भारत बना रहा है एटम बम से सुरक्षा का ‘कवच’

पाकिस्तान की एटम बम की धमकियां बहुत जल्द बेकार साबित होने वाली हैं। भारत एक ऐसा मिसाइल प्रोटेक्शन सिस्टम लगा रहा है कि कोई दुश्मन भारत के अंदर एटम बम लेकर दाखिल ही नहीं हो सकेगा। अभी अमेरिका, रूस और इस्राइल जैसे कुछ गिने-चुने देशों में ही ऐसा एयर डिफेंस सिस्टम है। भारत ये टेक्नोलॉजी रूस से खरीद रहा है। पाकिस्तान के साथ परमाणु युद्ध के खतरे के मद्देनजर इस सिस्टम की जरूरत कुछ वक्त से महसूस की जा रही थी। डिफेंस एक्सपर्ट इस सिस्टम को ‘लोहे की छत’ (Iron Dome) भी कहते हैं।

रूस के साथ 39 हजार करोड़ की डील

गोवा में ब्रिक्स देशों की समिट में आ रहे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समझौते पर दस्तखत करने वाले हैं। फ्रांस से रफाल विमानों की डील के बाद इसे सबसे अहम रक्षा समझौता माना जा रहा है। इस डील के तहत रूस अभी भारत को पांच S400 ट्रायंफ एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम देगा।

टारगेट से पहले ही एटम बम पर अटैक!

ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम दिन और रात किसी भी वक्त और किसी भी मौसम में अचानक आए खतरे पर अचूक वार करता है। मान लीजिए अपनी किसी मिसाइल से पाकिस्तान या चीन भारत पर एटमी हमला करते हैं तो इसके पावरफुल रेडार इसे कुछ सेकेंड के अंदर ही खतरा भांप लेंगे। इसके साथ ही डिफेंस सिस्टम में लगी मिसाइलें उस पर धावा बोल देंगी। एस-400 मिसाइल सिस्‍टम 400 किलोमीटर के दायरे में करीब 300 अलग-अलग निशानों को ट्रैक कर सकता है और एक साथ करीब 3 दर्जन टारगेट पर हमला कर सकता है। यह तो थी मिसाइल हमले से सुरक्षा की। अगर हमला फाइटर प्लेन के जरिए होता है तो उस पर भी एस-400 की नजर होगी। इसका रेडार स्टील्थ विमानों को भी पकड़ लेता है। जबकि स्टील्थ विमान आम तौर पर रेडार के पकड़ में नहीं आते।

कहां पर लगेगा एटम बम सुरक्षा कवच?

शुरू में जो पांच सिस्टम मिलेंगे उन्हें भारत के न्यूक्लियर पावर सेंटरों और देश के सबसे अहम ठिकानों की हिफाजत के लिए लगाया जाएगा। बाद में इस सिस्टम का दायरा बढ़ेगा और इन्हें बॉर्डर के इर्द-गिर्द लगाया जाएगा ताकि कोई भी हमला होने पर दुश्मन की मिसाइल या फाइटर प्लेन को उसी की सीमा में मार गिराया जाए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत अगर इस सिस्टम की तीन यूनिट्स पाकिस्तान से लगी अपनी सीमा के पास तैनात कर दे तो पाकिस्तान भारत पर एटमी हमला कर ही नहीं पाएगा।

सीरिया में आजमाया हुआ है ये सिस्टम

एस-400 सिस्टम को दुनिया का सबसे एडवांस मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जाता है। रूस ने इसे सीरिया में ISIS के खिलाफ चल रही लड़ाई में तैनात किया है। इसी सिस्टम का नतीजा है कि सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद की सेना के कब्जे वाले इलाके में बगदादी की फौज एक भी बड़ा हवाई हमला नहीं कर सकी है।

रूस से डिफेंस टेक्नोलॉजी लेने पर ज़ोर

इस डील के साथ भारत और रूस के बीच डिफेंस टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर पर भी बात होनी है। रूस भारतीय नौसेना का एक दस्ता भी तैयार करेगा। साथ ही मल्टीटास्क हेलीकॉप्टर कोमोनोव 226 को भारत में बनाने के लिए दोनों देशों के बीच एक ज्वाइंट वेंचर भी शुरू होगा। भारत आज तक अपनी सुरक्षा के मामले में काफी हद तक सोवियत रूस के जमाने की टेक्नोलॉजी के भरोसे रहा है। मोदी सरकार ने आने के बाद इसे अपग्रेड करने के लिए 100 खरब डॉलर के निवेश का प्लान बनाया है। इसी के तहत ये सारी डिफेंस डील हो रही हैं।

नीचे वीडियो पर क्लिक करके आप एस-400 मिसाइल डिफेंस टेक्नोलॉजी के काम करने के तरीके का एनिमेशन देख सकते हैं।

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