जानिए फ्लैक्सी किराया के पीछे क्या है असली वजह!

राजधानी, शताब्दी और दुरंतो एक्सप्रेस में फ्लैक्सी किराये के सिस्टम को लेकर विवाद के बीच पहली बार रेलवे ने सफाई दी है। दरअसल रेलवे ने इस सिस्टम के तहत पहले दो दिन की बुकिंग के ट्रेंड्स जारी किए हैं। इनके मुताबिक इस सिस्टम के बावजूद आम यात्रियों पर बहुत बोझ नहीं पड़ेगा। देश में हर दिन कुल 3200 मेल और एक्सप्रेस गाड़ियां चलती हैं, जिनमें से सिर्फ 72 जोड़ी गाड़ियों के टिकटों पर यह सिस्टम लागू किया गया है। राजधानी, शताब्दी और दुरंतो गाड़ियों के टिकट पहले से ही महंगे हैं और इनमें ज्यादातर वो लोग चलते हैं जो महंगे टिकट अफोर्ड कर सकते हैं। यह साफ है कि सरकार ने फ्लैक्सी किराये से सिर्फ अमीरों को टारगेट किया है, ताकि आम लोगों पर बोझ न डालना पड़े। यह बात पहले ही साफ की जा चुकी है कि बाकी एक्सप्रेस गाड़ियों में फ्लैक्सी किराया लागू नहीं होगा।

बाकी ट्रेनों में किराया बढ़ाने का दबाव नहीं रहेगा!

9 और 10 सितंबर के दिन शताब्दी, राजधानी और दुरंतो ट्रेनों में 21000 और 29000 टिकट बुक किये गए। दोनों दिन 2700 और 3000 यात्रियों ने फ्लैक्सी फेयर सिस्टम के तहत अधिकतम किराया चुकाया। इससे औसतन 80 लाख रुपये प्रतिदिन की आमदनी बढ़ी है। इस तरह अगले एक साल में रेलवे को तकरीबन 1000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी। इस तरह बाकी ट्रेनों में चलने वाले आम यात्रियों का किराया बढ़ाने का दबाव कम होगा। साथ ही इस रकम को यात्री सुविधाओं में सुधार पर भी खर्च किया जाएगा। फ्लैक्सी किरायों के बावजूद सीनियर सिटिजन, खिलाड़ियों, बीमार लोगों जैसी कैटेगरी में मिलने वाली छूटें जारी रहेंगी।

फ्लैक्सी रेल किराये को लेकर भ्रम फैलाया गया

फ्लैक्सी किराया जिन गाड़ियों में लागू किया गया है उनमें रोज सिर्फ डेढ़ लाख लोग सफर करते हैं। यह कुल रेल यात्रियों की संख्या का मात्र एक फीसदी है, जबकि रिजर्वेशन लेकर चलने वाले यात्रियों के 7 फीसदी के आसपास है। मीडिया ने 10 फीसदी टिकट बिकने के बाद दाम बढ़ने को सर्ज प्राइसिंग का नाम दे दिया था। जबकि सर्ज प्राइसिंग डिमांड बढ़ने पर लागू होती है। फ्लैक्सी किराये के बढ़ने का एक तय फॉर्मूला है, जिसमें यात्री के पास विकल्प रहेगा कि वो पहले से यात्रा की प्लानिंग करके सामान्य किराया ही चुकाए। कुल मिलाकर बढ़ा किराया सिर्फ 0.16 फीसदी यात्रियों के लिए है और ये भी ऐसे यात्री, जिनकी क्षमता हवाई जहाज से सफर करने की भी होती है। इस फॉर्मूले का दूसरा बड़ा फायदा यह होगा कि इससे रिजर्व टिकटों पर से दलालों का कब्जा कम होगा।

फ्लैक्सी किराया फॉर्मूले की समीक्षा करेगी रेलवे

साथ ही रेलवे ने यह भरोसा भी दिलाया है कि आगे चलकर इस फॉर्मूले के फायदे और नुकसान की समीक्षा भी की जाएगी। इसके अलावा रेलवे एयरलाइंस की तर्ज पर फ्रीक्वेंट ट्रैवेलर इनसेंटिव भी देने वाली है। मतलब ये कि जो लोग बार-बार रेलवे की यात्रा करते हैं उन्हें कुछ डिस्काउंट दिया जाएगा। साथ ही आखिरी वक्त में बाकी बची सीटों के लिए लास्ट मिनट डिस्काउंट जैसी स्कीम भी जल्द लॉन्च होने वाली है।

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

comments

Tags: ,