‘युद्धोन्माद मत फैलाएं, देश की सरकार पर यकीन रखें

सुशील बहुगुणा

सुशील बहुगुणा

हर कोई इंतक़ाम की आग में सुलग रहा है. टीवी पर बाल बिखऱा कर देश की चिंता में घुल रहे पत्रकारों, हाथ उठा-उठा कर युद्ध का आहवान कर रहे रक्षा जानकारों की अब चिंता हो रही है. टीवी पर चल रही कुछ बहसें सुनिए, गारंटी देता हूं आपका ब्लड प्रेशर बढ़ जाएगा, लगेगा देश की रक्षा में आप ही सबसे पीछे रह गए हैं. होगा, ज़रूर होगा. जवाब मिलेगा, लेकिन उसकी तीव्रता, तीक्ष्णता और समय सरकार के शीर्ष पदों पर बैठे रणनीतिकारों पर छोड़ दीजिए. उन पर यकीन कीजिए.

तब तक देश की उस जनता की सोचिए जो किसी भी विभीषिका का पहला ग्रास बनती है. जिसकी ज़िंदगी में हर रोज़ युद्ध ही चलता है, दो जून की रोटी का जुगाड़ करने से लेकर बच्चों को पढ़ाने और अपनी छोटी-छोटी हसरतों को पूरा करने में. ये युद्ध उन पर हमने, आपने थोपा है. सोचिए शहीद हुए जवानों की पत्नियों, बच्चों पर क्या गुज़र रही होगी. क्या छह महीने बाद हमें-आपको उनकी याद रहेगी, जब सरकारी दफ़्तरों में विधवा पेंशन, स्कूलों में बच्चों के एडमिशन, अस्पताल में इलाज के लिए वो भटक रहे होंगे. सत्तर फीसदी हिंदुस्तान तो ये सब भी नहीं सोच सकता.

इसलिए युद्धोन्माद मत फैलाइए जो देश को अवसाद में धकेल देगा. आतंक फैलाने वालों से साम-दाम-दंड-भेद से निपटना ज़रूरी है लेकिन समय सरकार को ही चुनने दीजिए. लेट कट से भी गेंद बाउंड्री पार जाती है. हाफ़ वॉली में गेंद खेलने के चक्कर में कहीं कैच आउट ना हो जाएं.

(यह लेख एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार सुशील बहुगुणा के फेसबुक पोस्ट से ली गई है।)

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