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बलूचिस्तान से पहले आजादी के लिए बेताब है सिंध

बलूचिस्तान में पाकिस्तान आजादी की लड़ाई पर तो सबका ध्यान है, लेकिन उससे कहीं अधिक बड़ा आजादी का आंदोलन इस वक्त सिंध प्रांत में चल रहा है। चीन की मदद से बन रहे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) के विरोध में पूरे सिंध प्रांत में लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। गुरुवार 25 अगस्त के दिन सिंध के कई छोटे-बड़े शहरों और दूसरे देशों में बसे सिंध के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किए। जीये सिंध मुत्ताहिदा महाज (JSMM) के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन को पाकिस्तान सरकार और सेना के दमन के बावजूद आम लोगों का भारी समर्थन भी मिल रहा है।

चीन की दखलंदाजी से नाराज हैं लोग

दरअसल पाकिस्तान ने यहां पर चीन को बड़े पैमाने पर जमीन दी हैं, जिस पर कथित तौर पर इकोनॉमिक कॉरीडोर बनाया जाना है। लोकल लोगों का कहना है कि इस कॉरीडोर से उन लोगों की जमीनें तो छीन ली जाएंगी, लेकिन जो उद्योग-धंधे लगेंगे उनमें बाहरी लोगों को लाकर बसाया जाएगा। साथ ही चीन और पाकिस्तानी सेना की गतिविधियां इस इलाके में बढ़ेंगी, जिससे अलग तरह की समस्याएं पैदा होंगी। पाकिस्तान सरकार यह सब सिंधी पहचान को हमेशा के लिए मिटाने के मकसद से कर रही है। इस कॉरीडोर के बनने से इस पूरे इलाके में पंजाबी मूल के पाकिस्तानियों की दखल बढ़ जाएगी और सिंधी लोग यहां अल्पसंख्यक बनकर रह जाएंगे।

अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में JSMM के चेयरमैन शफी मुहम्मद बुराफात की अगुवाई में प्रदर्शन हुए। इसके साथ ही  लगभग हर छोटे-बड़े शहर-कस्बे में लोग पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जुटे। कराची ही नहीं, बल्कि सकरंद, शहदादकोट, बदानी तलहार, बुरली शाह करीम, मीरपुर बथोरो, मीरपुर मथेलो, कोटरी, बदीन, बदाह, लरकाना, घोटकी, दौलतपुर, मेहर, पिथोरो, मीठी, खान वाहन, नसीराबाद जैसे शहरों में भी पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शनों में खूब भीड़ देखी गई। पिछले कुछ वक्त से इन इलाकों में पाकिस्तानी सेना का दम सबसे ज्यादा देखा गया है। कई जगहों पर प्रदर्शनों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किए। बड़ी तादाद में फ्रीडम फाइटर्स को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है और कई लोगों पर देशद्रोह जैसे मुकदमे भी दायर किए गए हैं।

पाकिस्तान से आजादी चाहते हैं सिंध के लोग

आजादी के वक्त फौजी ताकत से पाकिस्तान ने सिंध को अपने में मिला लिया था। बाद के वक्त में पाकिस्तान की राजनीति में पंजाब का दबदबा रहा। सबसे ज्यादा प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद सिंध के लोग गरीब से गरीब होते चले गए। यहां होने वाली तमाम आर्थिक गतिविधियों में भी सिंध के लोकल लोगों की भागीदारी नाममात्र की है। आज यह पाकिस्तान के सबसे गरीब इलाकों में से एक है। बलूचिस्तान की तरह यहां के लोग भी खुद को पाकिस्तान का उपनिवेश यानी कॉलोनी मानते हैं। बलूचिस्तान की तरह सिंध में भी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई बेहद एक्टिव है। यहां पर अब तक हजारों लोगों की रहस्यमय हालात में हत्या हो चुकी है। सिंध आजादी के आंदोलन से जुड़े सैकड़ों बुद्धिजीवी, पत्रकार और लेखक पिछले कुछ साल में या तो लापता हो गए या फिर उनके शव बरामद हुए।

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