राहुल की राजनीति की आखिरी हार साबित होगा यूपी?

ये होर्डिंग मथुरा में लगाए गए हैं।

क्या यूपी में राहुल गांधी के सियासी करियर की आखिरी हार तय हो चुकी है? आखिरी इसलिए क्योंकि इसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ कांग्रेस के अंदर ही बगावत के पूरे आसार हैं। मथुरा में यूपी कांग्रेस की तरफ से बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए हैं, जिनमें लिखा है ‘इंदिरा इज़ बैक’। साथ में प्रियंका की तस्वीरों से समझना मुश्किल नहीं है कि इस होर्डिंग के पीछे क्या मैसेज छिपा है। ये राहुल गांधी के नेतृत्व के लिए नाउम्मीदी है जिसकी वजह से कांग्रेस के बचे-खुचे कार्यकर्ताओं का बड़ा वर्ग दबी जुबान में प्रियंका वाड्रा को लाने की मांग कर रहा है। ये हालत सिर्फ यूपी में नहीं, बाकी तमाम राज्यों में भी राहुल गांधी को हटाने की मांग दबी जुबान में चल रही है। हमारी जानकारी के मुताबिक यूपी चुनाव के नतीजे अगर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे तो हजारों की तादाद में राज्य स्तर के नेता और पदाधिकारी पार्टी छोड़ सकते हैं।

रीता बहुगुणा की बगावत बड़ा इशारा!

यूपी कांग्रेस की सबसे बड़ी नेताओं में से एक रीता बहुगुणा जोशी का बीजेपी में चले जाना इसका बड़ा लक्षण माना जा रहा है। यूपी में पहाड़ी और ब्राह्मण वोटरों के एक बड़े तबके पर आज भी रीता बहुगुणा की पकड़ मानी जाती है। इसके अलावा कांग्रेस के निचले स्तर के संगठन में भी रीता बहुगुणा के विश्वासपात्र लोग भरे पड़े हैं। इन सभी को यह एहसास है कि यूपी में कांग्रेस के मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए अगले 10-15 साल तक उनका कोई भविष्य नहीं है। सिर्फ एक उम्मीद यही बची है कि एपी या बीएसपी के साथ चुनाव से पहले या बाद में गठबंधन हो जाए और पार्टी किसी तरह सत्ता में पहुंच जाए। अब यही चमत्कार बाकी बचा है जिसका इंतजार उत्तर प्रदेश के ज्यादातर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को है।

नाराजगी का बड़ा कारण प्रशांत किशोर

यह बात भी सामने आ रही है कि राहुल गांधी के पोल मैनेजर प्रशांत किशोर को लेकर राज्य संगठन के नेताओं में भारी गुस्सा है। इन नेताओं को राहुल के कार्यक्रमों की आखिरी वक्त में जानकारी मिलती है। प्रशांत किशोर इन लोगों से कभी बात भी नहीं करते। हाल ही में पूरे यूपी में राहुल गांधी की किसान यात्रा के दौरान भी यही माहौल रहा। कई बड़े नेताओं की शिकायत थी कि प्रशांत किशोर को लगता है कि कांग्रेस पार्टी उन्हें ठेके पर मिल गई है।

खाट सभाओं का जनता में उड़ा मज़ाक

राहुल गांधी की पिछले दिनों हुई खाट सभाओं की वजह से भी निचले कार्यकर्ता खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। ज्यादातर जगहों पर खाट सभाएं फ्लॉप रही थीं। प्रशांत किशोर की टीम ने इनकी नाकामी भी जिला कमेटियों के मत्थे मढ़ दी। जबकि तैयारी के वक्त उन्हें विश्वास में लेने की भी जरूरत नहीं समझी। जिन जगहों पर खाट सभाओं में लूट हुई, वहां होने वाली नेगेटिव पब्लिसिटी का दोषी भी निचले कार्यकर्ताओं को माना गया जबकि किसी भी बड़े नेता ने जिम्मेदारी लेने की जरूरत नहीं समझी।

न्यूज़लूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक रीता बहुगुणा जोशी के आने से बीजेपी को भले ही वैसे कोई फायदा न हो, लेकिन उनके पीछे-पीछे कांग्रेस के पुराने कैडर के टूटने की पूरी उम्मीद है। यही वजह है कि बीजेपी में रीता बहुगुणा का स्वागत पूरे जोरशोर से किया और खुद अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें सदस्यता दी। अगर यह रणनीति कामयाब रहती है तो राहुल गांधी के राजनीतिक करियर में ये आखिरी कील साबित होगा।

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