तीन तलाक और काले बुर्के में बंद वो दो आंखें!

Representational Photo, Courtesy- conservativepost.com

रुचि त्रिवेदी

रुचि त्रिवेदी

मैं आजकल जहां मुस्लिम लोगों को देखती हूँ, इजाजत लेकर उनसे बात करने बैठ जाती हूँ। शुरूआती कुछ दिन मैं गुस्से में होती थी, उन पर उनके धर्म पर इलज़ाम लगाकर शुरुआत करती थी। मैं मुस्लिम औरतों की दुर्दशा पर बेहद नाराज़गी जताती थी। अब थोड़ी सहजता के साथ शुरू करती हूँ। मन में विरोध और क्रोध की जगह सामाजिक जागरूकता पैदा करने की स्वयंसेवी मानसिकता ने ले ली है।

इसी कड़ी में कल एक घंटे की नॉनस्टॉप वॉक के बाद मैंने पैकअप करने का मन बनाया ही था कि सिटीप्लस के गार्डन में एक नौजवान मुस्लिम जोड़ा दिखाई दिया। मैंने अपनी गर्म ग्रीन टी का फ्लास्क और फोन निकाला और उनकी ओर बढ़ गई। मन ही मन सोचा कि हो सका तो इजाज़त लेकर एक वीडियो रिकॉर्ड करूंगी। मैंने अपना सामान्य परिचय देते हुए पास बैठकर कुछ बातें करने का आग्रह किया। जिसे उन दो प्यारे मुस्लिम बच्चों ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। सबसे पहले मैंने जो नोटिस किया वह ये था कि लड़के ने तमीज़ दिखाते हुए खुद से पहले लड़की का परिचय कराया बाद में अपना नाम बताया। मेरे दिमाग में कौंधा, यह एक पढ़ा-लिखा ज़हीन शख्स है।

कुछ बातें जो पता चली- ये लोग कुछ महीनों में शादी करने वाले थे। आज लड़की जिसका नाम मुमताज (बदला हुआ नाम) था, कल सूरत में तीन तलाक पर हुई रैली में शामिल हुई थी, तो लड़का उसे वहां से निकालकर लाया था। लड़की को खुद भी नहीं पता था वो रैली तीन तलाक के समर्थन में थी या विरोध में। बस वो औरों की तरह उनके साथ शामिल हो गई थी।

दोनों में से किसी को भी तीन तलाक पर चल रही बहस की डिटेल्स बिल्कुल मालूम नहीं थी। अदालत में पड़ी याचिकाओं से लेकर सरकार के स्टैंड तक सब कुछ मुझे खुद विस्तार से उन्हें समझाना पड़ा, तब जाकर वो इस पर अपनी राय बनाने के लिए तैयार हो पाए। जाहिर है दोनों ही तीन तलाक के तरीके के खिलाफ थे। लेकिन लड़की “हमारे मज़हब में तो ऐसे ही लिखा है इसलिए मानना ही पड़ता है” का जुमला छोड़ने को राजी नहीं थी। लड़का मुंबई में रहा था और वैचारिक तौर पर अधिक खुला हुआ था। उसे इस मुद्दे पर मुसलमानों के विरोध से एतराज था। उसने मोदी के स्टैंड का खुलकर समर्थन किया। उनके अपने घर में तलाक के कई मामले थे, जिनके बारे में दोनों ने ‘मेरी चाची’, ‘मेरी आपा’ करके ज़िक्र किया।

मुझे उन्हें समझाना पडा कि एक बच्चों वाली औरत को अचानक तलाक कहकर घर से निकाल देना और वेश्याओं की तरह गैरमर्द के साथ हलाला कराना कितना बेरहम है मुस्लिम औरतों के लिए। मैंने गहराई से, बारीकी से, एक शब्द-चित्र खींचा, अगर ऐसा कुछ आपके साथ हो तो? बुर्के से पूरी ढंकी उस बच्ची की खुली आँखों को मैंने सिहरते देखा।

मैंने ये वादा लेकर उनसे विदा लिया कि वो मोदी को कभी वोट नही देते न दें, लेकिन खुद की भलाई से जुड़े मुद्दों पर मूर्ख धर्मांध बनकर मुल्ले-मौलवियों के कहने पर उनका विरोध न करें। अपने साथियों के बीच भी इसकी ज्यादा से ज्यादा चर्चा करें। फोटो लेने के नाम पर लड़के ने ख़ुशी से पोज़ मारा, लेकिन लड़की ने घबराकर अकेली वो खुली आँखें भी ढंक लीं जो उसके शरीर का एकमात्र खुली, आज़ाद और जीवित हिस्सा थीं।

मैं फोटो नहीं ले सकी इसके बाद मन भी नहीं हुआ। मैं तो चिड़ियाघर में कैद जीवों के फोटो, वीडियो लेना भी कभी पसंद नही करती। ये मुझे ख़ुशी नही देता।

(लेखिका गुजरात के सूरत में रहती हैं, यह लेख उनके फेसबुक पेज से साभार लिया गया है)

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