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क्या बंगाल में ‘बगदादी की सरकार’ चला रही हैं ममता?

मुसलमानों के वोट पक्के रखने के लिए ममता बनर्जी लगता है बंगाल में इस्लामी कानून चलाने लगी हैं। यहां तारक बिस्वास नाम के एक ब्लॉगर को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार करके हवालात में ठूंस दिया गया, क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर इस्लाम की आलोचना की थी। ममता की पार्टी तृणमूल के ही एक छुटभैये नेता सनाउल्ला खान ने तारक के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने आधी रात के बाद तारक बिस्वास को उनके घर से कुछ इस तरह से उठाया जैसे किसी खतरनाक आतंकवादी को गिरफ्तार किया जाता है।

अब कहां गई अभिव्यक्ति की आजादी?

जिस देश में हिंदू धर्म, इसकी परंपराओं और देवी-देवताओं का खुलेआम आम बात है, वहां इस्लाम के खिलाफ सोशल मीडिया पर 2-3 लाइनें भर लिख देने से ये कार्रवाई वाकई चौंकाने वाली है। तारक विश्वास पर बंगाल पुलिस ने सारी गैर-जमानती धाराएं लगाई थीं। लिहाजा कोर्ट ने उन्हें 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। उन पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। बात-बात पर अभिव्यक्ति की आजादी के नारे लगाने वाले वामपंथी पत्रकार और नेता इस गिरफ्तारी पर चुप्पी साधे हुए हैं। इस तबके ने पिछले दिनों जेएनयू में जब देशद्रोही नारे लगाए गए थे तो इसी तबके ने इसे बोलने की आजादी करार दिया था और पूरे देश में इसे मामले पर कोहराम मचा दिया गया था। यहां तक कि कन्हैया और उमर खालिद जैसे गद्दारों के लिए कोहराम मचाने वाली मीडिया तारक बिस्वास की गिरफ्तारी की खबर को दबाने में जुटी है। कुछ अखबारों की वेबसाइट्स पर यह खबर जरूर आई है, लेकिन न्यूज चैनलों ने इसे बिल्कुल भी नहीं दिखाया।

जिहाद के रास्ते पर चल रही हैं ममता दीदी!

देश में जिन राज्यों में ISIS का जाल सबसे ज्यादा तेजी से फैल रहा है, बंगाल में उनमें से एक है। इसके पीछे कहीं न कहीं ममता बनर्जी की नीतियों को जिम्मेदार माना जाता है। राज्य विधानसभा चुनाव से पहले यहां कई जगहों पर इस्लामी कट्टरपंथियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए थे। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की साइबर सेल के सर्वे में यह बात सामने आई है कि श्रीनगर, गुवाहाटी और पुणे के चिंचवाड़ के बाद कोलकाता से सटा हावड़ा देश का चौथा ऐसा शहर है जहां 16 से 30 साल के युवक आईएस की वेबसाइट में खासी दिलचस्पी ले रहे हैं। यहां नादिया और मुर्शिदाबाद जिलों में तो बाकायदा आईएसआईएस में भर्ती के लिए हजारों की तादाद में पोस्टर चिपकाए गए थे। इसके बावजूद ममता बनर्जी सरकार ने कभी भी इस्लामी कट्टरपंथियों पर लगाम कसने की कोशिश नहीं की।

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