नगला फतेला कांड पर यूपी सरकार ने गलती मानी

15 अगस्त के दिन लाल किले से पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण में गलती के लिए यूपी की अखिलेश यादव सरकार ने लिखित में गलती मान ली है। दरअसल प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में हाथरस जिले के नगला फतेला गांव में बिजली पहुंचने का जिक्र किया था। बाद में पता चला कि कि गांव तक बिजली के खंभे और तार तो पहुंचे हैं, लेकिन बिजली नहीं आई। सच्चाई सामने आने पर तथ्यों की जांच के बिना मीडिया ने प्रधानमंत्री पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे, लेकिन अब जब यूपी सरकार ने माना है कि यह गलती उसकी वजह से हुई है तो मीडिया ने चुप्पी साध ली।

केंद्र ने तीन दिन में मांगा था जवाब

केंद्र सरकार ने इस मामले पर यूपी सरकार को नोटिस जारी करके तीन दिन में बताने को कहा था कि यह चूक कैसे हुई? क्योंकि राज्य सरकार की तरफ से भेजी गई जानकारी के मुताबिक दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) के तहत नगला फतेला गांव में बिजली पहुंच चुकी है। जवाब में बिजली वितरण करने वाली कंपनी दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) ने माना है कि उसके अधिकारियों से स्थिति की समीक्षा में गलती हुई। उनकी दलील है कि पुरानी परिभाषा के मुताबिक इस गांव को बिजली आपूर्ति वाला माना जाता रहा है। लेकिन नई परिभाषा के मुताबिक इस गांव में जल रही बिजली चोरी की है।

मामला सामने आने के बाद बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि किसी भी केंद्रीय योजना के तहत हुए काम की जानकारी पर हमें राज्य सरकारों पर निर्भर होना पड़ता है। राज्य सरकार अगर कोई जानकारी दे रही है तो वो औपचारिक तौर पर सही मानी जाती है। ऐसे में केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री पर मीडिया में हो रही छींटाकशी बिल्कुल गैर-वाजिब है।

नगला फतेला में क्या है सही स्थिति?

वैसे यह सच्चाई है कि हाथरस के इस गांव तक आजादी के बाद पहली बार बिजली के खंभे और तार पहुंच चुके हैं। लेकिन यूपी सरकार के निकम्मेपन का नतीजा है कि इन तारों में अब तक बिजली नहीं आई। यहां हम आपको बता दें कि राज्यों में बिजली पहुंचाने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की ही होती है। केंद्रीय योजना के तहत सिर्फ बिजली के खंभे, तार और दूसरे बुनियादी ढांचे को मुहैया कराया जाता है। इस तथ्य के बावजूद मीडिया ने सारी गलती का ठीकरा मोदी सरकार पर फोड़ा और जब यूपी सरकार ने गलती मान ली तो चुप्पी साध कर बैठ गए।

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