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कांग्रेस की ‘सेल्फी विद डेडबॉडी’ छिपा क्यों ली गई?

क्या आपको पता है कि बिहार में कांग्रेस की एक महिला विधायक ने लाशों के साथ अपनी सेल्फी खींची? उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गई। लेकिन देश के बड़े अखबारों और चैनलों ने इस खबर को दबा दिया। आम तौर पर ऐसा मामला बीजेपी के किसी नेता के साथ होता है तो मीडिया देश भर में हंगामा मचा देती है। न्यूज़लूज़ को कांग्रेस पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि कैसे दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता ने कुछ संपादकों को सीधे फोन करके इस खबर को न चलाने का ‘अनुरोध’ किया था। इस ‘अनुरोध’ का असर भी हुआ और दिल्ली के किसी चैनल या अखबार ने इस पर हंगामा नहीं बचाया। कुछेक ने खबर दिखाई भी तो सिर्फ 10-20 सेकेंड की।

क्या है ये पूरा मामला?

बिहार के मधुबनी इसी हफ्ते सोमवार को एक बस हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई थी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत तमाम बड़े नेताओं ने इस हादसे पर दुख जताया था। मौके के दौरे पर पहुंचीं कांग्रेस की विधायक भावना झा को यह पर्यटन का अच्छा मौका दिखा। हादसे की जगह पर पहुंचकर उन्होंने लाशों के बैकग्राउंड में सेल्फी खींचनी शुरू कर दी। इनमें से कुछ तस्वीरें उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर भी शेयर कीं। लोकल अखबारों में खबर छपने के बाद विधायक महोदया फौरन एक्टिव हुईं और उन्होंने मीडिया को बुलाकर सफाई देनी शुरू कर दी। लेकिन सबसे हैरतअंगेज बात यह रही कि उन्होंने दिल्ली की मीडिया में यह खबर ‘मैनेज’ करवा ली। हमें मिली जानकारी के मुताबिक विधायक भावना झा के कुछ समर्थकों ने खुलेआम यह बात कबूल भी की है। फिलहाल सोशल मीडिया पर उनकी ये सेल्फी वायरल हो गई। लोग इसे Selfie with Dead body का नाम दे रहे हैं।

सेल्फी-सेल्फी में फर्क क्यों?

हाल ही में राजस्थान महिला आयोग की सदस्य सौम्या गुर्जर ने बलात्कार पीड़िता के साथ सेल्फी खींची थी। इसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तक पर हमले बोले गए थे। इसी तरह महाराष्ट्र की मंत्री पंकजा मुंडे विदर्भ के सूखे इलाके में एक तालाब के साथ सेल्फी खिंचवाने पर मीडिया के टारगेट पर आ गई थीं। यहां तक कि छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह के करीना कपूर के साथ सेल्फी खींचने पर भी दिल्ली के चैनल दिन भर का हंगामा मचा चुके हैं। इसी तरह रियो ओलंपिक में खेल मंत्री विजय गोयल के खिलाड़ियों के साथ सेल्फी पर भी खूब तमाशा खड़ा किया गया था। पीएम मोदी के सेल्फी खींचने पर समय-समय पर मीडिया पहले से चुटकुलेबाजी करता रहा है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या मीडिया बीजेपी के खिलाफ बेवजह के मुद्दों को जानबूझ कर तूल देता है और क्या इसके पीछे संपादकों का निजी एजेंडा काम कर रहा है।

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