केजरीवाल जी, सिख गुरुओं का बलिदान छोटा क्यों है?

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लेखिका शेफाली वैद्य ब्लॉगर और कॉलमिस्ट हैं।

हम सभी जानते हैं कि अरविंद केजरीवाल ‘अल्पसंख्यक’ वोट बैंक के लिए कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने सारी हदें तोड़ डालीं। अरविंद केजरीवाल ने मुहर्रम के मौके पर ट्वीट किया कि इमाम हुसैन ‘मानवता के सबसे महान शहीद’ हैं। जो लोग नहीं जानते उनकी जानकारी के लिए बता दूं कि खलीफा अली के बेटे इमाम हुसैन करबला के युद्ध में यजीदियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। मैं इस बात को अच्छी तरह समझती हूं और इसका सम्मान करती हूं।

लेकिन जब केजरीवाल उन्हें ‘मानवता के सबसे महान शहीद’ का ताज पहनाते हैं तो उनके कहने का सीधा मतलब तो यही है कि बाकी तमाम लोग जिन्होंने मानवता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, उनका बलिदान उतना महान नहीं है। सिखों के 9वें गुरु तेग बहादुर ने जब इस्लाम कबूल करने से इनकार कर दिया तो औरंगजेब ने बेहद बर्बरता के साथ उन्हें सज़ा-ए-मौत दी थी। उनके सहयोगी भाई दयाला, भाई मतिदास और भाई सती दास को तीन दिन तक असहनीय यातनाएं दी गई थीं और आखिर में औरंगजेब ने उन्हें खौलते तेल में डालकर जिंदा मरवा दिया था।

सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह ने तो अपने चारों बेटों, साहिबजादा अजीत सिंह, साहिबजादा जुझार सिंह, साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजाता फतेह सिंह का बलिदान दिया, लेकिन उन्होंने औरंगजेब के आगे समर्पण करने के बजाय धर्म की रक्षा करने को ज्यादा जरूरी माना। जिस वक्त औरंगजेब की सेना ने उनकी हत्या की जोरावर सिंह की उम्र सिर्फ 9 साल और फतेह सिंह की उम्र सिर्फ 6 साल थी। औरंगजेब ने इन दोनों के आगे भी प्रस्ताव रखा था कि अगर उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया तो वो उन्हें छोड़ देगा, लेकिन इन दोनों बच्चों ने झुकने से इनकार कर दिया। औरंगजेब ने इन सभी को जिंदा दीवार में चुनवा दिया था।

अब बात छत्रपति संभाजी महाराज की। छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े बेटे संभाजी को औरंगजेब ने पूरे एक महीने तक अमानवीय यातनाएं दी थीं। उनकी जीभ कटवा दी और उनकी आंखों में लोहे के गर्म चाकू घुसवा दिए। यहां तक कि उनके शरीर से चमड़ी उतवा करके उनके शरीर को हजारों टुकड़ों में कटवा दिया था। औरंगजेब के इन अत्याचारों के आगे संभाजी नहीं झुके और हिंदू धर्म त्यागकर इस्लाम कबूल नहीं किया।

भारतीय इतिहास ऐसे हजारों वीरों से भरा पड़ा है, जिन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों के अत्याचारों का सामना किया, लेकिन अपने धर्म की रक्षा की। लेकिन आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के लिए शहादत का पैमाना कुछ और ही है। जिनका जिक्र हमने किया उनमें से कोई भी उतना महान शहीद नहीं है, जितने महान इमाम हुसैन थे।

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