जानिए ‘मोदी जी काम नहीं करने दे रहे’ का सच

सौजन्य- इंडियन एक्सप्रेस

नरेंद्र मोदी पर अरविंद केजरीवाल का सबसे बड़ा आरोप यही है कि वो उन्हें काम नहीं करने देते। केंद्र सरकार एलजी के जरिए दिल्ली सरकार के रोजमर्रा के फैसलों में टांग अड़ाती है और अफसरों को डराती-धमकाती है। लेकिन तथ्य केजरीवाल के इन दावों के बिल्कुल उलट हैं। दिल्ली सरकार के एक बड़े अधिकारी से हमने इन आरोपों के बारे में पूछा। जो जवाब मिले वो चौंकाने वाले हैं। इन अधिकारी के अनुरोध पर हम उनकी पहचान जाहिर नहीं कर रहे हैं।

‘केजरीवाल को नियम-कायदों की परवाह नहीं’

सीएम के तौर पर केजरीवाल के पास तमाम अधिकार हैं, लेकिन उनकी कुछ मर्यादाएं भी हैं। लेकिन केजरीवाल इनकी परवाह नहीं करते। यहां तक कि वो अपने चीफ सेक्रेटरी को भी नजरअंदाज करके ट्रांसफर और पोस्टिंग के फैसले लेते हैं। ये और ऐसे तमाम कामों के लिए तय नियम कायदे हैं, लेकिन केजरीवाल को न तो उन्हें मानते हैं और न ही उनके बारे में जानना चाहते हैं। अपने दफ्तर के कई अफसरों को वो नियम बताने के लिए फटकार भी लगा चुके हैं। केजरीवाल जिस तरह से हर छोटे-बड़े फैसलों अपना नियंत्रण रखते हैं अगर सरकारी कामकाज या प्रशासनिक काबिलियत में कोई चूक होती है तो इसके लिए केजरीवाल को ही जिम्मेदार माना जाना चाहिए।

‘केंद्र पर बदले की राजनीति के आरोप गलत’

केजरीवाल यह कहना कभी नहीं भूलते कि केंद्र की मोदी सरकार बदले की राजनीति के तहत उनके अफसरों को परेशान कर रही है। लेकिन दिल्ली सरकार के ही बड़े अधिकारी मानते हैं कि अब तक विवाद के जो भी मामले हुए हैं, उनमें गलती केजरीवाल सरकार की ही थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय डैनिक्स (DANICS) अधिकारियों की कैडर-कंट्रोलिंग अथॉरिटी है। उनकी जिम्मेदारी होती है कि अफसरों की नियुक्ति और तबादलों में तय नियम-कायदों का पालन हो। जब ऐसा नहीं होता तो स्वाभाविक रूप से वो फैसला रद्द हो जाता है। डैनिक्स अधिकारियों के लिए सेवा की एक जरूरी शर्त यह है कि उन्हें कैडर के सभी सेगमेंट्स में काम करना होगा और हर पोस्टिंग में कम से कम 2 साल की सर्विस पूरी करनी होगी। जिन 11 अफसरों के तबादले किए गए हैं वो इन्हीं नियमों के हिसाब से हुए हैं।

‘सुपीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स के शिकार हैं केजरीवाल’

दिल्ली के अफसरों के ट्रांसफर जब अंडमान किए गए तो केजरीवाल ने कहा कि उन्हें सज़ा (पनिशमेंट पोस्टिंग) दी जा रही है। डैनिक्स सर्विस बनी ही दिल्ली और अंडमान निकोबार के प्रशासनिक अफसरों के लिए है। ऐसे में अंडमान को पनिशनमेंट पोस्टिंग कहने का मतलब है कि केजरीवाल दिल्ली के मुकाबले देश के बाकी राज्यों को कमतर मानते हैं।

‘ईमानदार अफसरों को चुन-चुनकर किनारे किया’

करप्शन के खिलाफ तथाकथित लड़ाई लड़ने वाले अरविंद केजरीवाल आज दिल्ली में सबसे बदनाम अधिकारियों के हितैषी बनकर उभरे हैं। राजेंद्र कुमार को बचाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री तक को गाली दे डाली थी। अब जब सीबीआई ने कोर्ट में राजेंद्र कुमार के खिलाफ पक्के सबूत रख दिए तो केजरीवाल ने कह दिया कि मुझे पता नहीं था। कुछ ऐसी ही कहानी उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के सचिव सी. अरविंद की है। उन्होंने DSIIDC में रहते हुए कई ऐसे सौदे किए हैं, जो पहली नज़र में ही करप्शन माने जाएंगे। दूसरी तरफ केजरीवाल सरकार ने कुलदीप सिंह गंगर, आशीष जोशी जैसे अफसरों को परेशान किया। आशीष जोशी को साइडलाइन करने की बड़ी वजह बताई जाती है कि उन्होंने केजरीवाल के करीबी राजेंद्र कुमार के भ्रष्टाचार की जानकारी सामने ला दी थी। इनमें से ज्यादातर आरोप सही साबित हुए हैं, इसके बावजूद आशीष जोशी आज भी केजरीवाल के दुश्मन नंबर 1 बने हुए हैं।

‘केजरीवाल खुद नहीं होने दे रहे सरकारी काम’

दिल्ली सरकार के इन अफसर ने हमें बताया कि केंद्र सरकार कुछ एक मामलों को छोड़कर ज्यादातर सरकारी फैसलों और काम में रुकावट नहीं डाल सकती। इसके बावजूद केजरीवाल सरकार हर मुद्दे पर केंद्र सरकार या एलजी को लपेट लेती है। शायद इसलिए ताकि अपनी नाकामी का ठीकरा केंद्र पर फोड़ सके। ऐसे कई आईएएस और डैनिक्स अफसर हैं जिनके ट्रांसफर अंडमान से दिल्ली हुए हैं। उनके पास कोई काम नहीं है। केजरीवाल सरकार उन्हें काम नहीं दे रही है क्योंकि उन्हें सिर्फ वही लोग पसंद हैं जो उनकी जी-हुजूरी कर सकें। यह भी सरकारी पैसे की बर्बादी ही माना जाएगा कि बड़ी संख्या में अफसर खाली बैठकर सैलरी ले रहे हैं और केजरीवाल उन्हें पद या कोई जिम्मेदारी देने को तैयार नहीं है।

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