मोदी ने पाकिस्तान पर हमले की बात कब कही थी?

उरी में आतंकवादी हमले के बाद से नरेंद्र मोदी विरोधियों में मानो खुशी की लहर है। पीएम मोदी ने उन बातों और बयानों के भी जवाब मांगे जा रहे हैं जो उन्होंने कभी कहा ही नहीं। आम लोग ही नहीं, कई बड़े पत्रकारों ने भी सोशल मीडिया पर ऐसी लिंक शेयर किए हैं, जिनके जरिए वो साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी चुनाव से पहले पाकिस्तान पर हमले की बात कहा करते थे। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। जिन बयानों का जिक्र किया जा रहा है उनमें से कई तो पाकिस्तान नहीं, बल्कि किसी और के लिए कहे गए थे। वास्तविकता यह है कि मोदी ने लोकसभा चुनाव के पहले अपने किसी भी भाषण में पाकिस्तान के लिए एक भी आक्रामक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। यहां तक कि वो पाकिस्तान से बराबरी के रिश्ते की वकालत किया करते थे। उनका कहना था कि अगर पाकिस्तान शराफत की भाषा नहीं समझता है तो उसे उसकी भाषा में ही जवाब दिया जाना चाहिए। अगर आप गौर करें तो उस भाषा में पाक को जवाब देने का काम शुरू भी हो चुका है। पाकिस्तान की बौखलाहट का असली कारण यही है।

चुनाव से पहले पाकिस्तान पर मोदी का बयान

लोकसभा चुनाव के दौरान 22 अप्रैल 2014 को एबीपी न्यूज पर प्रसारित इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी से जब पाकिस्तान के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने बेहद संतुलित और नपा-तुला जवाब दिया था। चुनाव से पहले अपने सारे इंटरव्यू में मोदी ने यही जवाब दिया था। उनका एक भी इंटरव्यू या चुनावी भाषण ऐसा नहीं है जिसमें उन्होंने कहा हो कि वो प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान पर हमला बोल देंगे। उन्होंने मर्यादा में रहते हुए हर जगह सिर्फ यही कहा कि पाकिस्तान से अच्छे संबंध चाहते हैं। लेकिन यह काम दबकर नहीं करेंगे। आप खुद सुन लीजिए मोदी का वो बयान।

‘छप्पन इंच का सीना’ मुलायम के लिए कहा था

मोदी को जो उलाहना सबसे ज्यादा दिया जा रहा है वो है ‘छप्पन इंच का सीना’ वाले बयान को लेकर। मीडिया और पत्रकारों के एक बड़े तबके ने हल्के-फुल्के और मज़ाकिया लहजे में दिए इस बयान को पाकिस्तान से जोड़ दिया है। लोकसभा चुनाव से पहले गोरखपुर में अपनी रैली में पीएम मोदी ने यह बात मुलायम सिंह यादव के लिए कही थी। ‘छप्पन इंच का सीना’ एक मुहावरा है, जिसका मतलब वो नहीं होता जो हमारे देश के अंग्रेजी पत्रकार समझते हैं। मोदी ने यह मुहावरा उस रैली के अलावा कहीं और इस्तेमाल भी नहीं किया। लेकिन कांग्रेस प्रायोजित मीडिया ने इसे हमेशा-हमेशा के लिए उनसे चिपका दिया।

‘डूब मरो, डूब मरो’ वाला पूरा बयान सुनिए

पीएम मोदी का यह बयान भी खूब शेयर किया जा रहा है। लेकिन जो लिंक शेयर हो रहा है उसे ऐसे एडिट किया गया है ताकि लगे कि मोदी ने वो बात पाक के संदर्भ में कही है। जबकि यह बात चीन की घुसपैठ पर भारतीय सैनिकों को पीछे हटने के लिए कहने के विरोध में था। हैदराबाद में 11 अगस्त 2013 के इस भाषण में मोदी ने वही बातें कही हैं जो विपक्ष के नेता के तौर पर कही जा सकती हैं। लेकिन काटछांट वाले बयान को आप सुनेंगे तो लगेगा कि मोदी पाकिस्तान पर हमले की वकालत कर रहे हैं।

हरियाणा के रेवाड़ी में अपनी पहली चुनावी रैली में मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान को समझना होगा कि अगर वो शांति के रास्ते पर चलेगा तो इसमें उसकी ही भलाई छिपी है।

मुंबई में 26/11 के हमले के बाद एक रैली में मोदी के बयान में कुछ कड़वाहट जरूर थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को पाकिस्तान की भाषा में जवाब देना चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं निकाला जा सकता कि मोदी यह कह रहे थे कि भारत को पाकिस्तान पर हमला कर देना चाहिए। इस समय तक प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर मोदी का नाम घोषित नहीं हुआ था।

इंडिया टीवी पर पाकिस्तान के बारे में पीएम मोदी का ये बयान भी आज तक खूब शेयर होता रहा है। इसमें मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब देंगे। इस बात का एक छिपा मतलब है जो पाकिस्तान अच्छी तरह समझता है, लेकिन भारत में बैठे पाकिस्तान परस्त इस बात को नजरअंदाज करते हैं।

दरअसल ये वीडियो मोदी विरोधी पत्रकार सोशल मीडिया पर जमकर शेयर कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी वीडियो हैं जिनमें काटछांट है और कुछ वीडियो ऐसे भी हैं जिनमें बात किसी और चीज की ही हो रही है।

क्या हैं मोदी विरोधी पत्रकारों के इरादे?

दरअसल उरी हमले के पहले से ही पाक और उसके समर्थकों के खिलाफ मोदी सरकार का अभियान शुरू हो चुका है। बलूचिस्तान ही नहीं, बल्कि कश्मीर में पिछले दिनों सख्ती भी इसी का हिस्सा है। ऐसे में पाकिस्तानपरस्त पत्रकारों की एक पूरी टोली उरी हमले को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ प्रोपोगेंडा में जुट गई है। उन्हें इस हमले में नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने का मौका नज़र आ रहा है, जबकि उन्हें भी अच्छी तरह पता है कि मोदी सरकार आने के बाद किस तरह से पाकिस्तान लगातार दबाव में है और दुनिया भर में वो आज अलग-थलग पड़ चुका है। ऐसे में मोदी सरकार के कामकाज को लेकर भ्रम फैलाने के लिए ऐसे ही झूठे वीडियो का सहारा है।

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