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यूपी में गांवों की बिजली का पैसा कौन खा गया?

15 अगस्त को लालकिले से प्रधानमंत्री ने यूपी के हाथरस जिले के नगला फतेला गांव में पहली बार बिजली पहुंचने का जिक्र किया था। लेकिन जब बाद में पता चला कि गांव में बिजली के खंभे और तार तो पहुंचे, लेकिन बत्ती अभी तक नहीं आई। इस चूक ने उत्तर प्रदेश में गांवों तक बिजली पहुंचाने की स्कीम में बड़े घोटाले की पोल खोल दी है। जो शुरुआती जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र से इस काम के लिए करोड़ों रुपये तो ले लिए लेकिन कई जगहों पर कोई काम नहीं किया। केंद्र सरकार ने मामले का संज्ञान लेते हुए दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (DVVNL) को नोटिस भेजा है। केंद्रीय पॉवर मिनिस्ट्री के अधिकारियों के मुताबिक यह NRHM की तरह बहुत बड़ा घोटाला साबित हो सकता है, लिहाजा बहुत जल्द इसकी सीबीआई जांच भी कराई जा सकती है।

क्या है ये पूरा मामला?

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य सरकार की तरफ से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर ही इलेक्ट्रिसिटी पहुंचाने का दावा किया था। केंद्रीय स्कीम के तहत बिजली के तार और खंभे पहुंचाने का काम चल रहा है, लेकिन उनमें बिजली देना राज्य सरकार की बिजली वितरण कंपनी की ही जिम्मेदारी है। जब पता चला कि नगला फतेला में बिजली पहुंची ही नहीं तो इसकी वजह से पीएम मोदी पर सवाल उठने लगे। केंद्र सरकार की शुरुआती पड़ताल में शक की सुई यूपी सरकार पर घूम रही है। ऐसी केंद्रीय योजनाओं के अमल की जिम्मेदारी आम तौर पर राज्य सरकारों की ही होती है।

हरकत में आई केंद्र सरकार

बुधवार को पूरे दिन ऊर्जा मंत्रालय ने इस मामले से जुड़े कागजातों की छानबीन की। मंत्रालय से लेकर पीएमओ तक में कई बैठकें हुईं।ऊर्जा राज्यमंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा है कि उन्हें शक है कि ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (DDUGJY) में बड़ा घोटाला चल रहा है। इलेक्ट्रिसिटी पहुंचाने के नाम पर जो पैसा लिया गया उसका सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यूपी सरकार की दी जानकारी के मुताबिक योजना के तहत डेढ़ साल में 1500 गांवों में बिजली पहुंची। अब इन सबकी जांच कराई जाएगी। फंड के इस्तेमाल का भी ऑडिट कराया जाएगा। केंद्र सरकार इस पर जल्द से जल्द काम शुरू करना चाहती है क्योंकि यह शक है कि अखिलेश सरकार सबूत छिपाने के लिए लीपापोती की कोशिश कर सकती है। अगर गांवों में बिजली पहुंचाने की इस स्कीम में घोटाला पकड़ा जाता है तो यह यूपी चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी सरकार के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है।

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