने वाले डैम के लिए पैसे देने से एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने मना कर दिया।

अमेरिका ने भी मदद से इनकार किया!

अमेरिका ने करीब साल भर पहले गिलगित बाल्तिस्तान में डैम बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय फंडिंग दिलाने में मदद की बात कही थी। लेकिन पिछले दिनों में पैदा हालात के बाद अमेरिका ने भी पाकिस्तान को मदद से हाथ खींच लिए हैं। एडीबी में पाकिस्तानी अर्जी खारिज होने के पीछे इसे बड़ी वजह माना जा रहा है। गिलगित बाल्तिस्तान में बनने वाला ये डैम पाकिस्तान के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि अगर यह बन गया तो पाकिस्तान का आधा बिजली संकट खत्म हो जाएगा।

चीन की एजेंसियां भी मदद को तैयार नहीं

पाकिस्तान के लिए जो सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है वो यह कि दायमर-भाशा डैम को बनाने में मदद से चीन भी कन्नी काट रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि चीन सिंधु नदी समझौते को लेकर पैदा विवाद की वजह से इस प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से डर रहा है। ये हालत तब है जब चीन को यहां से बनने वाली बिजली की जरूरत होगी। यह बिजली बलोचिस्तान में बन रहे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) में भी काम आएगी। पाकिस्तान ने इस बारे में चीन की सरकार से औपचारिक तौर पर अनुरोध भी किया था लेकिन चीन सरकार ने इस पर चुप्पी साध रखी है।

सिंधु समझौता खत्म मान रही हैं एजेंसियां

वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ और एडीबी जैसी दुनिया भर की फंडिंग एंजेंसियां मानकर चल रही हैं कि भारत एकतरफा तौर पर सिंधु समझौते को तोड़ चुका है। इस समझौते की वजह से भारत सिंधु क्षेत्र की नदियों का सिर्फ 20 फीसदी पानी इस्तेमाल कर सकता था, जबकि 80 फीसदी पानी बहकर पाकिस्तान चला जाता है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों कहा था कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते। इस बयान को इस बात का साफ इशारा माना जा रहा है कि भारत 8 से 10 साल की अवधि में सिंधु क्षेत्र की नदियों का ज्यादातर पानी रोककर अपने इस्तेमाल में लाएगा। भले ही वो अभी इस बारे में औपचारिक ऐलान नहीं कर रहा है। अगर भारत ऐसा करता है तो पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में बनने वाला डैम किसी काम का नहीं बचेगा।

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