काश हमें भी सिंधु, मरीन जैसे जीतना-हारना आता!

विनीत कुमार के फेसबुक पेज से साभार

विनीत कुमार के फेसबुक पेज से साभार

हम बदनसीब, टेलीविजन के इस पवित्र दृश्य को अपने पेशे में कहां देख पाएंगे? ये कोई मास्टरी की नौकरी के लिए इंटरव्यू और परिणाम थोड़े ही न था कि सिंधु सेलेक्ट हुई प्रतिभागी कैरोलीना मरीन का नाम घृणा से लेकर कहती। सब सेटिंग है, सब जुगाड़ है, भाई-भतीजावाद है, यूपी-बिहार कार्ड है।
वो दोनों दुनिया के सामने एक खुले मैंदान की जांबाज खिलाड़ी है। वो जानती है कि जीत-हार के बीच दोनों के बीच जो कॉमन चीज है खून को पसीने के रंग में बदल देने की तरलता। वो जानती हैं कि दोनों ने यहां तक पहुंचने के लिए समान रूप से अपनी हड्डियां गलाई हैं। दोनों ने न जाने कितनी हजार रातें और कुंहासे से भरी सुबहें इसके लिए झोंक दी हैं।

और यही कॉमन चीजें टेलीविजन स्क्रीन पर एक बेहद ही पवित्र दृश्य पैदा करती हैं। कैरोलीना मरीन जीत के बावजूद जमीन पर लेट जाती हैं। भावुकता के इस क्षण में बेहद तरल हो जाती हैं और मैच हार चुकी सिंधु उसे बेहद प्यार से उठाती है, सहारा देती हैं। हॉलीवुड के किसी भी सिनेमा से ज्यादा प्रभावी रोमांटिक दृश्य। हिंदी सिनेमा के किसी भी मेलोड्रामा से कहीं ज्यादा असरदार नजारा। इस दृश्य में कहीं भारत, कहीं स्पेन नहीं है। कहीं कोच, कहीं घर-नाते-रिश्तेदार नहीं हैं। कोई हाजीपुर-गाजीपुर, बलिया-बनारस कनेक्शन नहीं है। कोई भाषा, कोई इगो नहीं है। है तो बस दो मेहनतकश खिलाड़ियों के बीच की तरलता, वो संवेदनशीलता जिन्हें इन दोनों ने कितनी सख्ती से खेल के दौरान रोके होंगे। शायद उस वक्त पैदा भी नहीं हुए होंगे।

सिंधु और कैरोलीना एक-दूसरे को हग करती हैं। ये हार-जीत से कहीं ज्यादा उस मेहनत का सम्मान है जिसके बारे में दोनों भली-भांति परिचित हैं। ये कोई इंटरव्यू से लौटी हुई कैंडिडेट तो नहीं थी जिसे इंटरव्यू के पांच दिन पहले से पता था कि किसका चयन होना है। बावजूद इसके वो चली गई क्योंकि जाकर वो बेशर्म नजारे की रेगुलर दर्शक बनी रह सके।

हम कहां कर पाते हैं एक-दूसरे का इस तरह सम्मान? हम कहां यकीन कर पाते हैं कि जिसका चयन हुआ है उसने हाड़-तोड़ मेहनत की होगी। अपनी कई रातें खराब की होंगी। एक-एक फुटनोट के लिए घंटों माथापच्ची की होगी। चयनित कैंडिडेट के लिए उसका गाइड देवता है, तारणहार है लेकिन दो कैंडिटेट के बीच कभी वो पवित्रता आ सकती है जो आज हमने एक स्पोर्ट्स चैनल पर देखी?

किसी भी धार्मिक चैनल से कहीं ज्यादा पवित्र दृश्य, किसी भी रोमांटिक फिल्म से ज्यादा भीतर तक भिगो देनेवाले विजुअल्स। किसी एक के आका ने हममे से कितनों के मन की पवित्रता को छीन लिया है। हम मरकर भी सिंधु-मरीन नहीं हो सकते। हम बदनसीब पारदर्शिता के बीच की इस पवित्रता से कभी नहीं गुजर सकते।

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