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‘कांग्रेसी पत्रकारों’ को क्यों पसंद करते हैं बीजेपी नेता?

अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का एक इंटरव्यू छपा है। अखबार ने इसे यूपी चुनाव से पहले बीजेपी अध्यक्ष का सबसे पहला इंटरव्यू बताकर छापा है (देखें नीचे)। इंटरव्यू रोहिणी सिंह नाम की जिस पत्रकार ने लिया है वो कांग्रेस की काफी करीबी मानी जाती हैं। इतना ही नहीं ये पत्रकार ट्विटर पर बीजेपी समर्थकों को बुरा-भला कहने और बीजेपी के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए जानी-जाती हैं। इकोनॉमिक टाइम्स एक बेहद कम सर्कुलेशन का आर्थिक अखबार है। उत्तर प्रदेश में इसका इंपैक्ट लगभग न के बराबर है। इंटरव्यू में ऐसी कोई गलत बात नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि अमित शाह ने इंटरव्यू देने के लिए इसी अखबार और इसी पत्रकार को क्यों चुना? बीजेपी अध्यक्ष चाहते तो इसी अखबार के किसी निष्पक्ष पत्रकार को भी इंटरव्यू दे सकते थे। कांग्रेस की करीबी पत्रकार को इंटरव्यू देने से एक तो उसका कद अपने संस्थान में बढ़ता है और दूसरा ये कि इससे दूसरे निष्पक्ष पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को निराशा होती है। बीजेपी अध्यक्ष ही नहीं, दूसरे कई बड़े बीजेपी नेता जब इंटरव्यू देने या कोई बड़ी खबर बताने की बारी आती है तो कांग्रेसी के तौर पर बदनाम पत्रकारों को ही पसंद करते हैं। ऐसे नेताओं की लिस्ट काफी लंबी है, लेकिन इनमें से कुछ बड़े चेहरों के बारे में हम आपको बता रहे हैं।

अरुण जेटली

वित्त मंत्री जेटली के बारे में दिल्ली की मीडिया में यह बात मशहूर है कि वो दिल्ली के हर अखबार और चैनल में अंदर तक दखल रखते हैं। उनके कहने भर से मीडिया वाले कई खबरों को उठाते और दबाते हैं। हमें नहीं मालूम कि इस दावे में कितना दम है, लेकिन खुद जेटली के बयान को भी मीडिया अक्सर तोड़ता-मरोड़ता रहा है। हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस ने कश्मीर के बारे में उनके बयान का मतलब कुछ इस तरह बदला कि उससे कश्मीर में दंगे भड़क जाएं। हालांकि खुद जेटली समय-समय पर ऐसे ही अखबारों और चैनलों के प्रोग्राम में शामिल होते हैं। उन पर एनडीटीवी की बड़ी महिला पत्रकार को समय-समय पर बीजेपी से जुड़ी बड़ी खबरें लीक करने का आरोप लगता रहता है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने इस पत्रकार को पहले ही बता दिया था कि देवेंद्र फड़नवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं।

मनोहर पर्रीकर

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर काफी वक्त से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए निष्ठावान बड़े पत्रकारों के निशाने पर रहे हैं। लेकिन जब निजी संबंध निभाने के चक्कर में अक्सर वो भी ऐसे पत्रकारों को उपकृत करते रहते हैं। लोकसभा चुनाव के बाद राजदीप सरदेसाई जब अपनी किताब लॉन्च कर रहे थे तो एक मौके पर मनोहर पर्रीकर भी उनके मेहमान बने। बीजेपी समर्थकों को एतराज यह था कि एक ऐसा पत्रकार जो नरेंद्र मोदी के खिलाफ झूठे अभियान का अगुवा रहा है उसके बुक लॉन्च में मनोहर पर्रीकर को नहीं जाना चाहिए।

मेनका गांधी

महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी कांग्रेसी तंत्र के पत्रकारों से करीबी की वजह से अक्सर चर्चा में रहती हैं। वो कई बार ऑफ बीट ब्रीफिंग के लिए भी उन पत्रकारों को बुलाती रहती हैं, जो बीजेपी के खिलाफ अभियान चलाने के लिए मशहूर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एनडीटीवी की एक महिला पत्रकार को बुलाकर ‘एक्सक्लूसिव’ जानकारी दी थी कि वो ऑनलाइन ट्रोल्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन लॉन्च करने जा रही हैं। शुरू से ही इस खबर को कुछ इस तरह से पेश करवाया गया कि इस हेल्पलाइन से नरेंद्र मोदी के ‘भक्तों’ की शिकायत की जाएगी। सोशल मीडिया पर बीजेपी समर्थकों ने इस कोशिश का यह कहते हुए कड़ा विरोध किया था कि यह एक तरह की सेंसरशिप है।

मीनाक्षी लेखी

दिल्ली से सांसद मीनाक्षी लेखी बीजेपी की तेज-तर्रार नेता मानी जाती हैं, लेकिन सेकुलर और सेलिब्रिटी पत्रकारों का मोह वो भी नहीं छोड़ पातीं। कुछ दिन पहले फौजियों के एक कार्यक्रम में मीनक्षी लेखी ने बरखा दत्त के साथ अपनी मुस्कुराते हुए तस्वीर ट्विटर पर शेयर की। बीजेपी समर्थकों ने जब इस पर हैरत जताई तो मीनाक्षी लेखी का जवाब था कि ‘इडियट, मैं अपने चुनाव क्षेत्र में अपने वोटरों के साथ हूं।’ लोगों ने पूछा कि क्या आपको लगता है कि बरखा दत्त आपकी वोटर हैं तो मीनाक्षी लेखी ने सफाई देनी शुरू कर दी। लेकिन यह सवाल अब भी रह जाता है कि क्या यह ठीक है कि बीजेपी का कोई नेता बरखा दत्त के लिए अपने ऑनलाइन सपोर्टर्स को इस तरह गाली बक दे। मीनाक्षी लेखी ने अपनी इस हरकत के लिए कभी माफी नहीं मांगी।

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कांग्रेसी पत्रकार प्रेमी बीजेपी नेताओं के कई अपवाद भी हैं। खुद पीएम मोदी के अलावा राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, जनरल वीके सिंह जैसे नेता आम तौर पर कांग्रेस के करीबी और विवादित पत्रकारों से दूरी ही बरतते हैं। अगर वो एक साथ कभी दिखते भी हैं तो कभी ऐसा नहीं सुना गया है कि इन पत्रकारों को उन्होंने कभी कोई खास खबर दी हो।

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