तय कर लीजिए हमला मोदी पर हुआ है या भारत पर…

deepak-chaubeyकई लोग तालियां बजा बजा कर 56 इंच के सीने की बात उठा रहे हैं तो कुछ लव लेटर लिखने वाला डॉयलॉग दोहरा रहे हैं, यही तो मौका है इन बातों को याद दिलाने का, पर पूछना चाहूंगा मोदी से शुरू और मोदी पर खत्म?

नीतीश कुमार से नहीं पूछा जाना चाहिए कि पांच-पांच लाख जो दे रहे हैं बचा के रखिए, अभी इशरत को इंसाफ दिलाना बाकी है उसमें काम आएंगे? इशरत लश्कर की थी ये जैश के थे, कुनबा तो वही है। कांग्रेस से नहीं पूछा जाना चाहिए अगर जैश की पैदाइश कंधार से हुई तो घुसपैठ की शुरुआत ही हाजीपीर से हुई, उसे क्यों दे दिए थे? दो दशक से कश्मीर मे सेना क्या कर रही थी?

क्यों ना इसे मणिशंकर अय्यर और सलमान खुर्शीद की पाकिस्तान से मांगी गई मदद माना जाए, जो मोदी सरकार पलटने के लिए है? कन्हैया और उसके समस्त शुक्राचार्य आकर आजादी का मतलब अभी क्यों नहीं समझा देते? आजादी को री-डिफाइन करने वाले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्यों नहीं करते? बताइए देंगे कश्मीर को आजादी?

सबसे पहले ये तय कर लीजिए कि हमला मोदी पर हुआ कि इंडिया पर। अगर मोदी पर मानते हैं तो जाकर जश्न मनाइए और अगर हमला देश के खिलाफ हैं तो भगवान के लिए चुप हो जाइए, जिसे और जिस तरीके से ये काम करना है वो करेगा, आपको क्या लगता है इस देश में कोई सेना कोई सिस्टम नहीं है? और सबकुछ सिर्फ फेसबुक व्हाट्सएप और ट्टविटर के दम पर चल रहा है? क्या पाकिस्तान या किसी देश को लेकर नीतियां सिर्फ एक नेता की निजी सोच और फैसले पर टिकी होती है? पाकिस्तान देश के पीएम का पर्सनल प्रॉब्लम नहीं है। कोई जरूरी नहीं कि हर बात में राजनीति की जाए, कसर निकालनी है तो साल भर में यूपी, पंजाब गुजरात कई मौके हैं, दम है तो दिखा दीजिए। कुछ लोगों की मुख मुद्राएं और भंगिमाए आज तक वही हैं जो 2014 चुनावों के पहले थी, यानी मोदी जीतेगा या हारेगा? उसके बाद तय करेंगे कि पीएम हैं या नहीं, उस भ्रम से बाहर निकलिए।

पसंद हो या नापसंद 2019 से पहले कोई रास्ता नहीं है और वही शख्स आपके देश का प्रधानमंत्री है, फैसले वही लेगा और फिलहाल दुनिया में भारत की पहचान भी वही है। राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को मिलाकर मुरब्बा मत बनाइए।

(दीपक चौबे एनडीटीवी के पत्रकार हैं। यह लेख उनके फेसबुक पोस्ट से साभार लिया गया है।)

नीचे पाकिस्तान के बारे में मोदी का वो बयान आप सुन सकते हैं, जिस पर आज वो चल रहे हैं। यह बयान लोकसभा चुनाव से पहले का है।

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