देखिए कांग्रेसियों ने कैसे इंदिरा को दुर्गा कहलवाया था!

आजकल टीवी कार्यक्रमों में अक्सर ये सुनाई देता है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने 1971 की जंग के बाद इंदिरा को दुर्गा कहा था। दरअसल यह बात भी कांग्रेसी प्रोपोगेंडा का हिस्सा थी। खुद वाजपेयी कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा। अंग्रेजों ने देश के इतिहास के साथ खिलवाड़ किया ये तो जगजाहिर है, पर आज़ादी के बाद कांग्रेसी इतिहासकारों और उसकी प्रायोजित मीडिया ने भी इतिहास को तोड़ने मरोड़ने में कोई कमी नहीं रखी। जिस तरह आजादी के बाद कई स्वंतंत्रता सेनानियों के योगदान को छिपा कर सारा श्रेय नेहरू परिवार और उनके चापलूसों में बाँट दिया गया, उसी तरह आजादी बाद भी कांग्रेसी नेताओं या यूँ कहें कि नेहरू-गाँधी परिवार का नाम ऊँचा करने के लिए नकली जुमले गढ़े गए। कांग्रेस और उसकी प्रायोजित मीडिया ने 1971 की लड़ाई का सियासी फायदा उठाने के लिए तब विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी के मुंह से यह कहलवा लिया कि इंदिरा गांधी दुर्गा हैं।

कभी नहीं कहा इंदिरा को दुर्गा

वाजपेयी उन दिनों विपक्ष में थे, लेकिन एक नेता के तौर पर उनकी साख कांग्रेस के कई बड़े-बड़े नेताओं से ज्यादा थी। लिहाजा कांग्रेसियों ने उनकी इस खूबी को इंदिरा गांधी के झूठे महिमामंडन के लिए इस्तेमाल किया और आज भी कर रही है। यह बात इतनी फैलाई गई कि खुद वाजपेयी इसका खंडन करते रह गए पर उनकी बात को दबा दिया गया। तब तमाम अखबारों ने बिना किसी पुष्टि के वाजपेयी के इस तथाकथित बयान को छापा भी था। कई साल बाद एक टीवी कार्यक्रम में उन्होंने साफ किया कि इंदिरा की उन्होंने तारीफ जरूर की थी, लेकिन दुर्गा से बराबरी कभी नहीं की।

लड़ाई का फायदा उठाने की कांग्रेसी परंपरा

आज़ादी के बाद अधिकतर समय कांग्रेस पार्टी ने राज किया। देश ने इस दौर में कई युद्ध देखे, जिसमें भारतीय सेना ने पूरे दमखम से अपना पराक्रम दिखाया। 1963 में चीन के साथ युद्ध में हमें बुरी तरह जान-माल का नुकसान हुआ और तब की नेहरू सरकार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि हमारी तैयारी पूरी नहीं थी। 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग में जब हमें जीत मिली तो सारा क्रेडिट तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को दे दिया गया। श्रेय में कोई कमी न रह जाए इसलिए न सिर्फ अपने पक्ष के चापलूसों से बल्कि उस वक़्त के नेता विपक्ष के नाम से भी इंदिरा को दुर्गा कहने की बात फैला दी गई। आज़ादी के इतने सालों बाद भी देश में गरीब और भगवान भरोसे जी रही जनता से वोट पाने के लिए खुद को भगवान घोषित करवा लेने का ये सबसे विचित्र मामला था। ये अलग बात है कि अब कांग्रेस पार्टी को डर है की सत्ता में आए वाजपेयी के उत्तराधिकारी बिना खुद को भगवान कहलवाए ही, युद्ध जैसी स्थिति का राजनीतिक फायदा उठा लेंगे।
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