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मीडिया ने प्रियंका के ननदोई से भी वफादारी निभाई!

कहते हैं कि दिल्ली की मीडिया का एक बड़ा तबका आज भी गांधी परिवार के साथ अपनी वफादारी निभा रहा है। लगता है कि ये वफादारी गांधी परिवार ही नहीं, बल्कि वाड्रा परिवार के लिए भी उतनी ही है। यही वजह है कि जैन मुनि तरुण सागर के खिलाफ भद्दी टिप्पणी करने वाले विशाल डडलानी की तो चैनलों और अखबारों ने खूब खिंचाई की, लेकिन तहसीन पूनावाला का जिक्र गायब ही रहा। हो सकता है कि कांग्रेस के इस प्रवक्ता को आम लोग नहीं जानते हों, लेकिन मीडिया अच्छी तरह जानती है कि तहसीन पूनावाला प्रियंका वाड्रा का ननदोई है। तहसीन पूनावाला इससे पहले भी सोशल मीडिया पर देश और हिंदू धर्म के खिलाफ लिखता रहा है।

मीडिया ने तहसीन का नाम छिपाया क्यों?

विशाल डडलानी और तहसीन पूनावाला के ट्वीट पर सोशल मीडिया पर हंगामा मचा हुआ था। इसके करीब 24 घंटे के बाद चैनलों पर विशाल डडलानी का नाम चलना शुरू हुआ। वो भी खबर के साथ अरविंद केजरीवाल के बयान के साथ। लेकिन तहसीन पूनावाला का नाम लेने में भी चैनलों को झिझक हो रही थी। ज्यादातर चैनलों और अखबारों ने तो तसहीन पूनावाला का नाम तक नहीं बताया। अगर आपको इस बात पर भरोसा नहीं है तो खुद गूगल पर ये दोनों नाम अलग-अलग सर्च कर लें। पता चल जाएगा कि कई अखबारों और चैनलों ने तो अपनी खबरों में तहसीन पूनावाला का जिक्र भी नहीं किया।

कौन है तहसीन पूनावाला?

तहसीन पूनावाला और मोनिका वाड्रा की शादी के वक्त की एक फैमिली फोटो। इसमें प्रियंका वाड्रा और उनकी बेटी को भी देखा जा सकता है। Courtesy: Indian Express
तहसीन पूनावाला और मोनिका वाड्रा की शादी के वक्त की एक फैमिली फोटो। इसमें प्रियंका वाड्रा और उनकी बेटी को भी देखा जा सकता है। Courtesy: Indian Express

दरअसल तहसीन पूनावाला गांधी-वाड्रा परिवार का मेंबर है। तहसीन ने रॉबर्ट वाड्रा की बहन और प्रियंका वाड्रा की ननद मोनिका वाड्रा से शादी की है। टीवी चैनलों पर वो अक्सर कांग्रेस के प्रवक्ता की तरह दिखाई देता रहता है। आम तौर पर उसकी बातें और बयान अजीबोगरीब किस्म के होते हैं। बिल्कुल उतने अजीब जितने अजीब वो ट्वीट्स करता है। पिछले साल सितंबर में उसने भगवान गणेश के नाम पर यह अपमानजनक ट्वीट किया था। तब सोशल मीडिया पर थोड़ा बहुत हंगामा हुआ था, लेकिन बात दब गई थी।

दरअसल तहसीन पूनावाला की ये जिहादी हरकतें पुरानी हैं। वो खुद को नास्तिक बताता है, लेकिन उसे जानने वालों के मुताबिक वो एक कट्टर मुसलमान है। आज तक उसे कभी भी इस्लाम या उसके त्योहारों के खिलाफ कुछ भी बोलते नहीं देखा गया है। जबकि पिछले साल रक्षाबंधन पर उसने यह ट्वीट किया था।

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इस साल 14 फरवरी की रात मुंबई में मेक इन इंडिया के प्रोग्राम के दौरान जब मंच में आग लग गई थी तो तहसीन पूनावाला बहुत खुश हो गया था। उसने ट्विटर पर अपनी खुशी जाहिर भी की थी। उसके लिए उसे देश भर से गालियां पड़ी थीं। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने अपने दामाद के दामाद को कभी ऐसी हरकतें करने के लिए मना नहीं किया।

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हिंदू धर्म और देश के अलावा तहसीन पूनावाला के टारगेट पर सुभाषचंद्र बोस भी रहे हैं। पिछले साल 14 अक्टूबर को उसने ये ट्वीट करके आजादी की लड़ाई में बोस के योगदान पर सवाल खड़े किए थे।
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ऐसे में यह सवाल तो उठेगा ही कि विशाल डडलानी को लेकर मीडिया में हंगामा मचा, लेकिन लगभग उसी अपराध के लिए तहसीन पूनावाला को क्यों बख्श दिया गया। क्या कोई पुरानी वफादारी थी या किसी किस्म का दबाव, जो कई चैनलों और अखबारों ने उसके नाम का जिक्र तक जरूरी नहीं समझा। क्योंकि राजनीति के हिसाब से विशाल डडलानी के मुकाबले तहसीन पूनावाला का कद कहीं ज्यादा बड़ा माना जाएगा।

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