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अरविंद केजरीवाल के दामाद पर कसा शिकंजा!

आपको यह जानकर शायद हैरत हो रही होगी कि ईमानदारी के नाम पर सत्ता में आए अरविंद केजरीवाल का भी कोई दामाद है। दामाद भी ऐसा जो केजरीवाल की सत्ता का भरपूर सुख लेने में व्यस्त है। बिल्कुल वैसे जैसे सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने यूपीए सरकार के वक्त सत्ता का सुख भोगा। दरअसल ये दामाद है केजरीवाल की साली का। इस लिहाज से रिश्ते में वो केजरीवाल का भी दामाद ही लगता है। नाम है- डॉ निकुंज अग्रवाल, जो इस समय दिल्ली के स्वास्थ्यमंत्री सत्येंद्र जैन का ओएसडी है। निकुंज अग्रवाल की नियुक्ति के खिलाफ उपराज्यपाल नजीब जंग ने विजिलेंस की जांच के आदेश दे दिए हैं।

धांधली करके बनाया सरकारी डॉक्टर!

आरोपी है कि केजरीवाल ने अपने दामाद डॉक्टर निकुंज को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए बड़े पैमाने पर धांधली की। 6 अगस्त 2015 को निकुंज अग्रवाल ने दिल्ली सरकार के चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में नौकरी के लिए एप्लिकेशन दी। हाथ से लिखे इस एप्लिकेशन (इसी पेज पर नीचे देखें) में ग्रामर की ढेर सारी गलतियां थीं। इसके बावजूद अस्पताल के निदेशक ने 4 दिन के अंदर अप्वाइंटमेंट लेटर खुद अग्रवाल के घर पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों की कोई वैकेंसी नहीं थी और इस इकलौती भर्ती के लिए कोई विज्ञापन वगैरह भी नहीं दिया गया। नौकरी पर आने के एक महीने से भी कम समय में 4 सितंबर 2015 को निकुंज अग्रवाल को स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) बना दिया गया। अग्रवाल को अब तक चार बार एक्सटेंशन मिल चुका है। कॉन्ट्रैक्ट इंप्लाई होने के बावजूद उनको आईआईएम अहमदाबाद में मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए भेजा गया। इस कोर्स की फीस 1.15 लाख रुपये है। आम तौर पर इसके लिए सीनियर अधिकारियों को ही भेजा जाता है। नियमों के मुताबिक निकुंज अग्रवाल को इस ट्रेनिंग के लिए भेजा ही नहीं जा सकता। डॉक्टर साहब ने इसी दौरान जनता के पैसे पर चीन की सैर भी की।

दामाद से वसूली जाएगी ऐश की रकम

एलजी नजीब जंग ने विजिलेंस की जांच के आदेश देते हुए यह कानूनी राय लेने को भी कहा है कि अगर भर्ती गलत है तो क्या उन्हें दिए गए वेतन और दूसरे फायदों की वसूली की जा सकती है। इस बारे में वकीलों की राय भी ली जा रही है। कानूनी तौर पर केजरीवाल के दामाद का केस पहली नजर में ही बेहद कमजोर मालूम हो रहा है। क्योंकि दिल्ली के मुख्य सचिव ने उनके अप्वाइंटमेंट की फाइल पर नोटिंग लिखा है कि इसमें तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। यह बात भी सामने आई है कि निकुंज गर्ग के पास डॉक्टरी की डिग्री तो है लेकिन एक मेडिकल प्रैक्टिशनर के तौर पर वो एक अयोग्य व्यक्ति है।
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केजरीवाल के ‘रॉबर्ट वाड्रा’ की उपाधि

अरविंद केजरीवाल ने अपने सियासी सफर की शुरुआत ही सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर जोरदार हमले करके की थी। तब उन्होंने वाड्रा के भ्रष्टाचार के खिलाफ कई प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थीं। ये अलग बात कि उन्होंने कभी वाड्रा के खिलाफ कोई सबूत या दस्तावेज पेश नहीं किया। यहां तक कि वाड्रा के खिलाफ जांच के आदेश को रद्द करने वाले आईएएस अफसर युद्धवीर सिंह खयालिया को 2014 के लोकसभा चुनाव में केजरीवाल ने पार्टी का टिकट भी दिया था। अब जबकि खुद केजरीवाल का दामाद विवादों में है समझा जा सकता है कि केजरीवाल के उन तमाम आरोपों और आदर्शवाद का क्या मतलब था। केजरीवाल या उनकी पार्टी ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई सफाई तक नहीं दी है। हालांकि पार्टी के कई सीनियर नेता दबी जुबान में मान रहे हैं कि इस भर्ती में सीधे सीएम केजरीवाल का दबाव था।

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