सिखों पर कांग्रेसी अत्याचार की एक और निशानी खत्म

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों में रह रहे सिखों की ब्लैकलिस्ट को रद्द करवा दिया है। पंजाब में आतंकवाद के दौर में उस वक्त की कांग्रेस सरकार ने 212 एनआरआई सिख परिवारों को धर्म के आधार पर ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके साथ ही इन लोगों पर भारत आने पर 32 साल से लगी पाबंदी हट गई है। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले इसे बेहद अहम कदम माना जा रहा है।

पीएम मोदी की दखल के बाद फैसला

1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार और 1985 में एयर इंडिया के कनिष्क विमान को बम से उड़ाने की घटना के बाद तब की राजीव गांधी सरकार ने यह रोक लगाई थी। इस पाबंदी के दायरे में आने वाले ज्यादातर एनआरआई सिख अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के रहने वाले हैं। ये वो दौर था जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था। सिख परिवारों को भारत आने से रोकने के इस फैसले पर उस वक्त भी काफी विवाद हुआ था। क्योंकि यह फैसला बिना किसी जांच पड़ताल के किया गया था। कई लोगों ने इसके पीछे धार्मिक पूर्वाग्रह होने का आरोप भी लगाया था।

सभी मामलों की हो रही है समीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन और कनाडा की यात्राओं के दौरान कई सिख एनआरआई समूहों ने उनसे मिलकर अपनी यह मांग रखी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने गृह मंत्रालय से इस बारे में जानकारी मंगाई थी। यह मामला इतना पुराना था कि ज्यादातर लोगों को इसके बारे में जानकारी तक नहीं थी। प्रधानमंत्री के आदेश पर जब पाबंदी की लिस्ट की समीक्षा की गई तो पाया गया कि कुल 324 परिवारों में से 212 को तो बिना किसी गलती के ही सजा दे दी गई थी। इन सभी पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी हटा ली गई है। बाकी मामलों की भी समीक्षा की जा रही है और बहुत जल्द ही उनके बारे में फैसला हो जाने की उम्मीद है। फिलहाल नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले से विदेशों में बसे सैकड़ों भारतीय सिख परिवारों ने राहत की सांस ली है।

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