जब रात 10 बजे पीएम ने सीधे डीएम को फोन किया!

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि देश का प्रधानमंत्री किसी जिले के डीएम को फोन करे और वो भी रात 10 बजे। यह बात एकदम सच है और जिस डीएम को फोन किया गया था उन्होंने इस घटना के कुछ वक्त बाद किसी दूसरे शख्स ने सोशल मीडिया पर यह बात शेयर की। घटना की जानकारी देने वाले ने उस आईएएस अफसर का नाम नहीं लिखा है जिसे पीएम नरेंद्र मोदी ने रात 10 बजे फोन किया। लेकिन बताया जा रहा है कि ये अफसर हैं नॉर्थ त्रिपुरा के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट संदीप महात्मे।

प्रधानमंत्री ने क्यों किया डीएम को फोन?

दरअसल पिछले महीने मीडिया में खबर आई थी कि नेशनल हाइवे-208 की खराब हालत की वजह से त्रिपुरा में जरूरी सामान और तेल की सप्लाई ठप हो गई है। इसकी वजह से चीजों की कीमतें आसमान में पहुंच गई हैं। यह हाइवे त्रिपुरा को बाकी देश से जोड़ता है। जब मामला पीएम मोदी को पता चला तो उन्होंने 21 जुलाई को रात 10 बजे सीधे डीएम संदीप महात्मे को फोन मिलवा दिया। फोन करने वाले ने जब कहा कि प्रधानमंत्री जी आपसे बात करना चाहते हैं तो वो डीएम का दिमाग सन्न रह गया। सोशल मीडिया की पोस्ट के मुताबिक उनके पैर बुरी तरह कांपने लगे थे। कुछ सेकेंड में ही कॉल ट्रांसफर हो गई और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी थे।

देर रात फोन करने के लिए माफी मांगी

पोस्ट लिखने वाले ने डीएम के हवाले से बताया है कि बातचीत शुरू करने से पहले प्रधानमंत्री ने उनसे इतनी देर रात में फोन करने के लिए माफी मांगी। फिर कहा कि काम जरूरी है इसलिए इस वक्त कॉल किया है। फिर उन्होंने हाइवे के बारे में पूछा और यह भी पूछा कि इसे ठीक करने के लिए क्या करना होगा। मोदी ने बताया कि मैंने असम और त्रिपुरा के अधिकारियों से भी बात कर ली है और सड़क की मरम्मत के लिए जो भी जरूरत है वो मिल जाएगा। उसके बाद डीएम रात भर सो नहीं पाए।

अगले दिन से ही काम शुरू हो गया

अगली सुबह डीएम जब अपने दफ्तर पहुंचे तो त्रिपुरा सरकार, असम सरकार और केंद्रीय ट्रांसपोर्ट मंत्रालय के अधिकारियों के फोन आने शुरू हो गए। 15 किलोमीटर के खराब हिस्से के लिए फंड जारी हो चुका था। डीएम इसके फौरन बाद अपने कुछ अधिकारियों के साथ हाइवे पर पहुंच गए। वहां उन्होंने देखा कि असम सरकार की ओर से भीजे गई 6 जेसीबी मशीनें काम शुरू भी कर चुकी थीं। 300 ट्रकों से अगले चार दिन तक पत्थरों, ईंटों और सीमेंट की सप्लाई हुई। लोकल मजदूरों की मदद से त्रिपुरा के पीडब्लूडी विभाग के इंजीनियरों ने चार दिन के अंदर सड़क खुलवा दी। इसके बाद त्रिपुरा में जरूरी सामान के लिए मचा हाहाकार खत्म हो गया।

बिना किसी शोर-शराबे चुपचाप काम

प्रधानमंत्री ने सभी एजेंसियों को आपस में मिलवा दिया था और डीएम को खुद फोन करके कामकाज की देखरेख की जिम्मेदारी सौंप दी थी। युद्ध स्तर पर हाइवे को ठीक भी कर दिया गया, लेकिन मीडिया में यह बात नहीं आने पाई। 31 जुलाई तक हाइवे पर ट्रैफिक पूरी तरह नॉर्मल हो गया। तब कुछ अखबारों में सिर्फ यह खबर छपी कि सड़क ठीक होने से सामान सप्लाई का काम ठीक हो गया है। डीएम संदीप महात्मे ने भी इस बारे में कुछ नहीं बताया कि यह काम कैसे हुआ है। उन्होंने कहीं भी पीएम से हुई अपनी बातचीत की पुष्टि या खंडन नहीं किया है। महात्मे ने फेसबुक पर सिर्फ एक पोस्ट लिखकर यह बताया कि

“नॉर्थ त्रिपुरा की हमारी टीम ने बहुत अच्छा काम किया है। हमने नेशनल हाइवे 208 पर 15 किलोमीटर हिस्से की मरम्मत का काम सिर्फ छह दिन में पूरा कर दिया है। 360 ट्रकों औऱ जेसीबी मशीनों की बदौलत त्रिपुरा में जनजीवन सामान्य हो पाया है। ईंधन से लेकर खाने-पीने की चीजों के ट्रक पहुंचने लगे हैं। लोकल लोगों की मदद के बिना यह काम नहीं हो सकता था।”

इस बीच यह खबर भी है कि रोड ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने ऐलान किया है कि त्रिपुरा के एनएच 208 और एनएच 44 को दुरुस्त करने का काम बहुत जल्द शुरू हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के बाकी हाइवे का भी सर्वे कराने को कहा है ताकि उनकी भी सही मरम्मत कराई जा सके।

अधिकारियों को सीधे फोन करते हैं मोदी?

इस घटना के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या वाकई प्रधानमंत्री मोदी काम करवाने के लिए अधिकारियों को सीधे फोन करते हैं। 2014 में सरकार बनने के वक्त भी यह बात सामने आई थी कि मोदी ने देश भर के सरकारी अधिकारियों के नंबरों की एक डायरेक्टरी बनवाई है। इसके जरिए वो हर उस काम पर नज़र रखते हैं जिनमें उनकी सीधी रुचि होती है। बनारस के एसपी रहे प्रांजल यादव ने भी एक बार प्रधानमंत्री से बात का जिक्र किया था। हालांकि इस तरह सीधे तौर पर करवाए जाने वाले कामों का जिक्र न तो कभी प्रधानमंत्री की तरफ से और न ही उन अधिकारियों की तरफ से किया जाता है।

त्रिपुरा के नेशनल हाइवे 208 की हालत और मरम्मत की कुछ तस्वीरें आप नीचे देख सकते हैं।

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