चीन ने अपने देश में इस्लाम पर ‘पाबंदी’ लगाई!

बायीं तरफ नक्शे में नीले रंग से दिखाया गया इलाका चीन का जिंझियांग प्रांत है। उइघुर मुसलमान इसे ईस्ट तुर्किस्तान नाम से अलग देश बनाने की मांग कर रहे हैं।

चीन दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने अपने यहां इस्लाम धर्म के रीति-रिवाज मानने पर पाबंदी लगा दी है। ये पाबंदी इस्लामी बहुल इलाके उइघुर में लगाई गई है। इस पाबंदी के तहत मां-बाप अपने बच्चों को इस्लाम धर्म के रीति-रिवाज सीखने को नहीं कह सकते। बच्चा अगर नमाज पढ़ने से मना करे तो मां-बाप उसे इसके लिए समझा या मजबूर नहीं कर सकते। इससे पहले चीन ने इसी इलाके में मुसलमानों के रोजा रखने पर पाबंदी लगा दी थी। साथ ही पुरुषों के दाढ़ी रखने पर भी पहले से पाबंदी है। ब्रिटिश अखबार इंडिपेंडेंट ने चीन की लोकल मीडिया और न्यूज़ एजेंसी रायटर्स के हवाले से यह खबर छापी है।

बच्चों को मुसलमान बनाने पर होगी सज़ा!

इस्लाम पर इस पाबंदी के तहत कोई मां-बाप अपने बच्चों को नमाज पढ़ने या किसी इस्लामी रीति-रिवाज को मानने के लिए नहीं कह सकेगा। बच्चों के खतना करने पर भी यह पाबंदी लागू होगी। इस आदेश के तहत चीन सरकार ने प्रशासन और आम लोगों से अपील की है कि अगर उनके आसपास कोई उइघुर परिवार रहता है तो वो उस पर नज़र रखें। किसी भी पड़ोसी, दोस्त या रिश्तेदार के जानकारी देने पर इस कानून के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। ये इलाका चीन के जिनझियांग प्रांत के तहत आता है। 1 नवंबर से लागू होने वाला यह आदेश नई शिक्षा नीति के नाम पर थोपा गया है। आदेश के तहत अगर किसी मां-बाप ने नियम को तोड़ा तो प्रशासन का यह अधिकार होगा कि वो बच्चे को अपनी कस्टडी में ले ले। ऐसे बच्चों को फौरन सुधार घर में भेजा जाएगा, जहां से उसके दिमाग में ‘थोपी’ गई इस्लामी बातें निकालकर इस्लाम की बुराइयां बताई जाएंगी।

चीन से आजादी चाहते हैं उइघुर मुसलमान

चीन के जिनझियांग प्रांत की सीमा पाकिस्तान के साथ लगती है। यहां पर सुन्नी मुसलमानों की आबादी ज्यादा है, इन्हें उइघुर मुसलमान भी कहते हैं। ये लोग अलग ईस्ट तुर्किस्तान देश की मांग कर रहे हैं। लेकिन चीन आजादी की इन आवाजों का बेहद बेरहमी के साथ दमन करता है। पिछले कुछ सालों में यहां उइघुर मुसलमान कई आतंकी हमले भी कर चुके हैं। इसके जवाब में चीन की सेना की कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। कुछ साल पहले चीन ने इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। चीन की सेना यहां अक्सर छापेमारी करती रहती है। यहां चोरी-छिपे चल रहे कई मदरसे भी पकड़े जा चुके हैं।

उइघुर में बाकी चीन के मुकाबले गरीबी और बेरोजगारी काफी ज्यादा है। ऊपर से रूसी सेनाओं के अत्याचारों से हालात अक्सर बिगड़ते रहते हैं। कई बड़े उइघुर नेता या तो चीन की जेलों में बंद हैं या विदेशों में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। कुछ समय पहले न्यूज़लूज़ पर हमने चीन के उइघुर इलाके के हालात पर एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। लिंक पर क्लिक करके आप इसे भी पढ़ सकते हैं।
पढ़ें: चीन में भी एक कश्मीर है, उस पर चुप्पी क्यों है?

 

 

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