दिल्ली के किसान ने केजरीवाल को क्यों कहा ‘संपेरा’!

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ किसानों का गुस्सा भड़क उठा है। खुद को किसानों का सबसे बड़ा हितैषी बताने वाली दिल्ली सरकार ने चुपके से किसानों के बिजली बिल में भारी बढ़ोतरी कर दी है। हालत यह है कि जिन किसानों के बिल पहले 2-3 हजार रुपये आया करते थे वो अब बढ़कर 30 से 40 हजार रुपये तक आ रहे हैं। दिल्ली सरकार ने ट्यूबवेल में इस्तेमाल होने वाली बिजली को घरेलू या कृषि की कैटेगरी से हटाकर कमर्शियल कैटेगरी में डाल दिया है। किसानों ने जब इस बारे में दिल्ली सरकार और बिजली कंपनी एनडीपीएल से बात की तो दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने में लग गईं। नाराज किसानों ने इस मुद्दे पर पीएम मोदी से मिलकर फरियाद करने की बात कही है।

दिल्ली के किसानों के साथ धोखा!

दिल्ली की सीमा में 100 से ज्यादा गांव हैं, जिनमें खेती भी होती है। इन किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल की बिजली की जरूरत होती है। अब तक यह बिजली डोमेस्टिक कैटेगरी में आती थी। किसान बाकायदा इनके लिए बिल चुकाते थे। लेकिन केजरीवाल सरकार ने बिना बताए दरें करीब 10 गुना तक बढ़ा दीं। पहले एक यूनिट का रेट 2.75 रुपये था और अब 9.50 रुपये हो गया है। जो शुल्क पहले 20 रुपये किलो वाट था अब 100 रुपये किलोवाट हो गया है। नाराज किसानों ने कहा है कि वो पंजाब में जाकर इस शोषण की जानकारी वहां के किसानों को देंगे, ताकि सभी लोग आम आदमी पार्टी सरकार की असलियत को समझ सकें।

दिल्ली सरकार से नाराज एक किसान का बयान सुनिए।

बिजली काटने की मिल रही है धमकी

बुआई के सीजन के बीच में बिजली कंपनियां किसानों को धमकी दे रही हैं कि अगर उन्होंने बिल नहीं चुकाया तो बिजली काट दी जाएगी। किसानों ने धमकी दी है कि अगर बिजली काटी गई तो वो इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसकी जिम्मेदार दिल्ली सरकार होगी। किसानों की शिकायत है कि अगर उन्हें कमर्शियल रेट पर बिजली का बिल भरना पड़ा तो इससे खेती की लागत कई गुना बढ़ जाएगी। फिर उन्हें मजबूर होकर खेती का काम छोड़ना पड़ जाएगा।

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