‘सुनीता केजरीवाल बहनजी, अपने पति को समझाओ’

दिल्ली अरविंद केजरीवाल सरकार आने के बाद गली-गली खुल चुके शराब के ठेकों के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इनसे परेशान सैकड़ों महिलाएं कल मुख्यमंत्री आवास पर उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल से मिलने पहुंचीं। अरविंद केजरीवाल की पत्नी इन महिलाओं की फरियाद सुनने नहीं आईं और कहलवा दिया कि मैडम घर पर नहीं हैं। इसके बाद महिलाओं ने एक चिट्ठी लिखकर सीएम दफ्तर में जमा किया। यह चिट्ठी न्यूज़लूज़ के हाथ लगी है।

आम औरतों की चिट्ठी सीएम की बीवी के नाम

नमस्ते सुनीता बहनजी,
हम दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से आई आम औरतें हैं। बहुत परेशानी में हैं। डरे, सहमे और घबराये हुए हैं। डर हमें अपने सम्मान और सुरक्षा के लिए है। घबराहट अपने बच्चों के भविष्य के लिए है। और सहमे हुए इसलिए हैं कि हमारा जीना दूभर हो गया है। हम लोग अपने इलाकों में खुले शराब के ठेकों से त्रस्त हैं। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी आपके पति की सरकार ने हमारे इलाके में शराब का ठेका खोल दिया है। जिसके कारण छीनाझपटी, छेड़खानी, अश्लील हरकतों से लेकर मारपीट तक की घटनाएं आम बात हो गई हैं।

बच्चे को स्कूल छोड़ने के लिए अलग रास्ता लेना पड़ता है। शाम होते ही गली से गुजरना नामुमकिन हो गया है। कुछ इलाकों में तो दारू बीयर की बोतलें घरों के पास फेंकी मिलती हैं। हममें से कई बहनों के पति रोज़ रात को नशे में घर लौटते हैं, मारपीट गाली-गलौज करते हैं। बता नहीं सकते किस-किस तरह की समस्याओं का सामना हमें करना पड़ रहा है।

अपनी परेशानी को लेकर हमने सभी दरवाज़े खटखटा लिए। विधायक, अधिकारी से लेकर बड़े नेता-मंत्रियों तक सबके आगे गुहार लगाई। लेकिन हमारी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं मिली, समस्याओं का कोई समाधान नहीं मिला।

आपसे मिलने का कारण ये है कि आपमें हमें एक उम्मीद दिखी। आप भी हमारी तरह एक सरल महिला हैं, गृहणी हैं। आपका भी एक परिवार है, बच्चे हैं। आप शायद हम महिलाओं का दर्द समझ पाएंगी।

हमारा बस एक निवेदन है आपसे। यदि संभव हो तो अरविंद जी से हमारी पैरवी कर दें। शायद वो हमारी परेशानी नहीं समझ पा रहे, वरना डेढ़ साल में ही दिल्ली में 399 नए शराब के लाइसेंस नहीं बाँटते। शायद वो समझ नहीं पा रहे कि शराब के नशे को धंधा बनाकर पैसे कमाना कोई अच्छी बात नहीं। आप बात करेंगी तो वो ज़रूर समझेंगे।

हमने तो अरविंद जी की बातों पर भरोसा करके ही उन्हें वोट दिया था। उन्होंने कहा था कि हमसे पूछे बिना कोई दारू का ठेका नहीं खुलेगा। लेकिन ठीक इसके उलट हुआ है हमारे इलाके में। स्वराज का वादा किया गया था, लेकिन शराब का ठेका थमा दिया गया है।

शायद आपके समझाने से हमारे इलाके में खुला दारू का ठेका बंद कर दिया जाए। आपसे उम्मीद है। आप ही अरविंद जी को कुछ समझ और सदबुद्धि दे सकती हैं।

 

स्नेहपूर्ण अभिवादन
आपकी बहनें

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