रफाल डील फाइनल, मोलभाव से 56000 करोड़ बचे!

रक्षा के मामले में 23 सितंबर शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक साबित होने वाला है। आज फ्रांस के साथ 36 रफाल लड़ाकू विमान खरीदने की डील पर दस्तखत होंगे। बड़ी बात यह है कि पिछली कांग्रेस सरकार के वक्त इन्हीं लड़ाकू विमानों के लिए 12 अरब यूरो का दाम तय हुआ था। मोदी सरकार ने आने के बाद इस डील को कैंसिल कर दिया था और नए सिरे से कंपनी के साथ मोलभाव शुरू की गई। नतीजा यह हुआ कि अब वही डील 7.8 अरब डॉलर में हो रही है। यानी कुल 56000 करोड़ रुपये की बचत, पूरे 35 फीसदी की बचत। सिर्फ यही नहीं कंपनी को कुल ऑर्डर के आधे लड़ाकू विमान भारत में ही बनाने होंगे।

पाकिस्तान पर बढ़त दिलाएगा रफाल

कांग्रेस के पिछले 10 साल के शासन के दौरान रक्षा सौदों में रिश्वतखोरी और घोटालों का नतीजा यह हुआ कि सेना को उसकी जरूरत के हथियार और साजो-सामान तक नहीं मिल पाए। मनमोहन सरकार ने जाते-जाते रफाल विमानों का सौदा किया भी तो बढ़ी हुई कीमतों पर। इन सारी वजहों से आज भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता कई मायनों में पाकिस्तान से कमजोर है। खास तौर पर इसलिए भी क्योंकि पाकिस्तान के पास अमेरिका के एफ-16 विमान हैं जबकि भारत की हवाई सुरक्षा आज भी पुरानी टेक्नोलॉजी वाले रूसी सुखोई विमानों के भरोसे है।

20 साल बाद मिलेगा नया फाइटर प्लेन

रफाल विमानों की खरीद के समझौते के लिए फ्रांस के रक्षा मंत्री भारत आए हुए हैं। वो और भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर इस डील पर दस्तखत करेंगे। इस दौरान रफाल बनाने वाली कंपनी डेसॉल्ट एविएशन के सीईओ भी मौजूद रहेंगे। डील साइन होने के 36 महीने बाद इन विमानों की डिलिवरी शुरू होगी। 66 महीने में कुल 36 विमान भारत को सौंप दिए जाएंगे। इस फाइटर जेट से हवा से हवा में मार करने वाली मीटियॉर और स्कैल्प मिसाइलें भी दागी जा सकती हैं। मीटियॉर 150 किलोमीटर दूर तक दुश्मन पर हमला कर सकती हैं। इस विमान की मदद से भारत अपनी सीमा में रहते हुए न सिर्फ पाकिस्तान के अंदर, बल्कि उत्तरी और पूर्वी सीमाओं के पार तक हमले कर सकेगा। जबकि स्कैल्प मिसाइलों से हवा से जमीन पर 300 किलोमीटर दूर तक हमला बोला जा सकता है।

डिफेंस सेक्टर में मोदी का मास्टरस्ट्रोक!

इस डील को रक्षा क्षेत्र में पीएम मोदी का मास्ट्ररस्ट्रोक माना जाता है। इसके तहत फ्रांस इस बात के लिए तैयार हो गया है कि वो डील की रकम का आधा भारत में रक्षा क्षेत्र के लिए निवेश करेगा। इससे भारत में छोटे कलपुर्जे सप्लाई करने वाली कंपनियों को 3 अरब यूरो का बिजनेस मिलेगा। इस निवेश की वजह से हजारों नई नौकरियां पैदा होंगी। इतनी बड़ी बचत और अच्छी डील के बावजूद मीडिया का बड़ा तबका इस डील को किसी आम रक्षा सौदे की तरह दिखा रहा है। जबकि मनमोहन सिंह के वक्त जब यही सौदा लगभग दोगुने दाम पर हुआ था तो मीडिया उनकी तारीफों में कसीदे पढ़ रहा था। इसी बात से समझ सकते हैं कि इस सौदे से दलाली और भ्रष्टाचार को पूरी तरह दूर रखा गया है। यही कारण है कि रफाल डील में

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