इस दलित की हत्या पर सेकुलर ब्रिगेड जश्न मना रहा है!

दायीं तस्वीर विष्णु की है, जिसकी हत्या कर दी गई। बायीं तस्वीर इसी साल मार्च में कन्नूर में हुई हत्या की है। जब बीजेपी से जुड़े एक ऑटोवाले को स्कूली बच्चों के आगे चाकुओं से गोदकर मार डाला गया था।

केरल में आरएसएस और बीजेपी से जुड़े लोगों का नरसंहार जारी है। ताजा घटना घटना राजधानी त्रिवेंद्रम में हुई, जहां बीजेपी के एक युवा कार्यकर्ता की उसके घर में ही मां के सामने चाकू गोदकर हत्या कर दी गई। 19 साल का विष्णु दलित था और बीजेपी की युवा ईकाई का सक्रिय कार्यकर्ता था। हमलावरों ने जाते-जाते विष्णु की मां और एक पड़ोसी को भी चाकू मार दिया। इस घटना से केरल में बीजेपी के कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा है। चूंकि हत्यारे कम्युनिस्ट पार्टी के लोग हैं, इसलिए दिल्ली की मीडिया ने इस खबर को लगभग पूरी तरह दबा दिया। जबकि दलितों पर अत्याचार के दूसरे मामलों में मीडिया का रवैया बिल्कुल अलग होता है। कई बड़े पत्रकारों ने तो इस बर्बर घटना पर एक ट्वीट करने तक की जरूरत नहीं समझी।

निशाने पर हैं संघ और भाजपा कार्यकर्ता!

केरल में आए दिन लेफ्ट के गुंडे बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोगों की हत्याएं कर रहे हैं। राज्य में इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में सीपीएम की जीत और पी विजयन के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लेफ्ट की हिंसा में दोगुने से भी अधिक बढ़ोतरी हुई है। यहां सीपीएम का गढ़ माने जाने वाले कन्नूर जिले में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं। यहां पर संघ और भाजपा के दफ्तरों और कार्यकर्ताओं के घरों पर बम फेंकने की घटनाएं बेहद आम हैं। ज्यादातर जगहों पर हमले के बाद सीपीएम के कार्यकर्ता पकड़े तो जाते हैं, लेकिन बहुत जल्द जमानत पर बाहर भी आ जाते हैं। इसके पीछे बड़ी वजह यह मानी जाती है कि हमलावरों के मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि खुद राज्य के मुख्यमंत्री पी विजयन हैं। न्यूज़लूज़ पर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले पी विजयन के बारे में हमने यह रिपोर्ट पब्लिश की थी।

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इसी साल सितंबर में तिरुवनंतपुरम में बीजेपी कार्यालय पर देसी बम से हमला हुआ था। ये हमला प्रदेश अध्यक्ष कुम्मानम राजशेखरन की हत्या के इरादे से किया गया था। इस घटना में वो बाल-बाल बच गए थे। इस घटना के बाद बीजेपी ने अपनी एक जांच टीम भी राज्य के दौरे पर भेजी थी।

वामपंथी हिंसा का शिकार हो रहे हैं दलित!

लेफ्ट पार्टियां बाकी देश में भले ही दलितों की सबसे बड़ी हितैषी बनने की कोशिश करती हों, लेकिन केरल में इनका चेहरा कुछ और ही है। यहां पर सीपीएम के टारगेट पर सबसे ज्यादा दलित ही हैं। बड़ी संख्या में दलित बीजेपी और आरएसएस में शामिल हो रहे हैं, इससे बौखलाई सीपीएम इन पर हमले करवा रही है। केरल में वामपंथी दलों के ज्यादातर बड़े नेता अगड़ी जातियों के हैं और उनके अंदर हिंदू दलितों के लिए नफरत की भावना भरी हुई है। इसी साल मई में एर्नाकुलम में एक दलित छात्रा जीशा के साथ बर्बर तरीके से रेप करके उसकी हत्या कर दी गई। चूंकि आरोपी मुसलमान थे, इसलिए केरल सरकार ने उनके साथ पूरी नरमी बरती। इस घटना को केरल का निर्भया कांड तक कहा गया, लेकिन दिल्ली के चैनलों और अखबारों ने वामपंथी अत्याचार की इस खबर को दबा दिया।

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पिछले महीने केरल में बीजेपी कार्यकारिणी की बैठक में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में हो रही राजनीतिक हत्याओं पर चिंता जताई थी। उन्होंने यहां तक कहा कि कार्यकर्ताओं का यह बलिदान बेकार नहीं जाएगा। यह साफ संदेश था कि राज्य की वामपंथी सरकार अपने गुंडों पर अब लगाम लगाए, लेकिन विष्णु की हत्या से लगता है कि मुख्यमंत्री विजयन कोई सबक लेने को तैयार नहीं हैं।

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