केजरीवालजी, आप मोहल्ला क्लीनिक क्यों नहीं जाते?

 

आशीष कुमार

आशीष कुमार

दिल्ली के स्वयंभू प्रधानमंत्री अरविंद केजरीवाल जी के नाम एक ओपन लेटर

सर, सुबह अखबार में पढ़ा कि दिल्ली को मझधार में छोड़ आप एक बार फिर से बैंगलोर रवाना हो गए हैं। यह भी सुना कि इस बार आप अपने कांग्रेसी आका नवीन जिंदल के आयुर्वेदिक अस्पताल में नहीं, बल्कि किसी एलोपैथी अस्पताल में गए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि इस अस्पताल में पुरानी या कुकुर खांसी का कोई ऐसा एक्सपर्ट भी नहीं है जो दिल्ली में न हो। फिर भी अगर आप इलाज कराने बैंगलोर गए हैं तो कुछ न कुछ जरूर सोचा होगा।

वैसे दिल्ली में तो इन दिनों हेल्थ सेक्टर में बहार आई हुई है। आपकी सरकार के सबसे काबिल मिनिस्टर सत्येंद्र जैन, जो बोलते हैं तो मुंह से इतना थूक फेंकते हैं कि टीवी वालों को अपना माइक भी धोना पड़ जाता है, ने गली-गली में मोहल्ला क्लीनिक खुलवा ही दिया है। वो मोहल्ला क्लीनिक जिसकी चर्चा देश-विदेश में है। देश में तो आप वैसे ही अखबारों को पैसा देकर विज्ञापन छपवा लेते हो। लेकिन ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ में मोहल्ला क्लीनिक की तारीफ छपवाने के लिए उनके रिपोर्टर की अलग से आवाभगत करनी पड़ी थी। बताते हैं कि लास्ट टाइम आपने ऐसी बख्शीश दे दी कि उन्होंने आपके मोहल्ला क्लीनिकों को अमेरिका के पूरे हेल्थ सिस्टम पर भारी बता दिया था। यह तक कह डाला था कि अमेरिका के अस्पतालों को चाहिए कि वो मोहल्ला क्लीनिक से सबक लें। हमें पक्का उम्मीद है कि एक दिन ओबामा जी तक वॉशिंगटन पोस्ट की यह बात पहुंचेगी और वो वहां के कबाड़ अस्पतालों को बंद करवाकर आपकी तरह मोहल्ला क्लीनिक खुलवाएंगे।

खैर, मुद्दे पर लौटते हैं। हमारे देश में बीमार व्यक्ति को हर कोई सलाह देना पसंद करता है। आप भी बीमार हो। कोई कहता है कि बीमारी मानसिक है कोई कहता है जिस्मानी है। मुझे नहीं पता कि सच क्या है, लेकिन लगे हाथ एक सलाह मैं भी दे देता हूं। आप मोहल्ला क्लीनिक में क्यों नहीं दिखाते? कम से कम सर्दी खांसी और जुकाम का इलाज तो वहां पर पक्का हो जाएगा। फिर आप बैंगलोर जाकर क्यों टाइम वेस्ट कर रहे हो।

कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको अच्छे से पता है कि दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों के नीम हकीम टाइप डॉक्टरों के इलाज से अब तक कितने केस खराब हो चुके हैं। आपको ये भी पता है कि इन क्लीनिकों में ज्यादातर वो डॉक्टर हैं जिनके पास प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की कृपा से डिग्री तो है, लेकिन डॉक्टरी का हुनर नहीं है। वो हर बीमारी में वही दवाई लिख देते हैं। गरीब मरीज खुश हो जाता है कि बिना पैसे के दवा मिल गई। मर जाए तो अपनी किस्मत को कोस लेता है।

असल में आप ही नहीं, दिल्ली का हर पढ़ा-आदमी जानता है कि मोहल्ला क्लीनिक के नाम पर आप झुग्गियों में रहने वाले अनपढ़ गरीबों की जिंदगी से क्या खिलवाड़ कर रहे हो। सबको पता है कि मोहल्ला क्लीनिक इलाज के लिए नहीं पहले ही जान ले लेने का इंतजाम है। किसी को बताने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कानून के मुताबिक दवाएं देने के लिए फार्मासिस्ट रखे जाते हैं। लेकिन आपने यह काम मशीनों को सौंप दिया। बटन दबाओ दवाई बाहर। लेकिन मीडिया इन क्लीनिकों की वजह से आए दिन हो रही मौत की खबरें नहीं दिखाती। क्योंकि उसका भी ‘कट’ शायद आपने तय कर रखा है। अनपढ़ गरीब का क्या है, उन्हें तो वैसे भी मरना ही है… अच्छा है कि आपकी दवाइयां खाकर मर रहे हैं।

फिर भी उम्मीद करता हूं कि पब्लिसिटी के लिए ही सही आप और आपके विधायक आगे से अपना इलाज मोहल्ला क्लीनिकों में ही करवाएंगे। अगर आपको वहां इलाज कराने से मोदी जी या एलजी साहब रोकते हैं तो हमें बताइएगा… हम उनकी ईंट से ईंट बजा देंगे।

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