गोरक्षा के लिए केंद्रीय कानून की तैयारी में मोदी सरकार

गोरक्षा के नाम पर हिंदू समाज में फूट डालने की कोशिशों के बीच नरेंद्र मोदी सरकार बहुत जल्द इस बारे में एक केंद्रीय कानून लाने की तैयारी कर रही है। इस कानून के बनने से पूरे देश में गायों की हत्या रोकने और उनकी देखभाल के नियम एकसमान होंगे। इससे गोरक्षा के नाम पर अवैध वसूली भी रोकी जा सकेगी। अभी गायों की सुरक्षा पशु सुरक्षा कानून के तहत ही आता है।

गायों की रक्षा पर सख्त कानून

गोरक्षा समितियों और इस बारे में सरकारी रिपोर्टों की सिफारिशों के मुताबिक इस कानून में गायों की रक्षा के लिए बेहद सख्त उपाय होंगे। अभी कई राज्य सरकारों में गोवध कानून बने हुए हैं, लेकिन केंद्रीय कानून बनने की स्थिति में इसकी रोकथाम और सज़ा को लेकर होने वाला विवाद खत्म हो जाएगा। अभी अक्सर गायों की हत्या करने वाले इसका फायदा उठाते हैं। नए कानून में सख्त सज़ा का प्रावधान होगा।

  • गाय की हत्या करने पर 7 साल की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रस्ताव है।
  • गैर-कानूनी तौर पर गायों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने पर 5 साल की जेल और 10 हजार रुपये जुर्माना हो सकता है।
  • गायों की तस्करी में शामिल गाड़ियों को भी जब्त कर लिया जाएगा। साथ ही वाहन के मालिक को भी सज़ा होगी।
  • इस बिल में गायों के रख-रखाव और उसे खेती से जोड़ने के भी पूरे नियम-कायदे शामिल होंगे।

गोशाला समितियों ने की है मांग

गोरक्षा को लेकर जारी विवाद और उस पर पीएम मोदी के सख्त बयान के बाद से केंद्रीय कानून का मुद्दा तेज़ी के साथ उछला है। देश भर से कई गोरक्षा समितियां और गोपालक मांग कर रहे हैं कि एक केंद्रीय कानून बनाया जाए ताकि इस मामले पर चल रही भ्रम की स्थिति को दूर किया जा सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित हो कि गायों की रक्षा पुलिस की जिम्मेदारी हो, ताकि इस काम के लिए गली-गली में गोरक्षा दल बनने की नौबत ही न आए। कर्नाटक राज्य गोशाला फेडरेशन ने तो प्रधानमंत्री को भेजी अपनी चिट्ठी में लिखा है कि देश में ज्यादातर लोग इस कानून के समर्थन में हैं और अगर राजनीतिक रूप से कोई इसका विरोध करता है तो वह भी जनता के सामने आ जाएगा।

पुरानी है केंद्रीय कानून की मांग

7 नवंबर 1966 को गोरक्षा के केंद्रीय कानून की मांग को लेकर दिल्ली के वोट क्लब पर एक रैली हुई थी। इसमें लाखों लोग शामिल हुए थे, तब की इंदिरा गांधी सरकार ने साधु-संतों पर गोली चलवा दी थी। उस रैली की अगुवाई जनसंघ के नेता कर रहे थे और उसमें गोभक्तों का सरकार ने बेहद बर्बर तरीके से दमन किया था। तब से हर साल 7 नवंबर को दिल्ली में गोरक्षकों की सभा होती रही है। पिछले साल इस सभा में गृह मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी शामिल हुए थे। पहले के कई सम्मेलनों में खुद नरेंद्र मोदी भी शामिल हो चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस साल होने वाले गोरक्षक सम्मेलन में 50 साल पुरानी वो मांग पूरी हो जाएगी।

comments

Tags: ,