वो चिट्ठी पढ़िए जिसके बाद मुलायम आगबबूला हो गए!

आदरणीय नेताजी सादर चरण स्पर्श,
समाजवादी पार्टी को आपने बड़ी मेहनत से बनाया था. पार्टी चार बार सत्ता में भी पहुंची. पिछली बार किसी अन्य दल के समर्थन की आवश्यकता भी नहीं पड़ी. उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार ने जो कार्य किए हैं वो पूरे देश के लिए पथ प्रदर्शक का कार्य कर रहे हैं. मुख्यमंत्री जी इस समय निर्विवाद रूप से प्रदेश के सबसे बड़े लोकप्रिय नेता हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हुआ उससे पार्टी का मतदाता निराश और हताश है. और अब तो उसमें नेतृत्व के प्रति आक्रोश भी उत्पन्न हो रहा है.

लोगों को कष्ट ये है कि पहले नंबर पर चल रही पार्टी कुछ इन गिने-चुने लोगों की गलत सलाह के चलते काफी पीछे चली गई है. ये जो आजकल आपको सलाह दे रहे हैं, जनता की निगाह में उनकी हैसियत शून्य हो गई है.

पार्टी जिसे चाहे उसे टिकट दे, लेकिन जीतेगा वही जिसकी हैसियत होगी. और पार्टी तभी चुनाव जीतेगी जब पार्टी का चेहरा अखिलेश यादव होंगे. अगर आप चाहते हैं कि पार्टी फिर 100 से नीचे चली जाए तो आप चाहें जो फैसला लें, लेकिन एक बात याद रखें कि जो जनता आपकी पूजा करती है, समाजवादी पार्टी बनाने के लिए, वही जनता पार्टी के पतन के लिए आपको और केवल आपको दोषी ठहराएगी. इतिहास बहुत निष्ठुर होता है, ये किसी को बख्शता नहीं.

सादर आपका,
रामगोपाल यादव
15 अक्टूबर, 2016

मुलायम पर पत्र का कोई असर नहीं

हमें मिली जानकारी के मुताबिक यह पत्र मिलने के बाद मुलायम सिंह यादव एक बार फिर आग-बबूला हो गए। उन्होंने रामगोपाल यादव को मिलने के लिए बुलाया और पत्र के बारे में बात की। मुलायम ने इस बात पर नाराजगी जताई कि उन्होंने चिट्ठी लिखने के बाद उसे मीडिया में जारी क्यों कर दिया। रामगोपाल यादव के इस पत्र और उस पर मुलायम के सख्त जवाब के बाद अब यह पक्का हो गया है कि यूपी की लड़ाई में मुलायम अपने भाई शिवपाल के साथ ही खड़े हैं।

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