‘माफ कीजिए… मैं बकरीद मुबारक नहीं बोल सकता’

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मेरे एक प्रिय मुस्लिम भाई ने शिकायत की कि देश-दुनिया के मुद्दों पर तो आप ख़ूब लिखते हैं, लेकिन हमें बकरीद की शुभकामनाएं तक नहीं दीं। क्या आप मुसलमानों को अपना भाई-बहन नहीं मानते? मुझे लगा कि यह एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब मुझे सार्वजनिक रूप से देना चाहिए, क्योंकि इससे मुझे समाज, सियासत और धर्म में व्याप्त बुराइयों पर चोट करने में मदद मिलेगी।
इस शिकायत में दो सवाल हैं। पहला- मैंने मुस्लिम भाइयों-बहनों को बकरीद की शुभकामनाएं क्यों नहीं दीं? दूसरा- क्या मुसलमानों को मैं अपना भाई-बहन नहीं मानता?

तो मित्रो, पहले दूसरे सवाल का जवाब। मैं कोई शातिर सांप्रदायिक नेता तो हूं नहीं, जो हर ग़लत-सही बात पर आपका “तुष्टीकरण” करने में लगा रहूं। मैं आपका वास्तविक “पुष्टीकरण” चाहता हूं और इसीलिए आपको अक्सर वह कड़वा डोज़ देने से भी नहीं हिचकता, जो एक सच्चे भाई या मित्र को देना चाहिए। मैं आम मुसलमानों को सगे भाई-बहनों की तरह मानता हूं, लेकिन आपके ठेकेदारों से मेरा तगड़ा विरोध है।
एक तबका है, आपके फूहड़-अज्ञानी धर्मगुरुओं का, जो आपको धर्मांध और कट्टर बनाना चाहता है, सोच और संस्कार के स्तर पर चौदहवीं शताब्दी में ढकेलना चाहता है, आपमें हिंसा और नफ़रत के बीज बोना चाहता है, अल्लाह और कुरान का भय दिखाकर बदलती हुई दुनिया के साथ बदलने से आपको रोकना चाहता है। मैं आपके जाकिर जैसे “खलनाइकों” का विरोध करता हूं और आपको गलतफहमी हो जाती है कि मैं मुसलमानों का विरोधी हो चला हूं।

एक दूसरा तबका है, जो आपको इंसान समझता ही नहीं, अपना बपौती वोट बैंक समझता है। आप उसके हाथ से छिटक न जाएं, इसके लिए आपको तरह-तरह से गुमराह करता है, बरगलाता है, डराता है, आपमें असुरक्षा की भावना भरने और आपको सच्चाई से दूर रखने में जुटा रहता है। ये ऐसे शातिर लोग हैं, जो पिछले 70 साल से आपको मूर्ख बना रहे हैं और आप भी इतने समझदार हैं कि बन रहे हैं।
कोई भी व्यक्ति, संस्था, राजनीतिक दल या सरकार, जो आपके आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिए दिल से काम करे, उसे मेरा पूरा समर्थन रहेगा। जब एक प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है, तो मैंने इस बात का विरोध नहीं किया कि उसने ऐसा क्यों कहा, बल्कि मैंने इस बात का विरोध किया कि अगर तुम ऐसा कहते हो, तो करते क्यों नहीं? साठ साल से तुमने इन्हें गंदगी, गरीबी और ज़हालत के जहन्नुम में क्यों ढकेल रखा है? सच्चर कमीशन की रिपोर्ट तुमने ठंडे बस्ते में क्यों डाल दी?

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