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केजरीवाल ने सिद्धू को न घर का छोड़ा, न घाट का

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल की दगाबाजी के शिकार लोगों में नया नाम जुड़ गया है। ये नाम है नवजोत सिंह सिद्धू का। केजरीवाल ने उन्हें पंजाब में मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने का वादा किया था। इस भरोसे पर सिद्धू ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा भी दे दिया था। लेकिन बाद में केजरीवाल अपने वादे से मुकर गए। हमारे सूत्रों के मुताबिक अब केजरीवाल और सिद्धू की बात पूरी तरह टूट चुकी है। आम आदमी पार्टी ने मीडिया में खबरें उड़ाई थीं कि 15 अगस्त को सिद्धू पार्टी ज्वाइन करने वाले हैं, लेकिन यह खबर सरासर गलत निकली।

केजरीवाल और सिद्धू में क्यों बिगड़ी बात?

इसके कई कारण बताए जा रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा कारण यह है कि केजरीवाल चाहते हैं कि अगर पंजाब में उनकी सरकार बने तो मुख्यमंत्री पद पर उनका कोई विश्वासपात्र ही बैठे। सिद्धू के साथ दिक्कत यह है कि वो स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में केजरीवाल उन्हें सीएम के लिए प्रोजेक्ट करने का रिस्क लेने को तैयार नहीं हैं। हालांकि उन्हें फंसाने के लिए केजरीवाल ने ही यह खबर उड़वाई थी कि पंजाब में वो सिद्धू को सीएम उम्मीदवार बनाने वाले हैं। देखिए और क्या-क्या वजह हैं, जिनसे केजरीवाल और सिद्धू की बात नहीं बन पाई।

  • केजरीवाल चाहते हैं कि सिद्धू फौरन कॉमेंट्री और टीवी शोज़ छोड़ दें। सिद्धू इसके लिए तैयार नहीं।
  • केजरीवाल सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर को पार्टी में लेने को तैयार नहीं हैं। जबकि पहले उन्होंने इस पर रजामंदी जताई थी।
  • सिद्धू अपनी पसंद के कुछ नेताओं को आम आदमी पार्टी में लाना चाहते थे, केजरीवाल इसके लिए तैयार नहीं हैं।
  • सिद्धू चाहते हैं कि टिकट बंटवारे में उनकी भी राय ली जाए, लेकिन केजरीवाल इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं।
  • हमारे सूत्र के मुताबिक सिद्धू इस बात से भी नाराज हैं कि राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने के बाद केजरीवाल ने स्वागत में ट्वीट तो किया, लेकिन उनका फोन तक उठाना बंद कर दिया।

अब क्या करेंगे नवजोत सिंह सिद्धू?

सिद्धू के पास अब कुल तीन रास्ते हैं। हमारे सूत्र के मुताबिक वो तीसरा रास्ता ही अपना सकते हैं। यह वो रास्ता है जिससे वो पंजाब में अरविंद केजरीवाल का खेल बिगाड़ सकते हैं। सबसे पहले देखते हैं क्या है पहला रास्ता

  1. बीजेपी में वापस लौट जाएं: तकनीकी रूप से सिद्धू ने अभी तक बीजेपी छोड़ा नहीं है। उन्होंने इस्तीफा सिर्फ राज्यसभा से दिया था। पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष विजय सांपला ने कहा भी था कि सिद्धू के लिए दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। हालांकि सिद्धू ने जिस तरह अरुण जेटली पर खुलकर हमले बोले थे ऐसे में यह रास्ता उतना आसान नहीं होगा। हो सकता है कि अमित शाह से माफी मांग कर उन्हें वापसी की इजाज़त मिल जाए। इस तरीके में दिक्कत यही है कि अब सिद्धू की वो हैसियत नहीं रहेगी, जो पहले कभी हुआ करती थी।
  2. कांग्रेस में चले जाएं: पंजाब कांग्रेस सिद्धू को अपनी ओर बुला रही है। लेकिन उन्हें भी एहसास है कि सिद्धू किसी मुसीबत से कम नहीं हैं। सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी के लिए वो काफी कुछ बुरा-भला बोल चुके हैं। सिद्धू का मिजाज़ भी कांग्रेस की चापलूसी वाली कल्चर से मेल नहीं खाता। कांग्रेस में उन्हें सीएम पद का उम्मीदवार या कोई बड़ी हैसियत दी जाएगी इसकी उम्मीद भी न के बराबर है।
  3. नई पार्टी लॉन्च कर दें: हमारी जानकारी के मुताबिक सिद्धू ‘अपना पंजाब’ नाम से नई पार्टी लॉन्च करने पर भी विचार कर रहे हैं। उनको लगता है कि ऐसा करके वो आम आदमी पार्टी से हिसाब चुकता ले सकेंगे और इस तरह चुनाव के बाद ही सही बीजेपी में वापसी के रास्ते खुल जाएंगे। अगर सिद्धू अपनी पार्टी बनाते हैं तो ज्यादा चांस है कि वो आप उम्मीदवारों के ही वोट काटेंगे। तीनों रास्तों में से सिद्धू क्या चुनते हैं यह बहुत जल्द पता चल जाएगा।

 

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