क्या आईएसआई के पैसे पर चल रहा है इंडियन एक्सप्रेस?

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस जिस तरह से लगातार पाकिस्तान के पक्ष और भारत के विरोध में खबरें छाप रहा है, उससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह आईएसआई के पैसे पर चल रहा है। सोशल मीडिया पर खुलकर अब यह बात पूछी जाने लगी है। एक दिन पहले खबर आई कि संयुक्त राष्ट्र ने उन पतों की जांच करवाई, जिनके बारे में भारत दावा करता रहा है कि वहां पर दाऊद इब्राहिम रहता है। यूएन ने माना है कि भारत ने जो 9 पते दिए हैं, उनमें से 6 बिल्कुल ठीक हैं। 3 पतों को लेकर पुष्टि नहीं हो सकी है कि वहां दाऊद आता-जाता है या नहीं।

इंडियन एक्सप्रेस ने पलट दिया एंगल

अखबार ने इस खबर की हेडलाइन लिखी कि “भारत के दिए दाऊद के 9 में से 3 पते गलत पाए गए हैं”। इससे यह मतलब समझ आता है कि भारत का दावा झूठा था। हम यहां पर बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस के संपादक राजकमल झा कांग्रेस के प्रवक्ता संजय झा के भाई हैं। अकेले इस तथ्य से समझा जा सकता है कि अखबार की पाकिस्तानपरस्ती के पीछे कारण क्या है। देखिए इंडियन एक्सप्रेस अखबार की बदमाशी।
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एक्सप्रेस और कुछेक न्यूज वेबसाइट्स को छोड़ बाकी अखबारों ने इसी खबर का सही एंगल छापा। सबने बताया कि यूएन ने माना है कि 6 पते दाऊद के ही हैं और यह पक्का है कि वो कहीं और नहीं बल्कि पाकिस्तान में ही छिपा है। यह सवाल पैदा होता है कि आखिर क्या वजह थी कि इंडियन एक्सप्रेस ने इस खबर को बिल्कुल वैसे छापा, जैसे कोई पाकिस्तानी अखबार छापता। दरअसल यह सिलसिला पुराना है। कुछ दिन पहले आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने पर इंडियन एक्सप्रेस ने बाकायदा मातम मनाया था। तब अखबार ने अपने ट्विटर पेज को इस आतंकवादी के रंग में रंग दिया था।

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इससे पहले मुंबई हमले के गुनहगार याकूब मेमन की फांसी पर भी इंडियन एक्सप्रेस ने कुछ इस तरह से मातम मनाया था। इस खबर की हेडिंग बिल्कुल उसी अंदाज में लिखी गई, जिस अंदाज में पाकिस्तान का कोई अखबार इसे लिखता।

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इंडियन एक्सप्रेस समय-समय पर कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों में दंगे भड़काने की कोशिश भी करता रहा है। अभी हाल में ही इस अखबार ने वित्त मंत्री अरुण जेटली के एक बयान (पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें) को बदलकर छाप दिया। इस खबर ने पहले से ही जल रहे कश्मीर में आग में घी का काम किया। अगले दिन इस पर अखबार को माफी भी मागनी पड़ी। इसी तरह अक्सर यह अखबार अपनी खबरों में हिंदू और मुस्लिम शब्द का इस्तेमाल करता है। यहां तक कि अपराध की रुटीन खबरों में भी अगर पीड़ित मुसलमान हो तो इस अखबार में उसके धर्म का जिक्र जरूर किया जाता है। ताकि इससे तनाव फैले। हाल में पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में एक मुस्लिम लड़के की हत्या की खबर में इस अखबार ने यही कोशिश की थी। अखबार की खबर का नतीजा था कि आसपास के कुछ जिलों में हिंदू-मुस्लिम दंगों की भी नौबत आ गई थी।

इंडियन एक्सप्रेस पर क्या कर सकती है सरकार?

मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक इंडियन एक्सप्रेस के संपादक एक सोची-समझी साजिश के तहत इस तरह की हरकतें कर रहे हैं। अगर सरकार ने ऐसी खबरों पर एक भी नोटिस भेज दिया तो फौरन इस पर देश भर में हंगामा खड़ा कर दिया जाएगा। मीडिया की तथाकथित सेल्फ रेगुलेटरी संस्थाएं भी इस खेल पर चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे में जरूरी है कि आम लोग ही इंडियन एक्सप्रेस और ऐसे पाकिस्तान परस्त मीडिया संस्थानों और पत्रकारों की ऐसी हरकतों पर नज़र रखें और समय-समय पर इन्हें बेनकाब करते रहें।

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