अगला नास्तिक सम्मेलन वेटिकन या मक्का में करें?

आशीष कुमार

आशीष कुमार

श्रद्धेय स्वामी बालेंदु जी,
वैसे तो आपके नाम से खुला पत्र लिखना ही आपको सम्मान देना है, क्योंकि इससे पहले कोई आपको जानता नहीं था। इसलिए आपकी प्रशंसा में ज्यादा कुछ नहीं लिख रहा। वृंदावन में आपके द्वारा आयोजित नास्तिक सम्मेलन पर तथाकथित हमले के बाद उसके रद्द होने की खबर वाकई दुखी करने वाली है। चूंकि आप भी नास्तिक हैं और मैं भी भगवानों और कर्मकांडों में ज्यादा भरोसा नहीं करता इसलिए आपके अभियान में थोड़ी रुचि पैदा हो गई। मन में कुछ सवाल पैदा हुए सोचा कि आप सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं इसलिए पूछ ही डालूं

–  किसी ने फेसबुक पर लिखा है कि ‘आप हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मों को समान रूप से गरियाते हैं’। लेकिन जब थाने में जाकर हमले की एफआईआर लिखाने की नौबत आई तो आपने नामजद रिपोर्ट में सिर्फ हिंदुओं के नाम लिखवाए, एक भी मुसलमान का नाम क्यों नहीं लिखवाया? कोई खास वजह?

– मीडिया की तस्वीरों और फुटेज में वहां पर कई टोपीधारी मुसलमान भी दिखाई दे रहे हैं। जिनमें से ज्यादातर को मथुरा और वृंदावन में लोग नाम से पहचानते हैं। क्या कारण है कि आप उनको नहीं पहचान पाए?

– मेरी जानकारी के मुताबिक पुलिस ने रोजनामचे में उस लड़के का नाम भी लिखा है जिसने आपके अम्माजी होटल पर पत्थर फेंककर शीशा फोड़ा था और उसका पता भी दर्ज है जिसने होटल के बाहर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की थी। क्या उन लड़कों के नाम और मजहब पुलिस ने आपको नहीं बताए?

– आप कह रहे हैं कि आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन हुआ है। और इशारा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ कर रहे हैं। तो क्या आपको लगता है कि यूपी की पुलिस और सरकार मोदी के इशारे पर काम करती है? अगर हो सके तो अपना सियासी एजेंडा साफ करें।

– मैंने कुछ लोकल लोगों से बात की, उनका तो यह भी कहना है कि हंगामा और तोड़फोड़ करने वालों में कुछ आपके रिश्तेदार भी थे। जो आपकी करतूतों की वजह से आपसे नाराज चल रहे हैं। अपने घर के झगड़े को हिंदुत्ववादी संगठनों पर फोड़ना कहां तक वाजिब है?

– अगर आपने सम्मेलन से पहले लोकल अखबारों में इस्लाम समेत सभी धर्मों को लेकर वो भड़काऊ लेख नहीं लिखा होता तो क्या आपको लगता है सम्मेलन के बारे में किसी को कुछ पता भी चलने पाता? या कोई विरोध होता? कहीं ऐसा तो नहीं कि आपका इरादा पब्लिसिटी स्टंट का है? क्योंकि पिछले साल जब पहली बार आपने नास्तिक सम्मेलन किया था तो कोई चर्चा ही नहीं हुई थी। आप तो जानते ही होंगे कि पब्लिसिटी के लिए विवाद जरूरी है।

खैर, आपका दावा है कि आप पहले धर्म गुरु थे और अब नास्तिक हो गए हैं। तो आपको पता ही होगा कि हिंदू धर्म इकलौता धर्म है जिसमें नास्तिकों और नास्तिकता को भी जगह मिली हुई है। तथ्य तो आपको भी पता ही होगा कि विरोध प्रदर्शन करने वाले हिंदू जरूर थे, लेकिन हिंसा करने वाले हिंदू नहीं थे। वो अलग बात कि आपने उनको नामजद नहीं किया। द हिंदू और बीबीसी में छपी फर्जी खबरों को शेयर करके आपने यह तो साबित कर ही दिया कि हिंदू धर्म बेहद दकियानूसी और असहिष्णु है। इस धर्म को मानने वालों ने अपने एक पवित्र धार्मिक स्थान पर आपकी मीटिंग नहीं होने दी। चलिए कोई बात नहीं अगली बार आप वेटिकन या मक्का में नास्तिक सम्मेलन कीजिएगा। उसमें मैं भी आऊंगा। उस सम्मेलन के बाद मैं आपका पक्का फॉलोअर बन जाऊंगा। ये मेरा प्रॉमिस है।

आपका भावी नास्तिक

आशीष कुमार

म्यूनिख, जर्मनी

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