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संघ की ‘दलित यात्रा’ में शामिल होंगे ऊना के पीड़ित!

Courtesy: Indian Express/File

गुजरात के ऊना में अत्याचार का शिकार हुए दलित परिवार के कई सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक संगठन के मार्च में शामिल होंगे। आरएसएस से जुड़ा संगठन भारतीय बौद्ध संघ पिछले काफी साल से इस इलाके के दलितों की भलाई के लिए काम करता रहा है और ऊना कांड को लेकर एक यात्रा निकालने की तैयारी कर रहा है। भारतीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष संघप्रिय राहुल ने बताया कि ऊना कांड को लेकर देश भर में भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई कि इसके पीछे हिंदू संगठनों का हाथ है। ऊना के पीड़ितों को भी अच्छी तरह पता है कि असली गुनहगार कौन है।

‘ऊना कांड का सच सामने लाएंगे’

यह बात सामने आ चुकी है कि बाकायदा राजनीतिक साजिश के तहत ऊना में गोरक्षा के नाम पर दलित परिवार को टारगेट किया गया था। इस मामले में कुछ स्थानीय कांग्रेसी नेताओं के नाम होने की अटकलें भी लगती रही हैं। यहां तक कि आरोपियों में मुसलमान भी शामिल थे। इसके बावजूद मीडिया की मदद से पूरे देश में ऐसा माहौल बनाया गया मानो गुजरात में दलितों के साथ बड़े पैमाने पर अत्याचार हो रहे हों। अब पूरे देश को सच्चाई बताने के लिए बौद्ध संघ एक यात्रा निकालने जा रहा है, जिसमें दलित बालू सरवैया के परिवार के कम से कम 4 सदस्यों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। ये लोग 10-12 दिन तक यूपी के अलग-अलग शहरों में जाकर बताएंगे कि ऊना में दलितों की पिटाई के पीछे किसकी साजिश थी।

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टारगेट पर रहे हैं गुजरात के दलित

गुजरात के दलित काफी समय से ईसाई मिशनरियों और मुस्लिम संगठनों के टारगेट पर रहे हैं। ऊना में पूरी तैयारी के साथ फर्जी गोरक्षकों से दलित परिवार पर हमला करवाया गया था, जिससे इसके लिए आसानी से आरएसएस और बीजेपी को कसूरवार ठहराया जा सके। हमारी जानकारी के मुताबिक इस घटना के बाद से बालू सरवैया के परिवार का धर्मांतरण कराने के लिए मुस्लिम और ईसाई संगठनों ने संपर्क भी किया था, लेकिन वो किसी के झांसे में नहीं आए।

धर्मांतरण के खिलाफ लड़ाई जारी

ऊना कांड के फौरन बाद दलितों में काफी गुस्सा था। पहले सबने इसे गोरक्षकों की करतूत ही समझा। लेकिन सच्चाई सामने आने के बाद लोगों को साजिश समझते देर नहीं लगी। इस घटना के बाद बीजेपी के दलित सांसदों ने भी मोर्चा संभाल रखा है। खास तौर पर बौद्ध संघ के संरक्षक और पूर्व मंत्री सत्यनारायण जटिया ने इलाके में दलित समुदाय के कई लोगों से बात करके उन्हें समझाया कि दलित भी सनातन धर्म का हिस्सा हैं और यह घटना हिंदुओं को तोड़ने की एक साजिश भर है।
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भारतीय बौद्ध संघ की दलित यात्रा 14 अक्टूबर को दिल्ली के अलीपुर रोड से रवाना होगी और उत्तर प्रदेश के तमाम शहरों और कस्बों में घूमने के बाद 26 मई को गुजरात के जूनागढ़ पहुंचेगी। 14 अक्टूबर को ही बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी।

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