जासूसी से अय्याशी तक, केजरीवाल का कच्चा-चिट्ठा!

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों के बीच ‘ओपन’ मैगजीन ने बड़ा खुलासा किया है। मैगजीन के ताजा अंक में छपी रिपोर्ट में केजरीवाल सरकार के बारे में ऐसी जानकारियां दी गई हैं, जो अपने आप में चिंता की बात है। कुल मिलाकर निचोड़ यह है कि आम आदमी के नाम पर सत्ता में आई यह मंडली इन दिनों अय्याशी में डूबी हुई है। मनमानी ऐसी है कि यह मुख्यमंत्री से लेकर मामूली विधायक तक किसी संविधान में तय नियम-कायदों को मानने को तैयार नहीं है। सरकार में केजरीवाल के रिश्तेदारों से लेकर पार्टी के वॉलेंटियर्स तक को खुलेआम रेवड़ियां बांटी जा रही हैं। ओपन मैगजीन में छपी रिपोर्ट की अहम बातों को हम यहां हिंदी में आपके लिए लेकर आए हैं।

1. केजरीवाल का बर्ताव सनकी जैसा

अरविंद केजरीवाल के साथ काम करने वाले बताते हैं कि वो बेहद तुनकमिजाज और घमंडी हैं। अपनी बात मनवाने के लिए वो ड्रामेबाजी में भी माहिर हैं। उनकी ये आदतें कई बार निजी और सार्वजनिक बातचीत में जाहिर हो चुकी है। 2014 में लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद जब प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने उनका विरोध शुरू किया तो बैठकों में वो फिल्मी स्टाइल में रोने और कभी-कभी चीखने-चिल्लाने लगते थे। आशुतोष ने अपनी किताब में भी लिखा है कि उस दौर में केजरीवाल अनियंत्रित रूप से भावुक हो गए थे। कई बार वो रोने लगते थे और एक बार तो जमीन पर लोट गए।

2. जासूसी एजेंसी बनाने की कोशिश

2015 में दूसरी बार सत्ता में आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने ईडी, पुलिस, सीबीआई और कुछ दूसरी खुफिया एजेंसियों में काम कर चुके रिटायर्ड और मौजूदा अधिकारियों की टीम बनानी शुरू कर दी। इन लोगों को सीक्रेट तरीके से फंडिंग की गई। केजरीवाल का इरादा था कि वो इन लोगों की मदद से दिल्ली सरकार की एक खुफिया/जासूसी एजेंसी बनाएंगे जो मौजूदा एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के अलावा काम करेगी। ये सारा काम चोरी-छिपे चल रहा था और इसके लिए कानूनी तौर पर जरूरी मंजूरी भी नहीं ली गई। सारा ढांचा इस तरह का था कि ये सीक्रेट एजेंसी सिर्फ और सिर्फ अरविंद केजरीवाल को रिपोर्ट करेगी।

3. जासूसी के साजो-सामान और भर्तियां भी!

सत्ता संभालने के कुछ दिनों के अंदर ही 1 अप्रैल 2015 को दिल्ली कैबिनेट ने एंटी-करप्शन ब्यूरो में 259 नई भर्तियां करने पर मुहर लगाई। इसी मीटिंग में सीक्रेट सर्विस फंड को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख करने का प्रस्ताव हुआ। मीटिंग में एकाउंट्स से लेकर, इनकम टैक्स, इंजीनियरिंग और लीगल प्रोफेशनल्स की भर्ती पर भी बात हुई। यह प्लान तैयार हुआ कि इस सीक्रेट एजेंसी के लिए हाईटेक जासूसी उपकरण खरीदे जाएंगे। ऐसे साजोसामान आमतौर पर सीबीआई और आईबी जैसे एजेंसियां ही इस्तेमाल करती हैं। 29 सितंबर 2015 को हुई कैबिनेट बैठक में सतर्कता निदेशालय के तहत एक विभाग बनाने की बात हुई, जिसे हाथों-हाथ मंजूरी भी मिल गई। इस नए विभाग के बारे में केजरीवाल और उनके मंत्रियों के अलावा किसी को जानकारी नहीं होने दी गई। इसका नाम रखा गया फीडबैक यूनिट। इस यूनिट में इस साल फरवरी तक करीब 20 लोग काम भी कर रहे थे। बाद में कुछ और लोगों की भी भर्ती हुई। जो लोग चुने गए थे उनकी योग्यता का कोई पैमाना नहीं था। उनकी इकलौती काबिलियत यह थी कि वो आम आदमी पार्टी से जुड़े थे। दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव सरकार के चीफ विजिलेंस ऑफिसर भी होते हैं, लेकिन उन्हें भी इस कदम की कोई जानकारी नहीं दी गई। दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख नजीब जंग को भी इस यूनिट के बारे में पहली बार इस साल अगस्त में पता चला।

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